लाइफ डिटेक्टर, खोजी कुत्ते और हाइड्रोलिक जैक... सत्य निकेतन में NDRF का हाईटेक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद एनडीआरएफ ने अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों ...और पढ़ें

दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग हादसा। जागरण
HighLights
एनडीआरएफ ने अत्याधुनिक उपकरणों से किया सफल बचाव अभियान।
लाइफ डिटेक्टर, खोजी कुत्तों ने फंसे लोगों का पता लगाया।
हाइड्रोलिक जैक, कटर से मलबा हटाकर सुरक्षित रास्ता बनाया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम जिला के सत्य निकेतन इलाके में 50 साल से अधिक पुरानी पांच मंजिला बिल्डिंग (ब्वायज पीजी) के रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक भरभराकर गिरने के बाद मलबे में फंसे छात्रों व मजदूरों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के अत्याधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित रेस्क्यू कर्मी जिंदगी की उम्मीद बनकर सामने आए।
मलबे के नीचे दबे लोगों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए लाइफ डिटेक्टर, प्रशिक्षित खोजी कुत्ते, हाइड्रोलिक उपकरण और अन्य टेक्निकल इक्विपमेंट की मदद ली गई।
वहीं, मलबे में दबे लोगों तक पहुंचने और मलबे को हटाकर सुरक्षित रास्ता बनाने के लिए डायमंड चेन सा, हाइड्रोलिक जैक, काम्बी कटर और प्लाज्मा कटर जैसे अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इन तकनीक और करीब 70 रेस्क्यूकर्मियों की लगातार मेहनत के चलते एनडीआरएफ ने मलबे में फंसे सभी छात्रों व अन्य को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
एनडीआरएफ का हाई-टेक रेस्क्यू
हादसे के बाद एनडीआरएफ की दो टीमें एक साथ मौके पर रेस्क्यू आपरेशन में जुट गई। 70 से अधिक जवान लगातार सर्च आपरेशन और मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे रहे। दो अतिरिक्त टीमों को रिजर्व में रखा गया, जिन्हें जरूरत पडऩे पर रोटेशन वाइज इस्तेमाल में लाया गया।
रेस्क्यू आपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती मलबे के भीतर जीवित लोगों की मौजूदगी का पता लगाना था। इसके लिए एनडीआरएफ ने लाइफ डिटेक्टर और प्रशिक्षित कुत्ते की मदद ली। इनसे मिले संकेतों के आधार पर जवानों ने मलबे के अलग-अलग हिस्सों में बेहद सावधानी से सर्च किया।
इसके अलावा मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और पीजी में रहने वाले छात्रों से मिली जानकारी को भी संभावित पीडि़तों की लोकेशन तलाशने में महत्वपूर्ण इनपुट के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

जीवित लोगों की लोकेशन का पता चलने के बाद उन्हें बाहर निकालने के लिए ब्रीचिंग और कटिंग तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ा। मलबे में रास्ता बनाने के लिए डायमंड चेन सा, हाइड्रोलिक जैक और काम्बी कटर ने अहम भूमिका निभाई। जरूरत के अनुसार प्लाज्मा कटर समेत अन्य स्पेशल कटिंग इक्विपमेंट का भी इस्तेमाल किया गया।
वहीं, मलबे के अनस्टेबल हिस्सों को सपोर्ट देने के लिए हाई-स्ट्रेंथ इन्फ्लेटेबल बैग और शोरिंग इक्विपमेंट लगाए गए, ताकि दोबारा मलबा खिसकने का खतरा कम किया जा सके और रेस्क्यू कर्मियों के साथ अंदर फंसे लोगों की सेफ्टी सुनिश्चित हो।
एनडीआरएफ के जवानों ने संभावित पीडि़तों की लोकेशन मिलने के बाद तेजी से लेकिन बेहद सावधानी के साथ कार्रवाई की। टीम ने एक अचेत हालत में मिले व्यक्ति को करीब 15 मिनट में मलबे से बाहर निकाल लिया, जबकि दो अन्य लोगों, जो होश में थे, उन्हें करीब 30 मिनट में सुरक्षित बाहर निकाला गया।

पूरे आपरेशन के दौरान जवानों का मुख्य फोकस जीवित लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचने और उन्हें बिना किसी अतिरिक्त नुकसान के सुरक्षित बाहर निकालने पर रहा।
लगातार जारी रहेगा रेस्क्यू ऑपरेशन
रेस्क्यू आपरेशन की निगरानी मौके पर एनडीआरएफ की 16वीं बटालियन के कमांडिंग आफिसर सुनील सिंह ने अपने अधिकारियों और रेस्क्यू कर्मियों के साथ की। वहीं, डीआइजी आपरेशंस सतविंदर सिंह सूडान भी ग्राउंड पर मौजूद रहकर आपरेशन की निगरानी करते रहे।
अधिकारियों के मुताबिक, मलबे की स्थिति और अंदर लोगों के फंसे होने की संभावना को देखते हुए रेस्क्यू आपरेशन लगातार जारी रखा गया है। जवान मलबे के हर हिस्से की बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित व्यक्ति तक पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
