रेलवे का बड़ा फैसला: इन ट्रेनों में अब वंदे भारत जैसी मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं, बदल जाएगा सफर का अंदाज
शताब्दी और जनशताब्दी ट्रेनों के कोचों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे यात्रियों को वंदे भारत जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। ...और पढ़ें

वंदे भारत की तरह शताब्दी की यात्रा होगी आरामदायक। (AI Generated Image)
HighLights
100 से अधिक ट्रेनों के कोचों का उन्नयन होगा।
वंदे भारत जैसी आधुनिक सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी।
झटके कम करने के लिए कपलिंग सिस्टम में बदलाव।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। शताब्दी और जनशताब्दी के पुराने पड़ रहे कोच आने वाले दिनों में नए रूपरंग में दिखेंगे। इन ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को भी वंदे भारत और अमृत भारत की तरह सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए 100 से अधिक शताब्दी और जनशताब्दी ट्रेनों के कोच का उन्नयन कर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। यात्रा के समय झटके लगने की समस्या दूर करने के लिए कपलिंग सिस्टम में भी बदलाव होगा।
इस समय देश में अलग-अलग रूट पर 50 शताब्दी और 54 जनशताब्दी ट्रेनें चल रही हैं। पहली शताब्दी एक्सप्रेस वर्ष 1988 में नई दिल्ली से झांसी के बीच चली थी। उसके बाद कई रूट पर शताब्दी ट्रेनें चलाई गईं। इस समय 24 जोड़ी शताब्दी और 27 जोड़ी जनशताब्दी ट्रेनें चल रही हैं। इन ट्रेनों के रेक काफी पुराने हो गए हैं। इससे यात्रियों को परेशानी होती है।
10 साल पहले भी चला था अभियान
लगभग 10 वर्ष पहले भी स्वर्ण योजना के अंतर्गत शताब्दी और राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों के कोच की दशा सुधारने का अभियान चलाया गया था। इसके बावजूद इन ट्रेनों की दशा बहुत अच्छी नहीं है। वहीं, अब वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक सुविधाओं वाली ट्रेनें चलने लगी हैं। मेल एक्सप्रेस के नए कोच में भी बेहतर सुविधाएं हैं। इसे ध्यान में रखकर रेलवे ने शताब्दी व जनशताब्दी ट्रेनों की दशा सुधारने का निर्णय लिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार सबसे अधिक शिकायत यात्रा के दौरान झटके महसूस होने को लेकर है। इसे दूर करने के लिए नई तकनीक के शाक एब्जार्बर और बैलेंस्ड ड्राफ्ट गियर लगाए जाएंगे। कोच के अंदर का इंटीरियर भी बदला जाएगा। यात्री के आराम को ध्यान में रखकर एर्गोनोमिक सीटें लगाई जाएंगी। इस तरह की सीट की बनावट इस तरह से होती है कि लंबे समय तक बैठने के बाद भी थकान महसूस न हो।
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यह सुविधाएं मिलेंगी
वंदे भारत की तरह प्रत्येक सीट पर यूएसबी चार्जिंग प्वाइंट, मोबाइल होल़्डर, फोल्डेबल स्नैक टेबल भी अधिक सुविधाजनक होगा। लाइटिंग बेहतर की जाएगी। कोच के फर्श भी इस तरह से होंगे कि उसे साफ करना आसान हो। बायो वैक्यूम शौचालय लगाए जाएंगे। अभी अधिकांश शताब्दी में जैविक शौचालय हैं। वाशबेसिन भी इस तरह से लगेगा जिससे कि फर्श पर पानी नहीं फैले।
अधिकारियों का कहना है कि कुछ दिनों पहले सभी जोन को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। चरणबद्ध तरीके से यह काम पूरा किया जाएगा, जिससे कि रेक की कमी से ट्रेन परिचालन में किसी तरह की परेशानी उत्पन्न न हो।