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सत्य निकेतन हादसा: 'नल से तेज पानी बहने जैसी आवाज आई, फिर...', मलबे से निकले घायल नितेश ने सुनाई आपबीती

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:09 AM (IST)

सत्य निकेतन हादसे में घायल छात्र नितेश छिब ने अपनी आपबीती साझा की, बताया कि अजीब आवाजें सुनकर वे सीढ़ियों ...और पढ़ें

एम्स में भर्ती नितेश।

एम्स में भर्ती नितेश।

HighLights

  1. नितेश ने नल से तेज पानी जैसी आवाज सुनी।

  2. दोस्त के साथ सीढ़ियों की ओर भागे, इमारत गिरी।

  3. तीन घंटे मलबे में दबे रहे, फिर निकाले गए।

शशि ठाकुर, नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे में घायल छात्र नितेश छिब एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती है। मलबे से नितेश के साथ उसके दोस्त नीरज बाबा को भी बाहर निकाला गया था। दोनों को यहां भर्ती कराया गया है।

नीरज की हालत अति गंभीर है। नितेश अब बात करने की स्थिति में हैं। उन्होंने जागरण संवाददाता से आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि रविवार दोपहर खाना खा रहे थे। तभी उन्होंने अजीब आवाजें सुनाई पड़ने लगी।

पहले सामान्य फिर रौद्र रूप लेती चली गई वो आवाज

जो ऐसी जैसे किसी नल से तेज पानी की धार बह रही हो। पहले लगा कि यह सामान्य है, लेकिन कुछ ही पलों में वह आवाज रौद्र होती चली गई।

तत्काल ही वह खाना छोड़ अपने दोस्त नीरज के कमरे में गए और दोनों कुछ अनहोनी की आशंका को समझते ही सीढ़ियों की तरफ दौड़ पड़े, लेकिन वे नीचे पहुंच पाते, उससे पहले ही इमारत भरभराकर गिर गई। इसमें दोनों दब गए।

जम्मू के रहने वाले हैं नितेश

19 वर्षीय नितेश जम्मू के रायपुर और नीरज बावा कठुआ के रहने वाले है। नितेश के बड़े भाई रोहित ने बताया कि उसका छोटा भाई डीयू में बीकाम द्वितीय वर्ष का छात्र है।

हादसे के बाद वह लगभग तीन घंटे तक मलबे में दबा रहा और लोगों को निकालने के लिए आवाज मारता रहा। राहत बचाव कार्य में लगे लोगों ने नितेश को तीन घंटे बाद निकालकर अस्पताल पहुंचाया।

अब अस्पताल के बाहर उसका परिवार उसकी सलामती की खबर का इंतजार कर रहा है। भाई की चिंता सिर्फ एक ही है अगर नितेश को कुछ हो गया तो उसके परिवार का क्या होगा?

एक दिन पहले ही खींच लाई हादसा

हादसे में घायल एनएसयूआइ कार्यकर्ता नीरज बावा की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। उसके दोस्त रवि ने बताया कि नीरज हादसे से सिर्फ एक दिन पहले ही पीजी में रहने आया था।

इससे पहले वह एक महीने से अधिक समय से दोस्त के घर रह रहा था। कुछ दिन पहले ही यह नया ठिकाना तलाश कर एक दिन पहले रहने आया था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि नया ठिकाना उसकी जिंदगी को ही खतरे में डाल देगा।

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