यूनियन बजट 2026 में ट्रंप के 50% टैरिफ का भी तोड़ निकाला, निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग को दी गई बड़ी राहत
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026 पेश किया, जिसमें अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के उपाय किए गए हैं। बजट में सीमा शुल्क कट ...और पढ़ें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में यूनियन बजट 2026 पेश करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50 प्रतिशत तक के भारी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कारगर कदम उठाये हैं।
HighLights
टैरिफ कम कर निर्यात और विनिर्माण को बढ़ावा दिया गया।
सीफूड, लेदर निर्यात के लिए ड्यूटी-फ्री आयात सीमा बढ़ी।
पूंजीगत व्यय में वृद्धि, राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखा गया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में यूनियन बजट 2026 पेश किया। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 प्रतिशत तक के भारी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाये गए हैं। बजट में लक्षित सीमा शुल्क और विनिर्माण उपायों पर पूरा ध्यान रखा गया है। यह बजट भारत की निर्यात क्षमता को मजबूत करेगा। इन घोषणाओं से प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के साथ ही वैश्विक जोखिमों के बीच लचीलापन लाने के लिए एक मजबूत रणनीति दिख रही है।
ट्रंप के टैरिफ से इन क्षेत्रों में पड़ा असर
ट्रंप प्रशासन ने भारतीय निर्यातों खासकर टेक्सटाइल, सीफूड और अन्य क्षेत्रों पर उच्च टैरिफ लगाए हैं। इससे इन क्षेत्रों पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि, भारत के सीफूड निर्यात में अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान 15.53 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 6.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, लेदर निर्यात में मामूली 0.23 फीसदी की गिरावट आई है।
बजट में प्रमुख उपायों में शामिल हैं...
व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित सभी देय वस्तुओं पर टैरिफ दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया गया।
सीफूड प्रसंस्करण और निर्यात के लिए निर्दिष्ट इनपुट्स के ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा को पिछले वर्ष के FOB मूल्य के 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया।
लेदर या सिंथेटिक फुटवियर के निर्यात के लिए उपलब्ध ड्यूटी-फ्री इनपुट्स को अब शू अपर्स के निर्यात पर भी लागू किया जाएगा।
रक्षा क्षेत्र में विमान पार्ट्स के निर्माण, MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) के लिए कच्चे माल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) से छूट।
माइक्रोवेव ओवन निर्माण के लिए निर्दिष्ट पार्ट्स पर BCD छूट।
लिथियम-आयन सेल और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए कैपिटल गुड्स पर BCD छूट का विस्तार।
सोलर ग्लास निर्माण के लिए सोडियम एंटीमोनेट आयात पर छूट।
क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग के लिए कैपिटल गुड्स पर छूट।
न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए आयातित सामानों पर BCD छूट को 2035 तक बढ़ाया गया, जो सभी क्षमता के प्लांट्स पर लागू होगा।
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने के लिए समर्थन।
एफओबी को तीन प्रतिशत किया जाए
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'मैं प्रस्ताव करती हूं कि सीफूड प्रसंस्करण और निर्यात के लिए निर्देशित इनपुट्स के ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा को बढ़ाकर पिछले वर्ष के फ्री ऑफ बोर्ड (एफओबी) मूल्य का तीन प्रतिशत किया जाए।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारा पहला कर्तव्य उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज करना और वैश्विक अस्थिरता के प्रति लचीलापन बनाना है।'
कैपिटल एक्सपेंडिचर को 12.2 लाख करोड़ दिए
बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जबकि फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर नियंत्रित रखा गया है। यह उपाय मुख्य रूप से लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स जैसे सीफूड, लेदर और टेक्सटाइल को राहत देने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात को टैरिफ के प्रभाव से बचाने पर केंद्रित हैं।
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निर्यात क्षेत्रों में स्थिरता और निवेश
विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम भारत की ट्रेड पोजीशन को रीकैलिब्रेट करने और ट्रंप के टैरिफ युद्ध के बीच मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे निर्यात क्षेत्रों में स्थिरता और निवेश के प्रति आकर्षण बढ़ेगा, जो भारत देश के वैश्विक स्तर विकास के लिए आवश्यक है।