दिल्ली के RML अस्पताल में जच्चा-बच्चा की जान से खिलवाड़, घटिया निकली प्रसव वाली जीवनरक्षक दवा; 2,675 शीशियां जब्त
दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में प्रसव के लिए इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीटोसिन दवा गुणवत्ता जांच में फेल हो गई है। ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने 2,675 एम्प्यूल्स ज ...और पढ़ें

आरएमएल अस्पताल। जागरण आर्काइव
HighLights
आरएमएल अस्पताल में ऑक्सीटोसिन दवा गुणवत्ता में फेल पाई गई।
दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने 2,675 शीशियां जब्त कर सील कीं।
घटिया दवा से प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा को गंभीर खतरा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख केंद्रीय सरकारी अस्पताल डाॅ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवा ऑक्सीटोसिन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। दिल्ली औषधि नियंत्रण विभाग (ड्रग्स कंट्रोल विभाग) ने गुणवत्ता जांच में दवा के मानकों पर खरी नहीं उतरने के बाद अस्पताल से 2,675 ऑक्सीटोसिन एम्प्यूल्स (शीशियां) जब्त कर सील कर दी हैं।
कितने मरीजों को दी खराब दवा?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दवा में ऑक्सीटोसिन का सक्रिय तत्व या तो निर्धारित मात्रा से काफी कम था या मानक के अनुरूप नहीं मिला। अब इस बात की जांच हो रही है कि इस बैच की कितनी शीशियां मरीजों को दी गईं और क्या अन्य अस्पतालों में भी इसी बैच की आपूर्ति हुई थी।
जांच के दौरान ड्रग कंट्रोल विभाग ने अस्पताल प्रशासन से संबंधित बैच की खरीद, आपूर्ति, वितरण और उपयोग का पूरा रिकार्ड मांगा है। सूत्रों के अनुसार, विभाग ने कई बार जानकारी मांगी, लेकिन समय पर पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब हाल के महीनों में इसी निर्माता कंपनी की ऑक्सीटोसिन को लेकर दूसरे राज्यों में भी गुणवत्ता संबंधी सवाल उठ चुके हैं।
जांच में फेल होने पर कार्रवाई शुरू
राजस्थान में इसी कंपनी के एक बैच के नमूने गुणवत्ता जांच में विफल पाए जाने के बाद व्यापक जांच शुरू हुई थी। इसके बाद केंद्रीय और राज्य औषधि नियामकों ने कंपनी की निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया और नियामकीय कार्रवाई भी की। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह दवा जैक्सन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड, अमृतसर द्वारा निर्मित बैच की थी। बैच का निर्माण 22 अप्रैल 2026 को हुआ था और इसमें कुल 3,000 एम्प्यूल्स शामिल थे। जून 2026 में ड्रग इंस्पेक्टरों ने अस्पताल से नमूने लेकर सरकारी प्रयोगशाला में जांच कराई।
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जान को भी हो सकता है खतरा
जांच रिपोर्ट में दवा को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं (नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी) पाया गया। इसके बाद ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट की धारा 22 के तहत कार्रवाई करते हुए अस्पताल में उपलब्ध 2,675 एम्प्यूल्स जब्त कर सील कर दिए गए। बताया गया कि ऑक्सीटोसिन प्रसूति चिकित्सा में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं में से एक है।
इसका उपयोग प्रसव पीड़ा शुरू कराने या उसे गति देने के साथ-साथ प्रसव के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट पार्टम हेमरेज) को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस दवा में सक्रिय तत्व निर्धारित मात्रा में न हो तो उपचार का अपेक्षित प्रभाव नहीं मिल सकता और गंभीर परिस्थितियों में मरीज की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
क्या है ऑक्सीटोसिन?
- डब्ल्यूएचओ की आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की सूची में शामिल
- प्रसव पीड़ा शुरू कराने और बढ़ाने में उपयोग की जाने वाली दवा
- प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव रोकने में भी कारगर
- गुणवत्ता में कमी होने पर आपात स्थिति में गंभीर जोखिम
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