राजा रवि वर्मा की 100 करोड़ से ज्यादा कीमत की पेंटिंग पर कानूनी जंग, दिल्ली से ऑस्ट्रेलिया तक गूंजा ‘कादंबरी’ विवाद
दिल्ली हाईकोर्ट में राजा रवि वर्मा की 100 करोड़ से अधिक की 'कादंबरी' पेंटिंग को लेकर कानूनी विवाद पहुंचा है। कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा औ ...और पढ़ें

19वीं सदी में बनाई गई राजा रवि वर्मा की 100 करोड़ से अधिक कीमत की पेटिंग के विवाद का मामला दिल्ली हाईकाेर्ट पहुंचा है।

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 19वीं सदी में बनाई गई राजा रवि वर्मा की 100 करोड़ से अधिक कीमत की पेटिंग के विवाद का मामला दिल्ली हाईकाेर्ट पहुंचा है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने मामले को आर्बिटेशन को भेज दिया और सभी पक्षकारों को मध्यस्थ के सामने पेश होने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि माेहिंदर वर्मा के भाई और भाभी को भी केस में पक्षकार बनाया जाना चाहिए, क्योंकि पेंटिंग के मालिकाना हक का दावा वे कर रहे थे। इस पर सहमति व्यक्ति करते हुए अदालत ने दोनों को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
पेंटिंग की कीमत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा
याचिका के अनुसार राजा रवि वर्मा की बनाई पेंटिंग ‘कादंबरी’ अभी किरण नादर म्यूजियम आफ आर्ट के पास है। इस पेंटिंग की कीमत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अंदाजा है और असल में दिल्ली के एक आर्ट कलेक्टर मोहिंदर वर्मा के पास थी।
मोहिंदर वर्मा ने मुकदमे में बताया कि उन्हें हाल ही में पता चला कि आस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में क्वींसलैंड आर्ट गैलरी, राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स के लिए एक खास सेक्शन बना रही है। कई जाने-माने आर्ट डीलरों ने उन्हें बताया कि 'कादंबरी' इस गैलरी में स्थायी डिस्प्ले के लिए है और इस कारण इसे भारत से हटा दिया गया।
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तीन करोड़ रुपये का एडवांस पेमेंट
उन्होंने कहा कि पेंटिंग के आस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में क्वींसलैंड आर्ट गैलरी में स्थानांतरित होने का खतरा है। मोहिंदर वर्मा ने आरोप लगाया कि 2021 में उन्होंने भरोसेमंद लोगों को यह मास्टरपीस सौंपा था और इनमें से एक वर्मा की कंपनी में निदेशक भी थे। मोहिंदर ने कहा कि पहले उसने उन्हें लंदन में तीन करोड़ रुपये का एडवांस पेमेंट लेने के लिए धोखा दिया और फिर स्थानीय पुलिस को खबर दी, जिसके कारण उन्हें विदेश में जेल हो गई।
बिचौलियों के जरिए आर्टवर्क को बेचा
मोहिंदर ने कहा कि जिन लोगों को उन्होंने पेंटिंग को सुरक्षित रखने लिए सौंपा था और यह बता दिया था कि उनकी मंजूरी के बिना आगे काेई कार्रवाई नहीं होगी, उन्होंने उनके जेल में होने का फायदा उठाकर बिचौलियों के जरिए आर्टवर्क को बेच दिया था।