टिकरी बॉर्डर सीएनजी पंप धमाका: आधे घंटे तक नहीं मिली मदद, इस कारण गई दो घायलों की जान
पश्चिमी दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर सीएनजी पंप धमाके में घायल हुए दो लोगों की मौत समय पर मदद न ...और पढ़ें

टिकरी बॉर्डर सीएनजी पंप पर विस्फोट।
HighLights
टिकरी बॉर्डर सीएनजी पंप पर हुआ धमाका।
घायलों को आधे घंटे तक नहीं मिली मदद।
परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने का आरोप लगाया।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। टिकरी बार्डर पर स्थित सीएनजी पंप में बुधवार दोपहर हुए सीएनजी भरने के दौरान हुए धमाके के बाद घायल हुए लोगों को करीब आधे घंटे तक उठाने वाला भी कोई नहीं था। यह आरोप है दो मृतक के स्वजन का। उनका कहना है कि जब तक उन्हें प्राथमिक चिकित्सा और एंबुलेंस की सुविधा मिलती उनका काफी खून बह चुका था। जब वे अस्पताल पहुंचे तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया था।
मृतक ब्रह्मजीत के भतीजे आदित्य कहते हैं कि उनके दो चाचा ब्रह्मजीत व अक्षय भी पिछले दो साल से इसी सीएनजी पंप पर काम करते थे। इन दोनों की शादी हो चुकी है और दोनों के दो दो बच्चे भी हैं। घटना के समय जहां विस्फोट हुआ उसके पास ही ब्रह्मजीत थे। वहीं कुछ दूरी पर अक्षय भी थे।
धमाके के दौरान टूटे ट्रक के टुकड़ों से ब्रह्मजीत हुए थे घायल
यह धमाका इतना जोरदार था कि ब्रह्मजीत घटना स्थल से दूर जा गिरे, इस दौरान वह धमाके दौरान टूटे ट्रक के टुकड़ों से गंभीर रूप से घायल हो गए। थोड़ी ही दूरी पर अक्षय भी थे, पर वह घटना स्थल से दूर होने के कारण वह भी धमाके से जमीन पर जा गिरे जिसमें उन्हें कमर और पीठ में काफी चोटें आई।
स्थिति यह थी कि वे दोनों अन्य घायलों के साथ काफी समय तक जमीन पर पड़े रहे, पर धमाके के कारण लोगों के मौके से भाग जाने से उनकी मदद को कोई नहीं आया। इधर घटना की सूचना पर पंप से कुछ ही दूरी पर रहे वाले उन दोनों के स्वजन वहां पहुंचे और उन्हें निजी वाहन में लेकर वहां से बहादुरगढ के जीवन ज्योति अस्पताल लेकर पहुंचे जहां, चिकित्सकों ने ब्रह्मजीत को गंभीर चोटों और अत्यधिक खून बह जाने के कारण मृत घोषित कर दिया, वहीं अक्षय को प्राथमिक उपचार के बाद छोड़ दिया गया है।
वहीं, मृतक मनीष के चाचा विजय ने बताया कि उन्हें घटना को लेकर काल आया था कि सीएनजी पंप पर धमाका हो गया है और उसमें मनीष घायल हो गया है। उन्होंने बताया कि मनीष पिछले तीन सालों से इस पंप पर काम करते थे। दो साल पहले ही उनकी शादी हुई थी और उनका एक करीब एक साल का बच्चा है।
मनीष मूल रूप से बिहार के बेतिया के रहनेवाले
दिल्ली में बाबा हरिदास नगर कॉलोनी में रहते थे, वहीं मूल रूप से बिहार के बतिया के रहने वाले थे। विजय ने बताया कि काल आने के बाद उन्होंने अपने नजदीकी लोगों की इसकी जानकारी दी। वे लोग करीब 20 मिनट में मौके पर पहुंचे तब तक मनीष खून ले लथपथ घायल अवस्था में वहीं पड़े थे। उनके शरीर में विस्फोट से उड़े ट्रक के लोहे के टुकड़ो से गंभीर घाव लगा था।
उनकी स्थिति यह नहीं थी कि उन्हें बिना चिकित्सा कर्मी की मदद से उठाया जा सके। करीब आधे घंटे बाद जब मौके पर एंबुलेंस पहुंची तब उन्हें उठाकर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। संभवत: समय पर उन्हें चिकित्सा मदद मिल जाती तो शायद वह बच जाते।
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