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    यमुनापार में खुले नाले बने मौत का कुआं! प्रशासन की लापरवाही से बढ़ रहा खतरा

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 08:49 PM (GMT+05:30)

    नांगल देवता में हुए हादसे के बाद यमुनापार के खुले नाले जानलेवा साबित हो रहे हैं। कई इलाकों में बिना सुरक्षा दीवार और रेलिंग के गहरे नाले हादसों को न्य ...और पढ़ें

    नांगल देवता में हुए हादसे के बाद यमुनापार के खुले नाले जानलेवा साबित हो रहे हैं।

    नांगल देवता में हुए हादसे के बाद यमुनापार के खुले नाले जानलेवा साबित हो रहे हैं।

    HighLights

    1. नांगल देवता हादसे ने खुले नालों की सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    2. यमुनापार के कई इलाकों में खुले नाले जानलेवा साबित हो रहे।

    3. अधिकारियों ने खुले नालों को सुरक्षित करने के निर्देश दिए।

    जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के नांगल देवता गांव में सड़क किनारे खुले डीडीए के नाले में वाहन गिरने से युवक की मौत ने राजधानी में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी तरह से यमुनापार के भी कई हिस्सों में एमसीडी, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के दर्जनों गहरे नाले बिना रेलिंग, बैरिकेडिंग और सुरक्षा दीवार के खुले पड़े हैं। लोगों के अनुसार बरसात के दौरान पानी भरने से इनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे किसी भी समय जानलेवा हादसा हो सकता है।

    दिलशाद गार्डन, गीता कालोनी, गणेश नगर, कांति नगर, मयूर विहार, त्रिलोकपुरी, गोकलपुरी और रानी गार्डन समेत कई इलाकों में सड़क से सटे खुले नाले लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। दिलशाद गार्डन में गुरुद्वारे के पास एमसीडी का नाला सड़क के बिल्कुल किनारे है। यहां न तो सुरक्षा दीवार है और न ही रेलिंग लगी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। वर्षा के दौरान सड़क और नाले के बीच का अंतर स्पष्ट नहीं दिखता, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों के नाले में गिरने की आशंका बनी रहती है।

    इसी तरह पुराना सीलमपुर के कांति नगर में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के नाले की सुरक्षा दीवार कई वर्षों से टूटी हुई है। इस व्यस्त मार्ग पर दिनभर वाहनों की आवाजाही रहती है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि नाला काफी गहरा और चौड़ा है। यदि कोई वाहन या राहगीर इसमें गिर जाए तो उसकी जान बचाना मुश्किल हो सकता है। कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने सुरक्षा दीवार की मरम्मत नहीं कराई।

    स्थानीय लोगों का कहना है सड़क किनारे खुले नाले सीधे लोगों की जान पर बन आते हैं। हादसे होने के बाद भी इसे सुरक्षित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

    मामले में पूर्वी जिला विकास बोर्ड के चेयरमैन अनिल गोयल ने कहा कि सड़क किनारे स्थित नालों को सुरक्षित बनाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।

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    स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को समन्वय के साथ खुले नालों पर रेलिंग, सुरक्षा दीवार और अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने चाहिए। जहां-जहां नाले खुले हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द सुरक्षित कराया जाएगा।

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