रक्षाबंधन ने दिया बाजार को भी मुस्कुराने का मौका, दिल्ली में 4000 करोड़ के कारोबार का अनुमान
रक्षाबंधन के त्यौहार ने दिल्ली के बाजारों में रौनक ला दी है, जिससे लगभग 4,000 करोड़ रुपये के कारोबार का ...और पढ़ें

रक्षाबंधन पर दिल्ली के बाजारों में बंपर कारोबार, 4000 करोड़ का व्यापार।
HighLights
दिल्ली में रक्षाबंधन पर 4000 करोड़ का कारोबार अनुमानित।
राखियों, मिठाइयों, ज्वेलरी की बिक्री से बाजार में रौनक।
स्वदेशी राखियां और हल्की ज्वेलरी रही मुख्य आकर्षण।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भाई बहन के पवित्र प्रेम के त्यौहार रक्षाबंधन ने दिल्ली के बाजारों को भी मुस्कुराने का मौका दिया है। इस बार राखी त्यौहार पर करीब 4,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। इसमें राखियों, मिष्ठान, उपहार, ज्वैलरी, परिधान, श्रृंगार के सामान समेत अन्य की खरीदारी शामिल है। अकेले 800 से 900 करोड़ का कारोबार ज्वैलरी बाजार का हुआ है।
विशेष कि राखियों में स्वदेशी डोरी व हस्तशिल्प की धूम है। कारोबारी संगठन कैट ने दिल्ली में लगभग 4,000 करोड़ रुपये तथा देश भर में यह आंकड़ा 30 हजार करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान लगाया है।
पिछले कई दिनों से जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही
रक्षाबंधन का पावन पर्व आज पूरे देश में श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। दिल्ली सहित देशभर के बाजारों में पिछले कई दिनों से जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, कमला नगर, लाजपत नगर, गांधी नगर, खान मार्केट, राजौरी गार्डन समेत विभिन्न बाजारों में व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी आई है।
कैट के अनुसार, रक्षाबंधन आजीविका को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। राखी कारीगर, महिला स्वयं सहायता समूह, गृह उद्योग, मिठाई विक्रेता, फूल विक्रेता, उपहार सामग्री व्यापारी, परिवहन क्षेत्र, पैकेजिंग उद्योग, कुरियर सेवाएं, ई-कामर्स डिलीवरी नेटवर्क तथा छोटे दुकानदार इस पर्व से विशेष रूप से लाभान्वित हुए हैं।
बहनों को उपहार देने के लिए सोने, चांदी व हीरे के गहनों की मांग
दरीबा व्यापार मंडल के महासचिव मनीष वर्मा के अनुमान, इस बार भाईयों की कलाई पर बांधने के लिए सोने-चांदी से बने राखियों के साथ ही बहनों को उपहार में देने के लिए सोने, चांदी व हीरे के गहनों के साथ ही सोने-चांदी के सिक्कों की मांग खूब है। हालांकि, सोने, चांदी की दर अधिक है तो इसलिए हल्की ज्वैलरी पर जोर रहा है।
