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DU की स्टडी में चेतावनी, केवल फेफड़े ही नहीं; आपके दिमाग और दिल को भी डैमेज कर रहा दिल्ली का प्रदूषण

Published: Mon, 07 Sep 2026 01:03 PM (IST)

दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध में खुलासा हुआ है कि पीएम 2.5 वायु प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ दिल और दिमाग को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

आपके दिल और दिमाग पर भी असर कार रहा है प्रदूषण। फोटो: आर्काइव

आपके दिल और दिमाग पर भी असर कार रहा है प्रदूषण। फोटो: आर्काइव

लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ फेफड़ों और आंखों से जुड़ी परेशानी की शिकायतें बढ़ती हैं, लेकिन प्रदूषित हवा का असर शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के शिक्षकों की ओर से 129 शोध अध्ययनों की समीक्षा में लंबे समय तक पीएम 2.5 के संपर्क और मस्तिष्क, हृदय व रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के संकेत मिले हैं।

129 शोध अध्ययनों की समीक्षा में सामने आए संकेत

समीक्षा के मुताबिक, पीएम 2.5 के लगातार संपर्क से शरीर में आक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ सकती है। इससे कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान पहुंचने के साथ रक्त वाहिकाओं और हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका रहती है।

लंबे समय तक पीएम 2.5 के संपर्क और हृदय व रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के बीच संबंध के संकेत भी शोधों में मिले हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण किसी एक बीमारी का अकेला कारण नहीं है। उम्र, जीवनशैली, आनुवंशिक कारण और पहले से मौजूद बीमारियां भी हार्ट अटैक समेत हृदय रोगों के जोखिम को प्रभावित करती हैं।

मस्तिष्क पर भी असर के संकेत

लंबे समय तक पार्टिकुलेट मैटर के संपर्क को मस्तिष्क में सूजन और आक्सीडेटिव स्ट्रेस से भी जोड़ा गया है। शोधों में संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट और बच्चों में मस्तिष्क के विकास पर असर से जुड़े संकेत मिले हैं।

कुछ अध्ययनों में अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं के साथ भी इसका संबंध सामने आया है।

पर्यावरणीय अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय की वंदना मिश्रा के अनुसार, वायु प्रदूषण को अब केवल फेफड़ों और हृदय के स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता बनता जा रहा है।

पीएम 2.5 कैसे बढ़ा सकता है आक्सीडेटिव स्ट्रेस

पीएम 2.5 जैसे महीन कण शरीर में पहुंचकर आक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। यह वह स्थिति है जब शरीर में फ्री रेडिकल्स और एंटीआक्सीडेंट्स के बीच संतुलन बिगड़ जाता है।

इससे प्रोटीन, वसा और डीएनए को नुकसान पहुंच सकता है। प्रदूषण के कारण शरीर में सूजन की प्रक्रिया भी सक्रिय हो सकती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका है।

इससे रक्त प्रवाह में दिक्कत और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या मधुमेह जैसी पहले से मौजूद समस्याओं वाले लोगों के लिए लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहना अधिक चिंता का विषय हो सकता है।

केवल हवा की गुणवत्ता सुधारना पर्याप्त नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली जैसे शहरों में जहां लोग लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहते हैं, वहां वायु गुणवत्ता सुधारने के साथ लोगों को लंबे समय तक प्रदूषण से बचाने की रणनीति बनाना भी जरूरी है।

“वायु प्रदूषण को अब केवल फेफड़ों और हृदय के स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर चिंता बनता जा रहा है। शोध अब लंबे समय तक पार्टिकुलेट मैटर के संपर्क को संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट, न्यूरो-डेवलपमेंट पर असर और अल्जाइमर व पार्किंसन जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थितियों से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं से जोड़ रहे हैं।”

वंदना मिश्रा, पर्यावरणीय अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय

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