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    364 साल पहले पेरिस में दौड़ी थी दुनिया की पहली सार्वजनिक बस, इंजन नहीं घोड़ों से खींची जाती थी सवारी

    Updated: Tue, 17 Mar 2026 03:58 PM (GMT+05:30)

    दुनिया की पहली सार्वजनिक बस सेवा पेरिस में एक गणितज्ञ ने शुरू की थी। ...और पढ़ें

    कब शुरू हुई थी दुनिया की पहली सार्वजनिक बस सेवा? (Picture Courtesy: Facebook)

    कब शुरू हुई थी दुनिया की पहली सार्वजनिक बस सेवा? (Picture Courtesy: Facebook)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सड़कों पर दौड़ती पब्लिक बसें आज एक आम नजारा है। ये हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं, जिन्होंने ट्रांसपोर्टेशन को काफी आसान बना दिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की पहली सार्वजनिक बस सेवा कब शुरू हुई थी? 

    आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया की पहली सार्वजनिक बस सेवा आज से लगभग 364 साल पहले शुरू हुई थी और इसकी नींव किसी इंजीनियर ने नहीं, बल्कि एक गणितज्ञ ने रखी थी। अब आप सोच रहे होंगे कि आज हम अचानक इस बारे में क्यों बात कर रहे हैं। तो आपको बता दें कि 18 मार्च ही वो तारीख है, जब पहली बार सार्वजनिक बस सेवा शुरू हुई थी। 

    घोड़ों वाली गाड़ियां और पास्कल का विजन

    सार्वजनिक बस सेवा के सफर की ऐतिहासिक शुरुआत पेरिस की गलियों से 18 मार्च 1662 को शुरू हुई। इसकी शुरुआत मशहूर फ्रांसीसी गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने की थी। उस समय आज की तरह डीजल या इलेक्ट्रिक इंजन नहीं थे, बल्कि ये घोड़ों से खींची जाने वाली विशेष गाड़ियां थीं। इन गाड़ियों की खासियत यह थी कि इनमें एक साथ छह से आठ यात्री सफर कर सकते थे और ये शहर के भीतर पहले से निर्धारित यानी तय मार्गों पर चलती थीं।

    ब्लेज पास्कल का मानना था कि अगर शहर के भीतर सामूहिक रूप से चलने वाली गाड़ियों का एक निश्चित रूट हो, तो लोगों का आवागमन न केवल आसान होगा बल्कि काफी सस्ता भी हो जाएगा। इसी विचार को हकीकत में बदलने के लिए पास्कल ने पेरिस के कुछ अमीर इंवेस्टर्स को तैयार किया।

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    Public Transport  (1)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    शाही अनुमति और पांच सिक्कों का किराया

    पास्कल के इस क्रांतिकारी विचार को जमीन पर उतारने के लिए सरकारी समर्थन की जरूरत थी। उनकी पहल पर फ्रांस के तत्कालीन राजा लुईस XIV ने इस सेवा को चलाने की शाही अनुमति और संचालन के अधिकार दिए। इस बस सेवा को एक अनोखा नाम भी दिया गया 'कारोस आ सैंक सू'। इसका मतलब था पांच सिक्कों में चलने वाली गाड़ियां। तय किराए पर चलने वाली ये गाड़ियां उस दौर में सार्वजनिक परिवहन का एक बिल्कुल नया प्रयोग था, जिसने लोगों को निजी सवारी के बजाय सामूहिक यात्रा का विकल्प दिया।

    लोकप्रियता और शुरुआती चुनौतियां

    शुरुआत में यह सेवा पेरिस के नागरिकों के बीच काफी लोकप्रिय हुई, लेकिन उस समय की सख्त सामाजिक व्यवस्था इसके रास्ते में एक बड़ी बाधा बन गई। उस दौर के नियमों के कारण आम किसानों और सैनिकों को इन गाड़ियों में यात्रा करने की अनुमति नहीं थी।

    सीमित यात्री वर्ग और अपने समय से बहुत आगे के इस विचार के कारण, कुछ सालों के बाद यह सेवा बंद कर दी गई। हालांकि यह प्रयोग लंबे समय तक नहीं चल सका, लेकिन पेरिस की इन सड़कों पर दौड़ने वाली घोड़ा-गाड़ियों ने ही आधुनिक सार्वजनिक बस प्रणाली की नींव रखी।