तुर्कमान गेट हिंसा मामले में आरोपी उबैदुल्ला की जमानत बरकरार, दिल्ली की अदालत ने दिया फैसला
तुर्कमान गेट पथराव मामले में तीस हजारी सत्र अदालत ने एक आरोपी उबैदुल्ला की जमानत बरकरार रखी है। हाई कोर्ट द्वारा पूर्व आदेश रद करने के बाद दोबारा सुनव ...और पढ़ें
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पत्थरबाजी के बाद तुर्कमान गेट पर सुरक्षाबलों को तैनात किया गया था। फाइल फोटो- जागरण

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। तुर्कमान गेट पर हुए पथराव के मामले में एक आरोपित को जमानत देने के अपने पूर्व के निर्णय को तीस हजारी की सत्र अदालत ने बरकरार रखा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में जमानत देने के ट्रायल कोर्ट के पूर्व आदेश को रद करते हुए मामले को दोबारा विचार के लिए भेज दिया था।
मामले पर शनिवार को सुनवाई करने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायााीश जोगिंदर प्रकाश नाहर ने आरोपित उबैदुल्ला की जमानत याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपित का पत्थरबाजी करने वाली भीड़ या नारे लगाने वाली भीड़ से पहली नजर में कोई संबंध नहीं दिखता है। इसकी आगे जांच की जाएगी। हालांकि, 25 वर्षीय आरोपित को आगे हिरासत में रखने से कोई फायदा नहीं होगा।
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आरोपित पर पत्थरबाजी व नारेबाजी करने वाली भीड़ का हिस्सा होने का आरोप है, जिसने फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की थी।
सुनवाई के दौरान आरोपित के अधिवक्ता ए एफ फैजी और एमके मलिक ने तर्क दिया कि उबैदुल्ला भीड़ का हिस्सा नहीं था और वह अपनी नाबालिग बहन का पता लगाने के लिए अपने घर से बाहर आया था। उन्होंने तर्क दिया कि अगर अदालत सीसीटीवी फुटेज देखेगी तो उबैदुल्ला अपनी नाबालिग बहन को ढूंढने के लिए अपने घर से बाहर आया था, जोकि उसे नहीं मिली।
वहीं, जमानत याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक ज्ञान चंद्र सोनी ने दलील दी कि आरोपित को पता था कि उस इलाके में बीएनएस की धारा-163 (परेशानी या संभावित खतरे के मामलों में आदेश जारी करने की शक्ति) लागू है और इसके बावजूद वह भीड़ में शामिल था। यह भी तर्क दिया कि मामले में जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि वह हिंसा के समय वहां मौजूद था। उसके खिलाफ लगाए गए आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं।
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अदालत ने नोट किया कि आरोपित का घर हिंसा वाली जगह के पास था और जांच अधिकारी को आरोपित के भीड़ का हिस्सा होने के संबंध में सीसीटीवी फुटेज के अलावा और सुबूत मांगे। जांच अधिकारी ने जवाब दिया कि उनकी टीम और सुबूत इकट्ठा करने के लिए ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है, लेकिन चश्मदीदों के बयानों से आरोपित की भीड़ के साथ मौजूदगी पहले ही साबित हो चुकी है।
अब तक 20 लोग हो चुके हैं गिरफ्तार
मामले को दोबारा विचार के लिए ट्रायल कोर्ट को भेजते हुए हाई कोर्ट ने 21 जनवरी को कहा कि अदालत किसी व्यक्ति को दी गई आजादी में दखल देने में बहुत सावधान है, लेकिन यह एक असाधारण मामला है जहां एक आरोपित उबैदुल्ला को एक अस्पष्ट और बिना वजह वाले आदेश के जरिए जमानत दी गई थी।
पूरा मामला छह और सात जनवरी की रात मस्जिद के आसपास अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा से जुड़ा है। इस दौरान करीब 150-200 लोगों ने पुलिस और एमसीडी कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं थी। इसमें एसएचओ समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। हिंसा के सिलसिले में अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।