कारपेंटर से करोड़ों की संपत्ति तक... फिर बना दिल्ली दंगों का चेहरा, ताहिर हुसैन की Inside Story
अमरोहा से दिल्ली आकर कारपेंटर से पार्षद बने ताहिर हुसैन को आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दिल्ली दंगों का आर ...और पढ़ें

कारपेंटर से पार्षद बने ताहिर हुसैन का जीवन सफर।
स्वदेश कुमार, नई दिल्ली। यूपी के अमरोहा से रोजगार की तलाश में 19वीं सदी के आठवें दशक में दिल्ली पहुंचा एक युवक करीब 30 साल बाद दिल्ली दंगे का स्याह चेहरा बन गया। ताहिर हुसैन को जानने वाले लोग बताते हैं कि कारपेंटर से शुरुआत कर कुछ ही सालों में उसने ऐसा साम्राज्य बना लिया कि उसकी राजनीतिक महत्वकांक्षा जाग उठी।
आप का साथ मिला और पार्षद के रूप में नेहरू विहार का जनप्रतिनिधि बन गया। चांद बाग, करावल नगर और खजूरी में उसके कई मकान हैं। इसी ताहिर को आइबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
ताहिर हुसैन का जन्म 8 मई 1969 को अमरोहा में हुआ था। दिल्ली आने के बाद उसने कारपेंटर का काम शुरू किया। इसके साथ उसने दुकानों के इंटीरियर का काम करना शुरू किया जो बाद में शोरूम तक पहुंच गया। पैसे आने लगे तो उसने चांद बाग और उसके आसपास खाली जमीनों को खरीदना शुरू कर दिया।
इसके जरिये वह प्रापर्टी डीलिंग करने लगा। आठवीं पास ताहिर ने कई सिगरेट कंपनियों की एजेंसी ले ली। इसी दौरान 2013 में आप का उदय हुआ तो यह राजनीतिक संरक्षण के लिए उससे जुड़ गया। 2017 में आप के टिकट पर नेहरू विहार से पार्षद बना।
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सीएए और एनआरसी को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए तो वह पार्षद रहते हुए दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद और शरजील इमाम आदि से जुड़ गया। जिस चार मंजिला मकान में अंकित शर्मा की हत्या हुई, वह ताहिर हुसैन का ही था। मामला सामने आने और गिरफ्तारी के बाद आप ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया।
जेल से चुनाव लड़ने को 2.07 लाख रुपये प्रतिदिन का उठाया पुलिस का खर्च
जेल में रहने के दौरान भी ताहिर की राजनीतिक महत्वकांक्षा कम नहीं हुई। दिसंबर 2024 में उसने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम का दामन थाम लिया। 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्तफाबाद सीट से चुनाव के लिए मैदान में उतर गया। कोर्ट ने चुनाव प्रचार के लिए उसे छह दिन की सशर्त पैरोल दी।
इसमें प्रतिदिन वह 12 घंटे के लिए जेल से बाहर आता था। समय पूरा होने के बाद फिर से जेल जाता था। इस दौरान उसे लाने-ले जाने और सुरक्षा के बदले दिल्ली पुलिस को प्रतिदिन 2.07 लाख रुपये देने का भी निर्देश था। चुनाव परिणाम आए तो वह तीसरे स्थान पर रहा।