सोसायटी के गेट से मोबाइल लोकेशन तक, डिजिटल सबूतों से CBI ने कैसे जोड़ी NEET-UG पेपर लीक की कड़ियां?
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई के आरोपपत्र का मुख्य आधार डिजिटल फोरेंसिक है, जिसने एक्सेस-कंट्रोल ऐप और मोबाइल डेटा से आरोपियों की पहचान की। ...और पढ़ें

नीट यूजी पेपर लीक में सीबीआई का खुलासा। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
सीबीआई आरोपपत्र में डिजिटल फोरेंसिक जांच सबसे अहम आधार
एक्सेस-कंट्रोल ऐप और मोबाइल डेटा से आरोपियों की पहचान हुई
बिचौलियों ने लीक प्रश्नपत्रों को कई राज्यों तक पहुंचाया
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में CBI के आरोपपत्र में डिजिटल फोरेंसिक को जांच का सबसे अहम आधार बनाया गया है।
जांच एजेंसी ने एनटीए विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी की पुणे स्थित सोसायटी के एक्सेस-कंट्रोल ऐप, छात्रों की एंट्री के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR) और लोकेशन डाटा का मिलान किया।
इसके जरिये यह पता लगाया गया कि परीक्षा से पहले किन अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों की विशेष कक्षाओं के लिए वहां आवाजाही हुई थी।
एक्सेस-कंट्रोल ऐप और मोबाइल लोकेशन से मिला सुराग
कुलकर्णी की सोसायटी में आने-जाने वालों की एंट्री दर्ज करने वाले ऐप के रिकॉर्ड से CBI ने अप्रैल में वहां पहुंचे छात्रों और उनके अभिभावकों की मौजूदगी चिह्नित की।
इन रिकॉर्ड का संबंधित मोबाइल फोन के सीडीआर और लोकेशन विश्लेषण से भी मिलान किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह डिजिटल ट्रेल विशेष कोचिंग कक्षाओं और पेपर लीक की आगे की कड़ी जोड़ने में अहम साबित हुआ।
मनीषा वाघमारे की भूमिका भी जांच में अहम
CBI के मुताबिक, इस नेटवर्क को उजागर करने में मनीषा संजय वाघमारे की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। एजेंसी का आरोप है कि वाघमारे ने पीवी कुलकर्णी और मनीषा मंधारे की विशेष कक्षाओं में छात्रों को भेजा, वहां लिखे गए प्रश्नों वाली नोटबुक हासिल की और लीक सामग्री को आगे पहुंचाया। यही सामग्री राजस्थान और हरियाणा तक पहुंची।
बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचा प्रश्नपत्र
चार्जशीट में बताया गया है कि विषय विशेषज्ञों से निकली प्रश्न सामग्री पहले बिचौलियों और फैसिलिटेटरों तक पहुंची। इनमें तेजस हर्षदकुमार शाह, डॉ. मनोज बहगवानराव शिरूरे, धनंजय निवृत्ति लोखंडे और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर समेत अन्य आरोपित शामिल हैं। इसके बाद प्रश्नों की सप्लाई अभ्यर्थियों तक की गई।
कोचिंग संचालक समेत कई राज्यों के आरोपी चार्जशीट में
CBI ने कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मुतगांवकर को भी आरोपित बनाया है। आरोप है कि उसने कुलकर्णी से एक बिचौलिए के जरिए प्रश्न हासिल किए और आर्थिक लाभ के लिए उन्हें छात्रों में बांटा।
राजस्थान में शुभम मधुकर खैरनार, मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल तथा हरियाणा में यश यादव समेत अन्य आरोपितों पर भी लीक प्रश्न आगे पहुंचाने का आरोप है। CBI के अनुसार, खैरनार ने अभ्यर्थियों से पैसे लेने के साथ शैक्षणिक दस्तावेज और ब्लैंक चेक सुरक्षा के तौर पर लिए और आगे की सप्लाई से जुड़े लोगों के संपर्क में रहा।
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ऑडियो रिकॉर्डिंग में 10 से 12 लाख रुपये की डील का दावा
जांच एजेंसी को मंगीलाल बिवाल के मोबाइल से मिली ऑडियो रिकॉर्डिंग भी अहम साक्ष्य मिली। CBI के मुताबिक, बातचीत में परीक्षा से चार दिन पहले पीडीएफ या हार्ड कॉपी में पेपर देने, 10 से 12 लाख रुपये कीमत, 150 प्रश्नों की विशेष डील और अन्य खरीदारों के लिए 450 प्रश्नों के अलग सेट की चर्चा सामने आई।
दिल्ली विश्वविद्यालय की जांच में प्रश्नों का हुआ मिलान
CBI ने विभिन्न अभ्यर्थियों और बिचौलियों से बरामद सामग्री की दिल्ली विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ समिति से जांच कराई। इसमें नीट-यूजी 2026 के कैलाश, शिवालिक, सेट-दो और सेट-तीन के प्रश्नों से मिलान पाया गया। एजेंसी के अनुसार, विशेषज्ञों की पहुंच वाले सेटों में यह मिलान 85 प्रतिशत तक पहुंचा।
फोरेंसिक जांच से भी मजबूत हुई चार्जशीट
फोरेंसिक जांच में सरकारी प्रश्नित दस्तावेज परीक्षक ने जब्त सामग्री में मौजूद कई प्रश्नों की लिखावट का मिलान संबंधित विशेषज्ञों से किया। CBI के अनुसार, 68 भौतिकी प्रश्नों की लिखावट हवलदार और तेजस शाह से जुड़ी मिली, जबकि रसायन विज्ञान की सामग्री कुलकर्णी के नोट्स और जीव विज्ञान की सामग्री मंधारे के नोट्स से मेल खाती पाई गई।