दिल्ली सरकार के रडार पर क्याें आया रोहिणी का नामी स्कूल? टेकओवर लेने की तैयारी; डीओई ने थमाया नोटिस
दिल्ली सरकार ने रोहिणी के वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल को वित्तीय अनियमितताओं और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा निदेशालय ...और पढ़ें

रोहणी के स्कूल में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सरकार ने की एक्शन की तैयारी। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
दिल्ली सरकार ने वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल को कारण बताओ नोटिस भेजा
वित्तीय अनियमितताएं, सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मुख्य आरोप हैं
स्कूल प्रबंधन को प्रशासक के अधीन लेने की चेतावनी दी गई
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने रोहिणी स्थित वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और वैधानिक नियमों की अनदेखी के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने स्कूल से पूछा है कि उसके प्रबंधन को दिल्ली के प्रशासक के अधीन क्यों न लिया जाए।
संयुक्त जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं
यह कार्रवाई शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग और अन्य सरकारी विभागों की संयुक्त औचक जांच के बाद की गई। डीओई के अनुसार, जांच में सामने आई अनियमितताओं पर स्कूल का जवाब टालमटोल वाला और असंतोषजनक पाया गया।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के काम में बाधा डाली गई, जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए और छात्रों से अधिकारियों की अलग से बातचीत भी नहीं होने दी गई। जांच में अग्नि सुरक्षा से जुड़ी गंभीर खामियां भी सामने आईं।
स्कूल के पास वैध फायर एनओसी नहीं मिली, अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त हो चुकी थी, रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में खतरनाक रसायन असुरक्षित हालत में रखे गए थे और प्राथमिक उपचार सामग्री भी एक्सपायर मिली।
बेसमेंट के इस्तेमाल और फीस वसूली पर भी सवाल
निदेशालय ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल ने बेसमेंट की पार्किंग को अवैध रूप से 18 शैक्षणिक कमरों, प्रयोगशालाओं और गतिविधि कक्षों में बदल दिया। इसी परिसर का उपयोग बिना अनुमति सीबीएसई परीक्षा केंद्र के रूप में भी किया गया।
खबरें और भी
वित्तीय अनियमितताओं के मामले में विभाग का दावा है कि 15.6 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी घाटा दिखाने के बावजूद स्कूल ने अप्रमाणित कंपनियों को बड़े भुगतान किए।
विकास निधि से 22.23 लाख रुपये के मोबाइल फोन खरीदे गए और 3.25 करोड़ रुपये के असुरक्षित ऋणों का भुगतान बिना सत्यापन के कर दिया गया।
इसके अलावा, बिना अनुमति 15 प्रतिशत फीस वृद्धि, करीब 1.98 करोड़ रुपये की अग्रिम एवं कैपिटेशन फीस वसूली, बाहरी लोगों के लिए व्यावसायिक स्विमिंग पूल का संचालन व छत पर अवैध व्यावसायिक रसोई चलाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
शिक्षकों की नियुक्ति और सुविधाओं में भी खामियां
जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल के लगभग आधे शिक्षक संविदा पर नियुक्त हैं, जबकि खेल सुविधाएं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि स्कूल शिक्षा के केंद्र हैं, व्यवसाय चलाने की जगह नहीं। छात्रों की सुरक्षा से समझौता, वित्तीय अनियमितता और नियमों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।