यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 07, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Manoj Bajpayee के पैरों पर गिर पड़े थे अनुराग कश्यप, सत्या के दौरान ऐसी हो गई थी हालत
राम गोपाल वर्मा की 1998 की फिल्म "सत्या" में मनोज बाजपेयी ने भीकू म्हात्रे का यादगार किरदार निभाया था। फिल्म ...और पढ़ें

जब अनुराग कश्यप ने पकड़े थे मनोज बाजपेयी के पैर/ फोटो- Instagram
HighLights
मनोज बाजपेयी के दोनों पैर पकड़कर क्यों खड़े हुए थे अनुराग
सत्या की शूटिंग के दौरान का है ये दिलचस्प किस्सा
सत्या की शूटिंग के दौरान का है ये दिलचस्प किस्सा
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। राम गोपाल वर्मा का सिक्का अब भले ही बॉलीवुड में न चलता हो, लेकिन एक समय ऐसा था, जब उनकी फिल्में देख-देखकर दर्शकों का मन नहीं भरता था। इन्हीं फिल्मों में से एक थी, उनकी साल 1998 रिलीज हुई क्राइम थ्रिलर फिल्म 'सत्या', जिसमें मनोज बाजपेयी, उर्मिला मातोंडकर, जे, डी चक्रवर्ती, परेश रावल और शैफाली शाह जैसे मंझे हुए कलाकार नजर आए थे।
'सत्या' में मनोज बाजपेयी ने गुंडे भीकू म्हात्रे का किरदार निभाया था, जो आज भी फेमस है। फिल्म में मुख्य भूमिका भले ही जे, डी चक्रवर्ती की हो, लेकिन मनोज ने अपने किरदार में ऐसी जान डाली थी कि वह पूरी लाइमलाइट ले गए थे। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान 'क्यों' पकड़ने पड़े थे अनुराग कश्यप को मनोज बाजपेयी के पैर, नीचे पढ़ें डिटेल्स:
अनुराग कश्यप को क्यों पकड़ने पड़े थे पैर
सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि राम गोपाल वर्मा ने जहां इस फिल्म का निर्देशन किया था, तो वहीं उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे अनुराग कश्यप इस फिल्म से को-राइटर के तौर पर जुड़े हुए थे। सत्या का एक सीन था, जहां भीकू म्हात्रे को 'मुंबई का किंग कौन' ये डायलॉग बोलना था और सीन को पूरा करना था। हालांकि, इसमें उनकी हालत खराब हो गई थी, जिसका खुलासा खुद अनुराग ने किया था।
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अनुराग ने साल 2020 में अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर 'सत्या' की शूटिंग के दौरान की एक फोटो शेयर की थी, जिसमें मनोज बाजपेयी को ऊंचाई से शूट करना था, लेकिन इसमें उनकी हालत बिगड़ रही थी। इस सीन के बारे में बताते हुए अनुराग ने कैप्शन में लिखा था,
"मुझे याद है कि फेमस सीन 'मुंबई का किंग कौन' की शूटिंग से जस्ट पहलेमनोज बाजपेयी और मुझे हाइट से कितना ज्यादा डर लग रहा था। मैं भी इस सीन में था, जो दिखा नहीं, क्योंकि मैं ग्राउंड पर लेटा था और मैंने भीकू म्हात्रे के पैर पकड़े हुए थे, जब वह ये आइकॉनिक सीन बोल रहे थे। सीन में उनकी सांस चढ़ना सबकुछ असली था। गैंगस्टर बनने के लिए बाजु भाई को क्या-क्या करना पड़ा था"।
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क्या थी फिल्म 'सत्या' की कहानी?
सत्या की कहानी एक ऐसे लड़के की थी, जो नौकरी की तलाश में मुंबई आता है और उसे रेस्टोरेंट में काम मिल जाता है। वहां पर जग्गा नाम का विलेन सत्या की बनाई दारू को उसके मुंह पर फेंक देता है। उसके बाद जग्गा का आदमी सत्या से पैसे मांगता है और वह देने से सीधा इनकार कर देता है और उसके चेहरे पर उस्तरा फेर कर उसकी पिटाई करता है

दूसरी तरफ भीकू म्हात्रे जो जग्गा की गैंग में काम करता है वह मांजरेकर संग मिलकर एक प्रोड्यूसर को मार देता है। मांजरेकर पुलिस के हाथों पकड़ा जाता है और स्वीकार करता है कि भीकू उसके साथ मिला हुआ है, जिसके बाद उसकी भी गिरफ्तारी होती है। इधर जग्गा सत्या पर दारू खरीदने का आरोप लगाता है और जेल भेज देता है। जेल में ही भीकू की मुलाकात सत्या से होती है। दोनों आपस में लड़त हैं, भीकू सत्या से इम्प्रेस हो जाता है और उसे अपनी गैंग में शामिल कर लेता है।
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