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    एक कविता लिखकर बुरे फंसे थे Amitabh Bachchan के पिता, देश भर में हुआ था विरोध; फिर गांधी जी ने सुलझाया था मसाला

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 06:52 PM (GMT+05:30)

    हरिवंश राय बच्चन (Harivansh Rai Bachchan) की 91 साल पुरानी इस कविता के लिए उन्हें देशभर में विरोध झेलना पड़ा था और आखिरकार गांधी जी को इस मसले में कूद ...और पढ़ें

    हरिवंश राय बच्चन की कविता पर मचा था बवाल

    हरिवंश राय बच्चन की कविता पर मचा था बवाल 

    HighLights

    1. हरिवंश राय बच्चन की कविता पर मचा था बवाल 

    2. गांधी जी तक पहुंच गया था मसला 

    3. मशहूर कविता पर मन्ना डे ने बनाया गाना

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। कुछ रचनाएं ऐसी होती हैं जो सालों नहीं सदियों तक लोगों के दिलो दिमाग पर छाई रहती हैं। ऐसी ही एक रचना अमिताभ बच्चन के पिता और मशहूर राइटर हरिवंश राय बच्चन ने की थी-एक ऐसी कविता जिसे लिखने के बाद देशभर में उनका विरोध हुआ, क्रिटीक्स ने उन पर युवाओं को गलत दिशा में जाने के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए और आखिरकार इसकी शिकायत गांधी जी तक पहुंच गई।

    देशभर में हरिवंश राय को झेलना पड़ा था विरोध

    जिस कविता की हम बात कर रहे हैं वह है- मधुशाला (Madhushala)। हरिवंश राय बच्चन की यह कविता दशकों बाद भी लोगों के दिलों में उतरी हुई है और लोग इसे आज भी उतना ही पसंद करते हैं। लेकिन जब उन्होंने इसे लिखा था तो क्रिटीक्स ने इसकी आलोचना करते हुए कहा था कि यह कविता युवाओं को शराब की पीने और नशा करने की ओर प्रेरित करती है।

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    विरोध इतना बढ़ गया था कि यह बात महात्मा गांधी जी (Mahatma Gandhi) तक पहुंच गई थी। इसका खुलासा खुद अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने अपने शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में किया था। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा था, 'एक बार ऐसा मौका आया जब मेरे पिताजी और गांधी जी एक ही जगह पर मौजूद थे। गांधीजी ने उन्हें बुलाया और पूछा, 'मुझे बताइए, ऐसा आपने क्या लिख दिया है'?

    गांधी जी ने सुलझाया था मसला

    बिग बी ने आगे बताया था, 'जब मेरे पिताजी ने उन्हें मधुशाला सुनाई और कहा कि मधुशाला कोई मदिरालय नहीं है बल्कि यह जिंदगी की उलझनों, प्रेम की प्यार और आत्मा की तलाश का प्रतीक है। इतना सुनकर गांधी जी ने कहा, ' इसमें तो कोई खराबी नहीं है'। इसके बाद ही यह पूरा विवाद शांत हुआ।

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    हरिवंश राय बच्चन ने कभी नहीं पी थी शराब

    अमिताभ बच्चन ने यह भी खुलासा किया था कि उनके पिता ने कभी शराब नहीं पी, फिर भी उन्होंने मधुशाला जैसी रचना लिखी। लोग उनसे पूछते भी थे कि आप तो शराब नहीं पीते फिर इसके बारे में इतना गहराई से कैसे लिख दिया? तब हरिवंश राय बच्चन ने अपनी रचना में इस सवाल का भी जिक्र कर दिया कि आखिर कैसे लोग उनसे इसके बारे में सवाल करते हैं।

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    91 साल पहले लिखी थी कविता, मन्ना डे रिकॉर्ड किया था एल्बम

    हरिवंश राय बच्चन ने इस कविता को लगभग 91 साल पहले 1935 में लिखा था। यह कविता भारतीय सिनेमा से गहराई से जुड़ी हुई है। मशहूर गायक मन्ना डे ने 1973 में 'मधुशाला' का एक यादगार म्यूजिकल एल्बम रिकॉर्ड किया था, जिसका संगीत जयदेव ने तैयार किया था।

    हरिवंश राय बच्चन, 20वीं सदी की शुरुआत के हिंदी साहित्य के 'नई कविता' आंदोलन (रोमांटिक लहर) से जुड़े एक कवि और लेखक थे। बच्चन अपनी शुरुआती रचना 'मधुशाला' के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं। वे अमिताभ बच्चन के पिता और श्वेता बच्चन नंदा व अभिषेक बच्चन के दादा थे। उनकी पत्नी तेजी बच्चन एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं। 1976 में, उन्हें हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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