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    अब पुरानी दिल्ली के पास अचानक नहीं रुकेंगी ट्रेन, 600 इंजन में लगा सॉफ्टवेयर; नहीं लगेंगे इमरजेंसी ब्रेक

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 10:54 PM (IST)

    पुरानी दिल्ली के डफरिन ब्रिज और पुल मिठाई के बीच ट्रेनों के अचानक रुकने की समस्या अब खत्म हो गई है। 600 से अधिक इंजनों में नया सॉफ्टवेयर लगाया गया है, ...और पढ़ें

    सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होने से अब इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगेंगे। फोटो: आर्काइव

    सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होने से अब इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगेंगे। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. पुरानी दिल्ली में ट्रेनों के रुकने की समस्या हुई खत्म

    2. डफरिन ब्रिज-पुल मिठाई के बीच डेड जोन में आती थी दिक्कत

    3. 600 से अधिक इंजनों में नया सॉफ्टवेयर किया स्थापित

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के पास डफरिन ब्रिज और पुल मिठाई के बीच तकनीकी कारणों से ट्रेन परिचालन बाधित होने की समस्या दूर कर ली गई है। अब इनके बीच ट्रेनों की आवाजाही में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

    इन दोनों पुलों की ऊंचाई कम होने के कारण लगभग 50 मीटर का हिस्सा डेड जोन (जहां इंजन को बिजली की सप्लाई नहीं मिलती) है। कई बार यहां ट्रेन रुक जाती थी। अब इस तरह की समस्या नहीं होगी।

    डेड जोन में अपने आप लग जाता था इमरजेंसी ब्रेक

    जब भी कोई इलेक्ट्रिक ट्रेन इस हिस्से से गुजरती थी, तो बिजली आपूर्ति नहीं होने और अचानक वोल्टेज के उतार-चढ़ाव (वोल्टेज सर्ज) के कारण ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेक अपने आप लग जाता था।

    इससे ट्रेनें बीच रास्ते में ही खड़ी हो जाती थीं और पूरे रूट का रेल यातायात प्रभावित हो जाता था। अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली ट्रेन इतने छोटे हिस्से वाले डेड जोन को पार कर जाती है। लेकिन, अपने आप इमरजेंसी ब्रेक लग जाने के कारण ट्रेन रूक जाती थी।

    600 से अधिक इंजनों में लगाया गया नया सॉफ्टवेयर

    इसके समाधान के लिए उत्तर रेलवे ने अप्रैल में अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) और ब्रेक सिस्टम बनाने वाली कंपनी नार-ब्रेमसे इंडिया लिमिटेड (केबीआईएल) के साथ मिलकर काम शुरू किया था।

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    जांच में पता चला कि दिक्कत ट्रेन के ब्रेकिंग साफ्टवेयर में थी। इसके बाद कंपनी ने एक नया और आधुनिक साफ्टवेयर तैयार किया, जिससे बिजली कटने पर भी इमरजेंसी ब्रेक अपने आप नहीं लगता है।

    इस नए साफ्टवेयर को 600 से अधिक इंजन में लगाया गया है। इससे अब बिना किसी रुकावट के ट्रेन इन पुलों के नीचे से गुजर रही हैं। और भी इंजन में इस साफ्टवेयर को लगाया जाएगा जिससे कि इस तरह की समस्या अन्य स्थानों पर भी नहीं हो।

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