जागरण संपादकीय: पाकिस्तान का छलावा
पाकिस्तान में पनप रहा आतंकवाद वैश्विक जिहाद को खाद-पानी दे रहा है और यह जिहाद अमेरिका के लिए भी खतरा बन सकता है।
HighLights
पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनामी राशि बढ़ाकर एफएटीएफ को गुमराह किया।
एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से हटने के बाद भी आतंकी संगठन सक्रिय।
भारत को एफएटीएफ में पाकिस्तान के आतंकी छलावे को उजागर करना होगा।
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय संगठन एफएटीएफ की अगले माह होने वाली बैठक के पहले जिस तरह भारत में वांछित आतंकी सरगना मसूद अजहर पर इनामी राशि 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपए की, वह मनी लांड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण पर लगाम लगाने वाली इस संस्था के साथ-साथ विश्व की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश ही है। पाकिस्तान की धोखेबाजी का परिचय इससे मिलता है कि उसने कुछ समय पहले यह अफवाह फैलाई थी कि जैशे मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर अफगानिस्तान में कहीं छिपा है। अफगानिस्तान और भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार वह पाकिस्तान में ही है।
पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनामी राशि बढ़ाने के साथ आतंकियों की जो नई सूची जारी की, उसमें अनेक नाम ऐसे हैं, जो भारत में आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान ने आतंकियों की नई सूची में से कई के फोटो हटा दिए हैं और उनका आतंकी संगठनों से संबंध भी छिपा लिया है, जबकि पहले की सूची में उनके फोटो और इसका विवरण भी था कि वे किस आतंकी संगठन के लिए काम करते हैं।
पता नहीं एफएटीएफ पाकिस्तान के छलावे को भांप सकेगी या नहीं, लेकिन इसमें संदेह नहीं कि यदि वह कठोरता का परिचय नहीं देती तो आतंक से लड़ने में सक्षम नहीं हो सकेगी। एफएटीफ ने 2022 में पाकिस्तान को इसलिए अपनी ग्रे लिस्ट से हटाया था, क्योंकि यह लग रहा था कि वह अपने यहां के आतंकी ढांचे को खत्म कर रहा है, लेकिन ऐसा होते ही वह फिर से आतंकियों को पालने-पोसने में जुट गया।
पाकिस्तान में जैश और लश्कर सरीखे आतंकी संगठन पहले की ही तरह न केवल सक्रिय हैं, बल्कि फल-फूल भी रहे हैं। वे चंदा इकट्ठा करने के साथ ही आतंकियों की भर्ती भी करते रहते हैं। चूंकि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों को अपनी सुरक्षा नीति का हिस्सा बना लिया है, इसलिए वहां आतंकी संगठनों की सक्रियता खत्म होने का नाम नहीं लेती। वह आतंकियों को पालकर भारत ही नहीं, अन्य देशों के लिए भी खतरा बन रहा है।
विडंबना यह है कि सब कुछ जानते हुए भी एफएटीफ इसकी अनदेखी कर रही है। इसका कारण यह है कि इस संगठन में प्रभावी कुछ देश पाकिस्तान के हितैषी बने हुए हैं। इनमें प्रमुख है अमेरिका। जो अमेरिका पाकिस्तान पोषित आतंकवाद से पीड़ित रहा, वह इससे मुंह फेरे है कि इस देश में किस तरह आतंकवाद फल-फूल रहा है।
पाकिस्तान में पनप रहा आतंकवाद वैश्विक जिहाद को खाद-पानी दे रहा है और यह जिहाद अमेरिका के लिए भी खतरा बन सकता है। इसमें संदेह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की आंखें खुलेंगी, लेकिन एफएटीएफ में शामिल अन्य देशों को पाकिस्तान से उभर रहे खतरे का संज्ञान लेना चाहिए। वे ऐसा करें, इसके लिए भारत को इस संगठन में अपनी उपस्थिति का उपयोग करना होगा।











