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    शाह रुख खान के सामने Akshay Kumar ने बताई थी सिनेमा की कड़वी सच्चाई, कैसे फंसाता है फिल्मों का मायाजाल?

    By smita srivastavaEdited By: Ashish Rajendra
    Updated: Sun, 18 Jan 2026 02:29 PM (GMT+05:30)

    अक्षय कुमार हिंदी सिनेमा में 3 दशक से ज्यादा लंबी पारी खेल चुके हैं। बीते साल एक अवॉर्ड शो के दौरान अक्की ने सुपरस्टार शाह रुख खान और निर्माता करण जौह ...और पढ़ें

    शाह रुख खान और अक्षय कुमार (फोटो क्रेडिट- एक्स)

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई। पिछले साल फिल्मफेयर अवार्ड्स के मंच पर जब अक्षय कुमार और शाह रुख खान एक साथ दिखाई दिए तो किसी ने सोचा नहीं था कि उनके बीच की हल्की फुल्की बातचीत हिंदी सिनेमा के सबसे गंभीर मुद्दे में से एक को उजागर कर देगी। बातचीत के दौरान शाह रुख ने अक्षय से पूछा कि क्या वह इंडस्ट्री में नए लोगों को कोई एक सलाह देना चाहेंगे।

    उन्होंने कहा कि मैं सभी नए लोगों और आने वाले नए लोगों से बस एक बात कहना चाहता हूं कि कभी भी किसी प्रोड्यूसर के साथ तीन फिल्मों की डील साइन न करें। बात मजाक में कही गई थी, लेकिन उसके पीछे छिपी सच्चाई इंडस्ट्री के कई अधूरे करियरों की कहानी बयान करती है। अक्षय ने आर्यन खान की डायरेक्टोरियल सीरीज द बैड्स ऑफ बालीवुड का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सीरीज में एक नवोदित अभिनेता को अनुबंध की मुश्किलों में फंसा हुआ दिखाया गया है।

    अक्षय कुमार की राय

    उन्होंने साफ कहा कि सीरीज साफ बताती है कि डेब्यू करने वाले को क्या करना चाहिए और क्या नहीं। आगे उन्होंने कहा कि नए कलाकारों को उड़ने की आजादी मिलनी चाहिए। अगर वे काबिल हैं तो रास्ता खुद उन्हें वापस ले आएगा। इस मौके पर शाह रुख खान और करण जौहर मुस्कुराते हुए दिखे लेकिन इंडस्ट्री के जानकार जानते हैं कि यह सलाह मजाक नहीं अनुभव से निकली कड़वी सच्चाई है।

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    हिंदी सिनेमा में बड़े प्रोडक्शन हाउस नवोदित कलाकारों को लांच करते समय अक्सर तीन फिल्मों का अनुबंध साइन करते हैं। इसका तर्क सीधा यह होता है टैलेंट को सुरक्षित रखना, निवेश की भरपाई करना, कलाकार को पहचान दिलाना और उसे तय प्लेटफार्म देना। कागजों पर यह अनुबंध दोनों के लिए फायदेमंद दिखता है लेकिन वास्तविकता में यही कलाकारों के लिए अदृश्य बेड़िया बन जाता है।

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    नवोदित कलाकार न किसी और बैनर के साथ काम कर सकता है न ही अपनी शर्तों पर प्रोजेक्ट को चुन सकता है। अगर पहली फिल्में बॉक्स ऑफिस पर विफल हो जाए तो प्रोडक्शन फिल्म बाकी फिल्मों को ठंडे बस्ते में डाल देता है। नतीजन कलाकार न पूरी तरह आजाद होता है न लांच। बॉलीवुड में ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जहां कलाकारों ने तीन-फिल्मों की डील साइन की, लेकिन पहली फिल्म के फ्लाप होते ही उनका करियर ठहर गया।

    इन कलाकारों ने साइन की तीन-तीन फिल्में

    यशराज फिल्म्स से लांच हुई अभिनेत्री अन्या सिंह इसका उदाहरण हैं। 2017 में आई उनकी फिल्म कैदी बैंड असफल रही और बाकी दो फिल्में कभी शुरू ही नहीं हो सकीं। एक बड़ा बैनर, बड़ा मौका सब कागजों में सिमट कर रह गया। लक्ष्य ने धर्मा के साथ तीन-फिल्मों की डील साइन की थी, जिसमें किल उनकी पहली फिल्म थी, और दो फिल्में दोस्ताना 2 और बेधड़क नहीं बन पाईं।

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    इस सिस्टम का ताजा और चर्चित उदाहरण हैं अहान शेट्टी। सुनील शेट्टी के बेटे आहान ने 2021 में साजिद नाडियाडवाला की फिल्म तड़प से डेब्यू किया। फिल्म महामारी के दौर में रिलीज हुई थी, जब सिनेमाघरों में दर्शक कम थे और माहौल अनिश्चित। इसके बाद आहान लगभग चार साल तक बड़े पर्दे से गायब रहे।

    इस दौरान उन्हें लेकर तरह-तरह की अटकलें और नकारात्मक खबरें भी सामने आईं, जिन पर सुनील शेट्टी सार्वजनिक रूप से नाराज हुए। अहान भी अनुबंध संबंधी कारणों से लंबे समय तक कोई फिल्म साइन नहीं कर सके। यह सिर्फ चार साल का अंतराल नहीं था। यह एक युवा अभिनेता के करियर की वह उम्र थी, जब पहचान बनती है, गति मिलती है, प्रयोग होते हैं।

    बॉर्डर 2 से अहान को मिलेगी नई रफ्तार

    अब बार्डर 2 में नौसेना अधिकारी की भूमिका के साथ आहान वापसी कर रहे हैं। इसके साथ ही उनके कंधों पर एक विरासत का बोझ भी है क्योंकि यह साल 1997 में आई जे पी दत्ता निर्देशित फिल्म बार्डर की सीक्वल है जिसमें उनके पिता सुनील शेट्टी ने भैरव सिंह की यादगार भूमिका निभाई थी। पिता की तरह अहान भी अपनी सादगी,विनम्रता और शिष्टाचार की वजह से चर्चा में रहते हैं। बार्डर 2 से उनके करियर को नई धार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बहरहाल, यह कहानी सिर्फ अहान शेट्टी की नहीं है।

    यह उन सैकड़ों युवाओं की कहानी है, जो हुनर लेकर आते हैं, लेकिन शर्तों में उलझकर रह जाते हैं। तीन-फिल्मों की डील कलाकार को सुरक्षित करने का दावा करती है, लेकिन असल में वह उसे एक अनिश्चित भविष्य में बांध देती है। अक्षय कुमार की सलाह इसलिए अहम है क्योंकि वह सिर्फ नए कलाकारों से नहीं, पूरे सिस्टम से सवाल करती है।

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