न्यू अशोक नगर में सीलिंग के डर से 250 दुकानें हुई बंद, शटर हटाकर खड़ी की गई दीवारें
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में संपत्तियों के दुरुपयोग के सर्वे के डर से न्यू अशोक नगर में करीब 250 दुकानें और रेस्तरां बंद हो गए हैं। दुकानदार अप ...और पढ़ें
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सीलिंग के डर से दीवारें खड़ी कर रहे दुकानदार।
HighLights
सीलिंग के डर से 250 दुकानें और रेस्तरां बंद।
दुकानदार शटर हटाकर दीवारों का निर्माण कर रहे।
संपत्तियों को दुरुपयोग सर्वे से बचाने का प्रयास।
शुजाउद्दीन, पूर्वी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में संपत्तियों के दुरुपयोग को लेकर किए जा रहे सर्वे से बचने के लिए दुकानदारों ने अलग तरीके निकाल लिए हैं। सर्वे में नाम आने के डर से दुकानदार अपनी संपत्तियों को फिर से रिहायश में बदल रहे हैं।
ऐसी ही तस्वीर पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर से सामने आई हैं। यहां की मुख्य सड़क जहां दुकानों व रेस्तरां की भरमार थीं। अब यह सड़क सुनी पड़ी है। पिछले तीन दिनों से यहां दहशत व एक अजीब खामोशी छाई हुई है। घरों में बनी दुकानों व रेस्तरां के दरवाजे हटाकर वहां पर दीवारें खड़ी कर दी गई हैं। निगम की सिलिंग के डर से दुकानों व रेस्तरां का नामोनिशान खत्म किया जा रहा है।
करीब 250 दुकानें व कई रेस्तरां बंद हो गए
लोग अपनी संपत्तियों को बचाने के लिए हर एक जतन यहां कर रहे हैं। करीब 250 दुकानें व कई रेस्तरां बंद हो गए हैं। दुकानें बंद होने से यहां काम करने वाले लोगों को रोजगार खत्म हो गया है। वहीं, जिनकी दुकानें थी वह लोग एमसीडी की टीम के आने की जानकारी के लिए पहरा दे रहे हैं।
न्यू अशोक नगर की जिस सड़क पर यह कार्य हो रहा है वह 900 मीटर लंबी है। दिल्ली को नोएडा से जोड़ती है। इसके शुरुआत में मेट्रो स्टेशन है। इसके साथ ही सड़क के दोनों तरफ रिहायशी क्षेत्र है। लोगों ने अपने घरों के नीचे कपड़े की दुकानें, किराने, शार्पिंग गिफ्ट, दवा की दुकानें, स्टेशनरी, वाहन रिपेयरिंग समेत रेस्तरां खोल लिए थे। लेकिन जैसे ही लोगों को एमसीडी द्वारा संपत्तियों के दुरुपयोग के लिए किए जाने वाले सर्वे की खबर मिली लोगों ने सर्वे की जग में आने से बचने के लिए दुकानें बंद करनी शुरू कर दी हैं।
मालिक और कर्मचारी बेरोजगार होने की बात कहकर राहत की मांग
जिन लोगों ने दुकानें किराये पर दी हुई थी, उन्हें खड़े-खड़े खाली कराया जा रहा है। दुकान व रेस्तरां का कोई सुबूत न रह जाए, उसके दरवाजेे व शटर हटाकर वहां दीवार बनवाकर उस पर रंगरोगन किया जा रहा है। हालांकि अवैध रुप से खोली गई दुकानों के मालिक और कर्मचारी बेरोजगार होने की बात कहकर इसमें राहत की मांग कह रहे है।
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उनका कहना है कि कई वर्षों से जब यह काम हो रहा था तब क्यों कार्रवाई नहीं की गई। अब काम जम चुका था तो अब निगम को सीलिंग की याद आई है। हालांकि प्रशासन की नजर में आने से बचने के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है। सामान खरीदने के लिए आनलाइन आर्डर करना पड़ रहा है।
घबराएं नहीं, निगम निकाल रहा है समाधान : संजीव
स्थानीय पार्षद व लाइसेंसिंग कमेटी के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि घबाराने की जरूरत नहीं है। सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश पर निगम रिहायशी इलाकों में सर्वे कर रही है। लोगों का कारोबार चलता रहे, इसका समाधान निगम निकाल रहा है। जब उनसे जागरण संवाददाता ने सवाल किया सर्वे से व्यापारी दहशत में हैं। निगम ऐसा क्या कदम उठा रहा है, जिससे व्यापारियों को यह विश्वास हो कि उनका व्यापार बच जाएगा।