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    DU में छिड़ा नया विवाद, ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ गायब होने पर भड़के छात्र; क्या है इतिहास और अहम भूमिका?

    Updated: Fri, 09 Jan 2026 01:59 PM (IST)

    दिल्ली विश्वविद्यालय से 'वॉल ऑफ डेमोक्रेसी' हटाए जाने पर छात्र संगठनों में नाराजगी है। यह दीवार छात्रों के लिए अपनी बात रखने का महत्वपूर्ण मंच थी, खास ...और पढ़ें

    ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ को हटाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े हुए। सोशल मीडिया

    ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ को हटाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े हुए। सोशल मीडिया

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के परिसरों में छात्र राजनीति की पहचान मानी जाने वाली ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ को हटाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    वर्षों से छात्र संगठनों और विद्यार्थियों के लिए अपनी बात रखने का मंच रही इन दीवारों के अचानक गायब होने से कैंपस में असमंजस और नाराजगी का माहौल है।

    उत्तर और दक्षिण परिसर में चिन्हित ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ पर छात्र संगठन पोस्टर, पर्चे और सूचनाएं चस्पा कर सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर अपनी राय रखते थे। यह व्यवस्था खासतौर पर छात्र संघ चुनावों के दौरान लागू रहती थी, ताकि दीवारों के अंधाधुंध विरूपण पर रोक लगे और अभिव्यक्ति के लिए एक नियंत्रित स्थान उपलब्ध हो सके।

    हाल ही में छात्रों ने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना के सुरक्षा कर्मियों द्वारा इन दीवारों से पोस्टर हटाए गए और पहचान बोर्ड भी हटा दिए गए। छात्रों का कहना है कि यह कदम न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि छात्रों की आवाज को सीमित करने जैसा भी प्रतीत होता है।

    डीयू के प्राक्टर कार्यालय ने दीवारों के हटाए जाने की पुष्टि तो की, लेकिन इसके पीछे कोई ठोस कारण सार्वजनिक नहीं किया गया। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि क्या भविष्य में ‘वाल ऑफ डेमोक्रेसी’ को फिर से बहाल किया जाएगा या कालेजों को इस संबंध में कोई नया निर्देश दिया गया है।

    छात्र संगठनों का तर्क है कि विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों में विचारों की विविधता और असहमति का सम्मान होना चाहिए। उनका कहना है कि ‘वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ केवल पोस्टर लगाने की जगह नहीं, बल्कि संवाद और भागीदारी की संस्कृति का प्रतीक रही है।

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    प्रशासन के इस कदम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या कैंपस में लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के लिए उपलब्ध स्थान धीरे-धीरे सिमटते जा रहे हैं।

    वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ का महत्व?

    • वॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए बनाया गया सार्वजनिक स्थान था।
    • इसका मुख्य उद्देश्य: सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक मुद्दों पर पोस्टर, पर्चे, सूचनाएं आदि के माध्यम से विचार व्यक्त करना।
    • विशेषकर छात्र संघ चुनावों के दौरान यह दीवार छात्र अभिव्यक्ति का प्रमुख मंच बनती रही।

    इतिहास और विकास

    • विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई साल पहले कैंपस में कुछ विशेष दीवारों को पोस्टर लगाने के लिए चिन्हित किया।
    • इन दीवारों को 'वॉल ऑफ डेमोक्रेसी' नाम दिया गया।
    • उद्देश्य: अभिव्यक्ति के लिए एक वैध और नियंत्रित स्थान उपलब्ध कराना
    • इससे छात्रों को सामाजिकराजनीतिक विचार सुरक्षित रूप से साझा करने का मंच मिला।

    छात्र संघ चुनावों में क्या भूमिका?

    • दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनावों में छात्र संगठन व प्रत्याशी इन दीवारों पर अपने विचार, घोषणापत्र और संदेश चस्पा करते थे।
    • इससे चुनावी गतिविधियां व्यवस्थित रहती थीं।
    • अनधिकृत स्थानों पर पोस्टर लगाने की प्रवृत्ति पर रोक लगती थी।

    नियम और दिशानिर्देश

    • विश्वविद्यालय ने समयसमय पर दीवारों के विरूपण को रोकने हेतु दिशानिर्देश जारी किए।
    • नियमों के अनुसार पोस्टर केवल चिन्हितवॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ पर ही लगाने की अनुमति दी गई।
    • इससे परिसर की स्वच्छताऔर सौंदर्य बनाए रखने में मदद मिली।

    कब हुआ बदलाव

    • जनवरी 2026 मेंदिल्लीविश्वविद्यालयनेकईप्रमुखवॉल ऑफ डेमोक्रेसी’ को अचानक हटाने या उनकी अधिसूचना समाप्त करने का निर्णय लिया।
    • इन दीवारों की पहचान से जुड़े बोर्ड और संकेतक भी हटा दिए गए।
    • इस कदम से छात्र संघ (डूसू) चुनावों के साथसाथ सामान्य छात्र अभिव्यक्ति पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।