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    दिल्ली के इस इलाके में 15 दिनों से जलापूर्ति ठप्प, कब से घर-घर पहुंचेगा पानी?

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 05:19 PM (IST)

    पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन के एन-ब्लॉक में पिछले दो हफ्तों से भीषण जल संकट है, जहां दिल्ली जल बोर्ड ने बिना किसी पूर्व सूचना के पानी की आपूर्ति ब ...और पढ़ें

    पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन के एन-ब्लॉक में पिछले दो हफ्तों से भीषण जल संकट है। फाइल फोटो

    पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन के एन-ब्लॉक में पिछले दो हफ्तों से भीषण जल संकट है। फाइल फोटो

    HighLights

    1. राजौरी गार्डन के एन-ब्लॉक में 15 दिन से जल संकट।

    2. दिल्ली जल बोर्ड ने बिना सूचना पानी की आपूर्ति रोकी।

    3. अधिकारी उदासीन, समाधान नहीं, निवासियों में आक्रोश।

    जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। सुनियोजित बसी राजौरी गार्डन कालोनी के एन-ब्लाक में रहने वाले कई घरों के लोग पिछले दो सप्ताह से भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के पिछले 15 दिनों से पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी है।

    अधिकारियों की उदासीनता से बढ़ा रोष 

    क्षेत्र के निवासी यशपाल सिंह ने बताया कि पानी की किल्लत ने दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे निराशाजनक पहलू यह है कि शिकायत करने के बावजूद संबंधित अधिकारी जल बोर्ड के अभियंता समस्या का कोई ठोस समाधान बताने में विफल रहे हैं। निवासियों का कहना है कि अधिकारियों का व्यवहार टालमटोल वाला है और वे कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे रहे हैं।

    लोगाें का कहना है कि आमतौर पर मरम्मत कार्य या रखरखाव के लिए जल बोर्ड द्वारा सार्वजनिक सूचना जारी की जाती है, परंतु इस मामले में नियमों की अनदेखी की गई। अधिकारियों से जब भी समस्या बयां की जाती है वे टैंकर भेजने की बात करते हैं लेकिन टैंकर से पानी भरने में लोग असमर्थ हैं। कामकाजी लोग सुबह ही घर से निकल जाते हैं। कई घरों में बुजुर्ग रहते हैं। ऐसे में टैंकर भेजना कोई विकल्प नहीं है।

    लोगों की मांग है कि एन-ब्लॉक में पेयजल की आपूर्ति को तुरंत सुचारु रूप से शुरू किया जाए। पिछले 15 दिनों से जारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। भविष्य में किसी भी रुकावट के लिए कम से कम 24 घंटे पहले सूचित किया जाए। समस्या के बारे में जल बोर्ड के क्षेत्रीय कनीय अभियंता से उनका पक्ष लेने की कोशिश की गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका कोई पक्ष नहीं मिला।


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