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    दिल्ली में यमुना की बिगड़ती हालत पर उठे सवाल, डीपीसीसी ने जारी की नदी की मासिक रिपोर्ट

    Updated: Mon, 12 Jan 2026 05:27 AM (IST)

    दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने यमुना की नवंबर-दिसंबर मासिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें नदी की स्थिति बिगड़ी हुई दिखाई गई है। रिपोर्ट में फ ...और पढ़ें

    यमुना नदी की फाइल फोटो।

    यमुना नदी की फाइल फोटो।

    HighLights

    1. डीपीसीसी की नवंबर-दिसंबर रिपोर्ट में यमुना की स्थिति बिगड़ी

    2. फीकल कोलीफॉर्म, बीओडी स्तर में चिंताजनक वृद्धि दर्ज

    3. छठ पूजा की अस्थायी सफाई के बाद प्रदूषण लौटा

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दो माह से भी अधिक समय बीतने के बाद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने यमुना के लिए नवंबर व दिसंबर की मासिक रिपोर्ट जारी की है। हालांकि इसमें दिखाया गया है कि पिछले साल के उन्हीं महीनों की तुलना में नदी की सेहत काफी बेहतर हुई है, लेकिन निगरानी के ताता नतीजों में कुछ विसंगतियां भी हैं, जो विशेषज्ञों के अनुसार 'तर्कसंगत नहीं' लगती और सवाल खड़े करती हैं।

    आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो महीनों में हालात बिगड़े हैं। नजफगढ़ नाला मिलने के ठीक बाद आइएसबीटी ब्रिज पर फीकल कोलीफॉर्म का स्तर- जो बिना शोधित सीवेज को दर्शाता है- अक्टूबर में छठ पूजा के दौरान 8,000 यूनिट था, नवंबर में बढ़कर 20,000 और दिसंबर में 92,000 एमपीएन प्रति 100 मिली. तक पहुंच गया। जबकि सुरक्षित सीमा 2,500 और वांछित सीमा 500 एमपीएन प्रति 100 मिली तक है।

    yamuna

    बायोकैमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी), जो पहले 25 मिलीग्राम प्रति लीटर थी, नवंबर में बढ़कर 33 मिलीग्राम प्रति लीटर व दिसंबर में फिर से 25 मिलीग्राम प्रति लीटर पर आ गई। यह अभी भी तीन मिलीग्राम प्रति लीटर की सुरक्षित सीमा से आठ गुना अधिक है।

    छठ के दौरान ''कास्मेटिक'' सफाई

    इससे पहले अक्टूबर में, छठ के त्योहार के दौरान ऊपरी बैराज से अतिरिक्त पानी छोड़कर नदी को साफ किया गया था। 21 से 25 अक्टूबर के बीच, ताज़ा पानी नीचे की ओर भेजने और प्रदूषण को कम करने के लिए जानबूझकर 6,68,000 क्यूसेक से अधिक पानी यमुना में छोड़ा गया था। एक समय पर, बैराज से नदी में 225 क्यूमेक (7,990 क्यूसेक) पानी छोड़ा गया, जबकि पूर्वी और पश्चिमी यमुना नहरों में केवल 53 क्यूमेक पानी ही मोड़ा गया।

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    इससे नदी में बहाव बढ़ा, वह साफ हुई, बीओडी और डीओ के स्तर में सुधार हुआ। साथ ही प्रदूषण की पहचान माना जाने वाला झाग भी गायब हो गया। हालांकि, नवंबर के पहले हफ्ते तक झाग फिर दिखाई देने लगा क्योंकि छठ पूजा के दौरान किया गया यह अस्थायी प्रबंधन खत्म हो गया था और नदी की असली दुर्गंध वाली स्थिति वापस आ गई थी।

    रिपोर्ट पर उठते सवाल

    रविवार 11 जनवरी 2026 को डीपीसीसी की वेबसाइट पर जारी रिपोर्ट कुछ संदेह पैदा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर में जब नदी का बहाव अच्छा था और झाग नहीं था, तब ओखला बैराज जैसे कुछ इलाकों में बीओडी 20 मिलीग्राम/लीटर था।

    लेकिन नवंबर और दिसंबर में, जब बहाव कम होने से झाग और दुर्गंध लौट आई थी, तब उसी स्थान पर बीओडी सुधरकर 14 और 17 मिलीग्राम/लीटर दिखाया गया है। इसके अलावा कुछ नालों और उनके मिलने वाले बिंदुओं की गुणवत्ता के आंकड़े भी मेल नहीं खाते।

    जल गुणवत्ता के मानक

    • डिजाल्व्ड आक्सीजन (डीओ) : पानी में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा। यदि यह तय सीमा से कम हो जाए, तो जलीय जीवन के लिए हानिकारक होता है। (मानक : प्रति लीटर पांच मिलीग्राम तक)
    • बायोकैमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) : अधिक बीओडी का मतलब है कि पानी में प्रदूषण ज्यादा है और ऑक्सीजन की कमी है। (मानक : प्रति लीटर तीन मिलीग्राम से कम होना चाहिए)
    • फीकल कोलीफार्म : यह मुख्य रूप से बिना शोधित सीवेज के कारण होता है। (वांछित सीमा : प्रति 100 मिलीलीटर में 500 एमपीएन। अधिकतम सीमा : प्रति 100 मिलीलीटर में 2500 एमपीएन)

    डीओ, फीकल कालीफोर्म, बीओडी

    स्थान नवंबर 2025 नवंबर 2024
    पल्ला 8.5 / 1100 / 3 6.1 / 1100 / 3
    आइएसबीटी ब्रिज शून्य / 20,000 / 24 शून्य / 4,90,000 / 47
    ओखला बैराज 2.3 / 4,600 / 14 शून्य / 70,00,000 / 37
    असगरपुर शून्य / 24,000 / 33 शून्य / 79,00,000 / 54
    स्थान दिसंबर 2025 दिसंबर 2024
    पल्ला 8 / 1300 / 1.5 4 / 1200 / 4
    आइएसबीटी ब्रिज 0.3 / 92,000 / 24 शून्य / 6,40,000 / 51
    ओखला बैराज 2.7 / 28,000 / 17 शून्य / 3,30,000 / 37
    असगरपुर 0.8 / 54,000 / 20 शून्य / 84,00,000 / 70