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    नीट-यूजी पेपर लीक में बड़ा खुलासा, ट्यूशन शिक्षकों ने रची पूरी साजिश

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 11:23 PM (IST)

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच से खुलासा हुआ है कि प्रश्नपत्र सीधे परीक्षा केंद्र से नहीं, बल्कि ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षकों के माध्यम स ...और पढ़ें

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच से खुलासा हुआ है। फाइल फोटो

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच से खुलासा हुआ है। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआइ की जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र सीधे परीक्षा केंद्र से नहीं, बल्कि ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षकों के जरिए बाहर आया। सूत्रों के अनुसार, एनटीए के पैनल में शामिल तीन विषय विशेषज्ञों ने प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके मराठी अनुवाद के दौरान सवाल याद कर लिए। बाद में उन्होंने अपने चुनिंदा छात्रों को इन्हें बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न बताकर पढ़ाया।

    सीबीआइ का दावा है कि एनटीए के पैनल में शामिल रसायन विज्ञान के शिक्षक पीवी कुलकर्णी, भौतिकी की शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंडारे और जीवविज्ञान की शिक्षिका मनीषा संजय हवालदार को प्रश्नपत्र तैयार करने के साथ-साथ मराठी अनुवाद की जिम्मेदारी भी दी गई थी। इससे उन्हें अंतिम प्रश्नपत्र लंबे समय तक देखने का अवसर मिला।

    जांच में सामने आया है कि तीनों विशेषज्ञों को प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित वातावरण में रखा गया था, लेकिन वे प्रतिदिन अपने घर जाते थे और इस दौरान निजी ट्यूशन भी लेते थे। आरोप है कि उन्होंने अंतिम प्रश्नपत्र के सवाल याद कर लिए और घर लौटकर उनका प्रश्न बैंक तैयार किया। बाद में अपने चुनिंदा छात्रों को इन्हें बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न बताकर पढ़ाया गया, बिना यह बताए कि यही प्रश्न आगामी नीट परीक्षा में आने वाले हैं।

    जांच के अनुसार, पुणे की एक ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे को इन ट्यूशन पढ़ने वाले कुछ छात्रों से यह प्रश्न बैंक मिला। उसने इसे प्रश्नपत्र के प्रारूप में टाइप कर धनंजय लोखंडे को दिया। इसके बाद बिचौलियों के जरिए यह प्रश्नपत्र कई राज्यों में लाखों रुपये लेकर बेचा गया और अभ्यर्थियों में बांटा गया।

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    सूत्रों का कहना है कि यदि मनीषा वाघमारे इस पूरे घटनाक्रम में शामिल नहीं होती तो यह प्रश्न बैंक सीमित छात्रों तक ही रहता और संभवत मामला कभी उजागर नहीं होता। इसी दौरान एक अभ्यर्थी के हाथ में प्रश्नपत्र पहुंचा, जिसने एनटीए तो इसकी जानकारी दी। जिसके बाद 12 मई को परीक्षा रद कर दी गई थी और जांच सीबीआइ को सौंप दी गई।

    सीबीआइ ने इस मामले में 13 आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। इनमें तीनों विषय विशेषज्ञ, मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग और अन्य बिचौलिए शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि मामले में धन के लेन-देन की जांच के दौरान कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता भी फ्रीज किया गया है।

    जांच एजेंसी का मानना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसका अनुवाद एक ही लोगों से कराना इस पूरे मामले की सबसे बड़ी प्रशासनिक चूक रही। इसी वजह से सीबीआइ भविष्य में दोनों जिम्मेदारियां अलग-अलग लोगों को सौंपने की सिफारिश कर सकती है।

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