घंटों बैठकर काम करने वाले हो जाएं सतर्क! एक्सरसाइज भी नहीं बचा पाएगी दिल, अगर नहीं बदली ये आदत
लंबे समय तक लगातार बैठे रहना दिल की सेहत के लिए बेहद हानिकारक है, भले ही आप नियमित व्यायाम करते हों। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल व्यायाम ही नहीं, बल्कि ...और पढ़ें

दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना आपके दिल की सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। (AI Generated Image)
HighLights
लंबे समय तक बैठना दिल की सेहत के लिए खतरनाक।
नियमित व्यायाम के साथ सक्रिय रहना भी जरूरी।
हर 30-60 मिनट पर उठकर चलना फायदेमंद।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। यदि आप रोजाना व्यायाम करते हैं, सुबह की सैर पर जाते हैं या जिम में समय बिताते हैं, तब भी दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना आपके दिल की सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहना हृदय के स्वास्थ्य के खतरनाक है। यानी केवल व्यायाम कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे दिन शरीर को सक्रिय बनाए रखना भी आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ दिल के लिए अब केवल ‘रोजाना कितना व्यायाम किया’ यह महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि दिल की बेहतर सेहत के लिए व्यायाम के साथ-साथ आपने लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को कितना नियंत्रित किया।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार शारीरिक निष्क्रियता वैश्विक स्तर पर समय से पहले होने वाली मौतों के प्रमुख कारण है। पर्याप्त शारीरिक सक्रियता नहीं रखने वाले लोगों में मृत्यु का खतरा सक्रिय लोगों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक होता है। भारत में यह समस्या तेजी से गंभीर होती जा रही है।
हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग सबसे बड़ा कारण
डब्ल्यूएचओ और भारत सरकार के स्वास्थ्य संबंधी आकलनों के अनुसार देश में कुल मौतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा गैर-संचारी रोगों से जुड़ा है। इनमें हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग सबसे बड़ा कारण हैं। आइसीएमआर के अध्ययनों में भी शहरी क्षेत्रों में बढ़ती निष्क्रिय जीवनशैली, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप को हृदय रोगों के बढ़ते बोझ से जुड़ा पाया गया है।
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फोर्टिस एस्कार्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ के अनुसार लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए हर 30 से 60 मिनट के बीच कुछ मिनट के लिए उठना, चलना, स्ट्रेचिंग करना या हल्की शारीरिक गतिविधि करना लाभदायक है।
लोगों को अपने कुल ‘सिटिंग टाइम’ पर ध्यान देना चाहिए
दिल्ली में यह चुनौती और बड़ी है। लंबा कार्यालयी समय, ट्रैफिक में घंटों का सफर, स्क्रीन आधारित कामकाज और डिजिटल मनोरंजन ने दैनिक शारीरिक गतिविधियों को सीमित कर दिया है। बड़ी संख्या में लोग अधिकांश समय कुर्सी पर बिताते हैं। उनके अनुसार इस मामले में नियमित व्यायाम करने वाले लोगों को भी अपने कुल ‘सिटिंग टाइम’ पर ध्यान देना चाहिए।
‘अमेरिकन कॉलेज आफ कार्डियोलाजी’ जर्नल (जेएसीसी) में प्रकाशित मैसाचुसेट्स जनरल हास्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डा. शान खुर्शीद और उनकी टीम के शोध के अनुसार 89,530 वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों की गतिविधियों को कलाई पर पहने जाने वाले ‘एक्सेलेरोमीटर’ से मापा गया, पाया गया कि प्रतिदिन 10.6 घंटे से अधिक समय तक बैठे रहने या अन्य निष्क्रिय गतिविधियों में लगे रहने वाले लोगों में हार्ट फेलियर और हृदय संबंधी मृत्यु का खतरा उल्लेखनीय तौर पर बढ़ जाता है।
टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाती है
यह भी पाया कि यह खतरा उन लोगों में भी था जो नियमित व्यायाम कर रहे थे। शोध में बताया गया कि लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर का मेटाबालिज्म धीमा हो जाता है, कैलोरी खर्च कम होती है, वजन बढ़ने लगता है और रक्त में खराब वसा तथा शर्करा का स्तर बढ जाता है। यह यह स्थिति टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाती है।