'हिंदू विरोधी है सेंट स्टीफेंस काॅलेज', डूटा अध्यक्ष के दावे पर बवाल; नियुक्तियों से लेकर धार्मिक असेंबली तक पर रार
सेंट स्टीफेंस कॉलेज विवादों में है, जहां डीयू शिक्षक संघ ने धार्मिक पक्षपात और 'हिंदू विरोधी मानसिकता' का आरोप लगाया है। यह विवाद कॉलेज के पूर्व प्रिं ...और पढ़ें

फिर से विवादों में है सेंट स्टीफेंस कॉलेज। फोटो: आर्काइव
HighLights
कॉलेज में 25 नई शिक्षक नियुक्तियों पर विवाद
धार्मिक पक्षपात और 'हिंदू विरोधी' मानसिकता के आरोप
पूर्व प्रिंसिपल के कार्यकाल पर भी सवाल उठे
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सेंट स्टीफेंस काॅलेज एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला काॅलेज में हाल में की गई 25 शिक्षकों की नियुक्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि डीयू से संबद्ध सेंट स्टीफेंस काॅलेज में लंबे समय से पढ़ा रहे कई तदर्थ शिक्षकों को बाहर कर नए उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई।
शिक्षक व छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में योग्यता की बजाय एक धर्म विशेष से जुड़े उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है। उन्हें केवल उस समय मौका मिलता है जब उनके मुकाबले अन्य कोई उम्मीदवार नहीं होता। डीयू शिक्षक संघ डूटा भी ऐसा कुछ होने का आरोप लगा रहा है।
पहले भी विवादाें में रह चुका है कॉलेज
सेंट स्टीफेंस धार्मिक असेंबली को लेकर पहले भी विवादों में रह चुका है। हालांकि सेंट स्टीफेंस प्रशासन काॅलेज को मिले अल्पसंख्यक दर्जे का हवाला देते हुए इन आरोपों से इनकार करता रहा है और इन्हें निराधार बताता है।
वर्तमान विवाद तब बढ़ा जब काॅलेज के दो शिक्षक काॅलेज में हुई हालिया भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं और इस तरह के हुए पक्षपात पर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गए। डूटा ने भी काॅलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
खबरें और भी
डूटा अध्यक्ष वी. नेगी का कहना है कि सेंट स्टीफेंस काॅलेज प्रबंधन अपनी मनमानी करता है और विश्वविद्यालय के नियमों का पालन नहीं करता। उन्होंने आरोप लगाया कि कालेज की “हिंदू विरोधी मानसिकता” पुरानी है।
'अपना उम्मीदवार न मिले तो ही हिंदुओं को मौका'
नेगी के अनुसार जब काॅलेज को अपनी पसंद का उम्मीदवार नहीं मिलता तभी हिंदू उम्मीदवारों को मौका दिया जाता है, अन्यथा उन्हें परेशान कर बाहर कर दिया जाता है या भर्ती नहीं की जाती। आरोप लगाया कि हाल में पांच से छह शिक्षकों के साथ ऐसा ही हुआ, जिन्हें डूटा के सहयोग से अदालत जाने पर राहत मिली।
सेंट स्टीफेंस में विवादों का सिलसिला नया नहीं है। 2021 से काॅलेज में प्रिंसिपल पद को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप था कि तत्कालीन प्रिंसिपल जाॅन वर्गीज ने 2016 से 2021 तक का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी दिल्ली विश्वविद्यालय और यूजीसी नियमों के विपरीत 2021 से 2026 तक दूसरा कार्यकाल जारी रखा।
मामला अदालत तक पहुंचा और लंबित रहा। 20 फरवरी 2026 को जान वर्गीज का दूसरा कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद भी तीन महीने तक वह काम करते रहे। किस आधार पर पर उन्होंने ऐसा किया, इस पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई।
आरोप है कि पद छोड़ने से पहले उन्होंने 25 नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की, जिस पर अब विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में सेंट स्टीफेंस काॅलेज गवर्निंग बाॅडी और शिक्षक भर्ती साक्षात्कार पैनल सदस्य एम. डेनियल को काॅलेज का पक्ष जानने को फोन किया गया तो उन्होंने फोन उठाकर काट दिया। उन्हें इस बाबत संदेश भेजा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
विवादों पर एक नजर में
- मार्निंग असेंबली में धार्मिक शिक्षाओं के आरोप।
- असेंबली में अनुपस्थित छात्रों के निलंबन पर विवाद।
- एडमिशन में ईसाई समुदाय को प्राथमिकता देने के आरोप।
- नियुक्तियों में मेरिट की जगह धर्म आधारित चयन के आरोप।
- प्रिंसिपल कार्यकाल और यूजीसी नियमों के उल्लंघन का विवाद।
- डीयू और काॅलेज प्रशासन के बीच लगातार टकराव।
सेंट स्टीफेंस काॅलेज डीयू के नियमों और निर्देशों का पालन नहीं करता, अपनी मनमानी करता है। भर्ती और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें मिलती रही हैं। कालेज एक धर्म विशेष के लोगों को प्राथमिकता देता है, यह भी शिकायतें सामने आई हैं। डीयू समय-समय पर कालेज को नियमों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाने के निर्देश देता रहा है और कार्रवाई भी करता रहा है।
- विकास गुप्ता, डीयू रजिस्ट्रार
यह भी पढ़ें- वंदे मातरम पर अब आर या पार, जमीयत ने दी चेतावनी; कहा- सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो जाएंगे कोर्ट