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    तमिलनाडु का फैसला: क्या डीएमके करेगी कमबैक या एआईएडीएमके करेगी पलटवार; या फिर विजय की TVK करेगी कमाल

    Updated: Mon, 04 May 2026 06:01 AM (IST)

    आज तमिलनाडु में पूरे राज्य की निगाहें वोटों की गिनती पर टिकी हुई हैं। यह चुनाव हाल के वर्षों में सबसे अप्रत्याशित और रोचक माना जा रहा है, जहां सत्तारू ...और पढ़ें

    आज तमिलनाडु में पूरे राज्य की निगाहें वोटों की गिनती पर टिकी हुई हैं (फोटो- एएनआई)

    आज तमिलनाडु में पूरे राज्य की निगाहें वोटों की गिनती पर टिकी हुई हैं (फोटो- एएनआई)

    HighLights

    1. डीएमके सत्ता बरकरार रखने की पूरी कोशिश में जुटी हुई है

    2. अन्नाद्रमुक भी आत्मविश्वास के साथ मतगणना का इंतजार कर रही है

    3. टीवीके इस चुनाव की सबसे बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज तमिलनाडु में पूरे राज्य की निगाहें वोटों की गिनती पर टिकी हुई हैं। यह चुनाव हाल के वर्षों में सबसे अप्रत्याशित और रोचक माना जा रहा है, जहां सत्तारूढ़ द्रमुक, विपक्षी अन्नाद्रमुक और अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।

    डीएमके की कोशिश: लगातार दूसरा कार्यकाल

    मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनकी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) सत्ता बरकरार रखने की पूरी कोशिश में जुटी हुई है। धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के सहारे स्टालिन अपने शासन के रिकॉर्ड, कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक निरंतरता पर वोट मांग रहे हैं।

    कांग्रेस, वामपंथी दल, भारतीय मुस्लिम लीग और कुछ तमिल संगठनों के अलावा डीएमके ने विजयकांत की डीएमडीके और ओ पन्नीरसेल्वम को भी साथ जोड़ा है ताकि विभिन्न समुदायों के वोट सुरक्षित किए जा सकें।

    विजय का उदय: तमिल राजनीति में नया तूफान

    अभिनेता विजय और उनकी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) इस चुनाव की सबसे बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है। एमजीआर और जयललिता की राह पर चलते हुए विजय ने डीएमके से दूरी बनाए रखी और भाजपा की विचारधारा को तमिल अस्मिता के लिए खतरा बताया।

    उनका अभियान नाटकीय रहा, जिसमें फिल्म 'जना नायकन' और करूर घटना जैसी घटनाओं ने खूब सुर्खियां बटोरीं। विजय ने डीएमके पर हमला बोलते हुए राज्य के विकास और तमिल गौरव के मुद्दों को उठाया, लेकिन अन्नाद्रमुक के प्रति अपेक्षाकृत सतर्क रुख अपनाया।

    खबरें और भी

    अन्नाद्रमुक का पलटवार: जयललिता विरासत को बचाने की जंग

    जे जयललिता के निधन के बाद से संघर्ष कर रही अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) खुद को डीएमके का एकमात्र विकल्प बताने की कोशिश कर रही है। एडप्पाडी के पलानीस्वामी के नेतृत्व में पार्टी संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है।

    केए सेंगोत्तैयान के टीवीके और ओ पन्नीरसेल्वम के डीएमके में जाने से उसे बड़ा झटका लगा है, फिर भी एआईएडीएमके थेवर वोटों और पारंपरिक आधार पर वापसी की उम्मीद लगाए हुए है।

    एग्जिट पोल की उलझन: तीन अलग-अलग तस्वीरें

    एग्जिट पोल इस बार बेहद विभाजित नजर आए हैं।

    • एक्सिस माई इंडिया ने टीवीके को 98-120 सीटें देते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनने का अनुमान लगाया है।
    • पीपुल्स पल्स और चाणक्य ने डीएमके को 125-145 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत दिलाया है, टीवीके को दूसरे स्थान पर रखा।
    • जेवीसी-टाइम्स नाउ ने एआईएडीएमके को 128-147 सीटों के साथ अप्रत्याशित वापसी की भविष्यवाणी की है।

    पार्टियों का भरोसा: हर कोई दावा कर रहा जीत

    डीएमके प्रवक्ता डॉ. सैयद हाफीजुल्लाह ने सकारात्मक एग्जिट पोल को रूढ़िवादी बताते हुए कहा कि पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल करेगी। टीवीके के निर्मल कुमार ने जमीनी हकीकत पर भरोसा जताते हुए कहा कि जनादेश विजय के पक्ष में होगा। अन्नाद्रमुक भी आत्मविश्वास के साथ मतगणना का इंतजार कर रही है।