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    रेड फोर्ट ब्लास्ट केस: जांच के लिए NIA को मिला 45 दिन का समय, आरोपियों की न्यायिक हिरासत भी बढ़ी

    Updated: Fri, 27 Mar 2026 06:09 PM (IST)

    लाल किला बम धमाका मामले में NIA को जांच पूरी करने के लिए 45 दिन का अतिरिक्त समय मिला है। पटियाला हाउस कोर्ट ने नए सुरागों और गिरफ्तारियों के आधार पर य ...और पढ़ें

    एनआईए ने नए सुरागों की पड़ताल के लिए मांगा 45 दिन का समय। फाइल फोटो

    एनआईए ने नए सुरागों की पड़ताल के लिए मांगा 45 दिन का समय। फाइल फोटो

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत ने लाल किला बम धमाका मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को जांच पूरी करने के लिए 45 दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है।

    इसके साथ ही आरोपितों की न्यायिक हिरासत भी बढ़ा दी गई है। एजेंसी ने ताजा गिरफ्तारियों और नए सुरागों के आधार पर पूरे साजिश नेटवर्क की गहन जांच के लिए समय मांगा था। अब तक इस मामले में 11 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

    हाल ही में जम्मू-कश्मीर से जमीर अहमद अहंगर और तुफैल अहमद भट को साजिश में सक्रिय भूमिका के आरोप में पकड़ा गया।

    5 टीबी डाटा मिला

    जांच के दौरान एनआइए को आरोपितों के डिजिटल उपकरणों से करीब पांच टीबी डाटा मिला है, जिसमें वीडियो, आवाज के नमूने, कट्टरपंथी साहित्य और हस्तलिखित नोट्स शामिल हैं।

    इस सामग्री की जांच सीईआरटी-इन, सीएफएसएल और डीएफएसएस कर रहे हैं। अरबी भाषा में मिले कट्टरपंथी कंटेंट की व्याख्या के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया के विशेषज्ञ की मदद ली जा रही है।

    एजेंसी के अनुसार, आरोपित अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े वाट्सएप ग्रुप्स के जरिए सक्रिय थे। वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल (इंटरसेप्शन) और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से अन्य संदिग्ध सदस्यों, हैंडलर्स और नेटवर्क की पहचान की जा रही है।

    उमर-उन-नबी था मुख्य कड़ी

    जांच में सामने आया है कि धमाके में इस्तेमाल कार और विस्फोटक सामग्री की व्यवस्था भी माड्यूल के सदस्यों ने मिलकर की थी। मृतक उमर-उन-नबी इस साजिश का मुख्य कड़ी था, जो विस्फोटक से लदी कार चला रहा था।

    एनआइए ने कोर्ट को बताया कि माड्यूल के सदस्य युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आत्मघाती हमलों के लिए प्रेरित कर रहे थे और घरेलू सामान से बम बनाने की प्रशिक्षण दे रहे थे।

    एजेंसी को शुरुआती जांच में विदेशी कनेक्शन के संकेत भी मिले हैं, जो आनलाइन प्लेटफार्म और फर्जी इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स के जरिए जुड़े हुए हैं।

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