45 साल पुराने गाने के बिना अधूरा है होली का त्यौहार, राज कपूर का दिल बहलाने के लिए Amitabh Bachchan ने गाया था गीत
होली का त्यौहार हो और रंग बरसे ना बजे, ऐसा कैसे हो सकता है। जितना खूबसूरत ये गाना है इसके बनने के पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। आइए जानते हैं आ ...और पढ़ें

राज कपूर का दिल बहलाने के लिए अमिताभ बच्चन ने गाया था ये गाना

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। पूरे देश में होली का त्यौहार बहुत जोश और खुशी के साथ मनाया जाता है, लेकिन म्यूजिक के बिना इस दिन को मनाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती, क्योंकि म्यूजिक एक यूनिवर्सल भाषा है जो लोगों को एक साथ लाती है और खुशियां फैलाती है।
वैसे तो हिंदी सिनेमा में होली पर कई गाने बनाए गए लेकिन 'रंग बरसे भीगे चुनर वाली' (Rang Barse Bheege Chunar Wali) की बात अलग है। होली के त्यौहार पर ये गाना हर जगह सुनने को मिल जाता है। गाने के बोल के साथ-साथ इसमें अमिताभ बच्चन का अंदाज भी अलग है।
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किसने ईजाद किया था रंग बरसे गाना?
जितना ये गाना खूबसूरत और नाचने पर मजबूर करने वाला है उतनी ही मजेदार इसके पीछे की स्टोरी है। फिल्म 'सिलसिला' का मशहूर होली गाना 'रंग बरसे' 15वीं सदी की रहस्यवादी कवयित्री मीरा के एक पारंपरिक भजन पर आधारित है, जिसके बोल मशहूर हरिवंश राय बच्चन ने लिखे थे। हालांकि, बॉलीवुड में इसका सफर काफी सिनेमाई रहा।
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कैसे आया रंग बरसे का आइडिया?
1980 के दशक में RK स्टूडियो में एक होली सेलिब्रेशन के दौरान, राज कपूर (Raj Kapoor) ने अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को एक कम मशहूर आर्टिस्टिक टैलेंट दिखाने के लिए कहा। जहां अमिताभ ने अपनी खास आवाज में 'रंग बरसे...' गाया।
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ऐसे बना होली एंथम में से एक
उस सेलिब्रेशन में मौजूद लोगों में फिल्ममेकर यश चोपड़ा (Yash Chopra) भी थे, जो इस गाने और इसके लिरिक्स से इतने इम्प्रेस हुए कि बाद में उन्होंने इसे सिलसिला में शामिल करने का फैसला किया। बस फिर क्या था, इतिहास है—रंग बरसे बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा होली एंथम में से एक बन गया।
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सिलसिला (Silsila) 1981 की एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसे यश चोपड़ा ने को-राइट, डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया है। कहानी एक रोमांटिक नाटककार अमित (अमिताभ बच्चन), उनकी पत्नी शोभा (जया बच्चन) और उसकी एक्स-लवर चांदनी (रेखा) के लव ट्रायंगल के इर्द-गिर्द घूमती है।