Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    68वें ग्रैमी पुरस्कार में नए दौर के सितारों की गूंज,नॉमिनेशन तक का मुकाम हासिल करना बड़ी जीत

    Updated: Sun, 15 Feb 2026 03:31 PM (GMT+05:30)

    इस साल भारत को ग्रैमी नहीं मिला, लेकिन 68वें ग्रैमी पुरस्कार समारोह ने वैश्विक मंच पर भारतीय संगीत की मजबूत उपस्थिति को दर्शाया। यह घोषणा थी कि हमारा ...और पढ़ें

    सितार वादन करते हुए अनुष्का शंकर (फोटो-इंस्टाग्राम)

    सितार वादन करते हुए अनुष्का शंकर (फोटो-इंस्टाग्राम)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    संदीप भूतेड़िया, मुंबई। भले ही इस साल भारत के हाथ गोल्डन ग्रामोफोन ट्राफी न लगी हो, लेकिन हमने दुनिया पर एक ऐसी छाप छोड़ी है जो सालों तक गूंजती रहेगी। 68वें ग्रैमी पुरस्कार समारोह से लौटकर संदीप भूतोड़िया का आलेख...

    आने वाले कुछ दिनों तक इंटरनेट पर केवल केंड्रिक लैमर के दबदबे या बिली आइलिश के ‘सांग आफ द ईयर’ की चर्चा होगी, लेकिन लास एंजिल्स के क्रिप्टो.काम एरिना में जब 68वें ग्रैमी अवार्ड्स की लाइटें मद्धम हुईं, तो मैं कुछ और ही सोच रहा था। यह समारोह इस बात का गवाह था कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंच पर भारतीय संगीत की मौजूदगी को अब नकारा नहीं जा सकता।

    यह भी पढ़ें- ग्रैमी अवॉर्ड्स में गूंजेगी 'महाकुंभ की आवाज,' Kanika Kapoor के गाने को मिला नॉमिनेशन

    नामांकन नहीं, यह घोषणा है

    यह भारत के लिए केवल साधारण ग्रैमी समारोह नहीं था। यह इस बात का ऐलान था कि हमारा संगीत अब वैश्विक स्तर पर दुनिया के सबसे बड़े दिग्गजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। सितारवादक अनुष्का शंकर के लिए यह पल थोड़ा भावुक था। दो नामांकन होने के बावजूद वह पुरस्कार नहीं जीत पाईं। हालांकि,उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य व पुराने दौरों की प्रतिबद्धताओं को प्राथमिकता देते हुए समारोह में शामिल न होने का फैसला किया, जो वाकई सम्मानजनक है।

    Grammy (4)

    पुरानी विरासत और नई ऊर्जा

    भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में रिकी केज (तीन बार के ग्रैमी विजेता) का बड़ा हाथ रहा है। मेरे इस संगीतकार मित्र ने भारतीय शास्त्रीय परंपराओं को पर्यावरण और जलवायु जैसे वैश्विक विषयों के साथ जोड़कर संगीत की नई परिभाषा गढ़ी है। इस साल ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एलबम’ श्रेणी में दिग्गज इंडो-जैज फ्यूजन ग्रुप ‘शक्ति’ के एलबम ‘माइंड एक्सप्लोजन’ ने कड़ी टक्कर दी। यह एलबम तबला उस्ताद जाकिर हुसैन का आखिरी काम (स्वैन सांग) था, जिनका दिसंबर 2024 में निधन हो गया। जाकिर हुसैन ने दुनिया के सामने तबले की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल दिया। इसी तरह 1994 में विश्व मोहन भट्ट की जीत ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की नींव वैश्विक मंच पर रखी थी। आज उनके द्वारा बनाई गई ‘मोहन वीणा’ और प्रयोगों के कारण ही भारतीय संगीत दुनियाभर में घुल-मिल गया है।

    खबरें और भी

    Grammy (5)

    नए दौर के सितारे

    इस साल के ग्रैमी में केवल पुराने दिग्गज ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी का भी जोश दिखा। दिल्ली के संगीतकार सिद्धांत भाटिया को उनके एलबम ‘साउंड्स आफ कुंभ’ के लिए पहला ग्रैमी नामांकन मिला। उन्होंने महाकुंभ मेले के पारंपरिक मंत्रों को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर साहसी प्रयोग किया है। वहीं, भारतीय-अमेरिकी पियानोवादक चारु सूरी ने एलबम ‘शयन’ के लिए ‘राग-जैज’ शैली में नामांकन पाकर इतिहास रच दिया। दक्षिण भारत में जन्मी चारु उदाहरण हैं कि कैसे भारतीय मूल के कलाकार विदेश में रहकर भी हमारी परंपराओं को नया रूप दे रहे हैं।

    उपलब्धि जीत से बड़ी है

    2010 में जब ए.आर. रहमान ने ‘स्लमडाग मिलियनेयर’ के लिए दो ग्रैमी जीते थे, तो उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए दरवाजे खोल दिए थे। दरअसल, विविधता ही हमारी ताकत है-चाहे वह अनुष्का शंकर का शास्त्रीय वादन हो, ‘शक्ति’ का फ्यूजन हो या सिद्धांत भाटिया का प्रयोग। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज दुनिया के सबसे बड़े मंच पर जब भारतीय कलाकारों के नाम पुकारे जाते हैं, तो पूरा एरिना तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है। अब सवाल यह नहीं है कि हम ग्रैमी जीतेंगे या नहीं, सवाल बस यह है कि ‘कब’ जीतेंगे!

    यह भी पढ़ें- Grammy Award 2026 पर फूटा डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा, होस्ट Trevor Noah के खिलाफ दर्ज कराएंगे मुकदमा