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    Asha Bhosle: 8 दशक का करियर, 12 हजार गाने! गिनीज बुक में दर्ज किया नाम, कहानी सुरों की मल्लिका की

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 02:12 PM (IST)

    मशहूर गायिका आशा भोसले का 12 अप्रैल को 92 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। मल्टीपल ऑर्गन फेलियर उनकी मृत्यु का कारण बताया गया। उन्होंने 800 से अ ...और पढ़ें

    आशा भोसले का हुआ निधन (फोटो- एक्स)

    आशा भोसले का हुआ निधन (फोटो- एक्स)

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। "संगीत अगर एक समंदर है, तो आशा भोसले उसकी वो लहर हैं जो हमेशा नई उमंग और खनक के साथ आती हैं।"  मशहूर सिंगर आशा भोसले (Asha Bhosle) का 12 अप्रैल को निधन हो गया। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने 92 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन की वजह मल्टीपल ऑर्गन फेलियर बताया जा रहा है।

    आशा जी की आवाज भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की वो कड़ी थीं जिनके गानों को नए के साथ पुरानी पीढ़ी के लोग भी पसंद करते थे। आशा ने कई शैलियों के गानें गाए और इनके जरिए दर्शकों के दिलों में अपने लिए एक अलग जगह बनाई। ऐसी बेजोड़ और बहुमुखी प्रतिभा की धन गायिका के करियर पर एक नजर...

    आशा ने 800 से अधिक फिल्मों में गाने गाए

    आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। आशा भोंसले ने करीब 800 से अधिक फिल्मों के लिए 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं। इसी के साथ उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा संगीत इतिहास में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता प्राप्त है। Asha (9)

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    पिता ने दी थी संगीत की शिक्षा

    महाराष्ट्र के संगीतकार मंगेशकर परिवार में जन्मीं आशा लोकप्रिय गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। महान गायिका लता मंगेशकर की तरह ही आशा को भी उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी। साल 1942 में जब उनके पिता का निधन हुआ, तब आशा जी की उम्र मात्र 9 वर्ष थी। परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए उन्हें और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर जी ने फिल्मों में गाना शुरू कर दिया।

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    उन्होंने फिल्म चुनरिया (1948) से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन शीर्ष पर पहुंचने में उन्हें लंबा समय लगा। उस दौर में लता मंगेशकर, शमशाद बेगम और गीता दत्त जैसी बड़ी गायिकाओं का बोलबाला था। शुरुआत में आशा जी को अक्सर वे गाने मिलते थे जिन्हें मुख्य गायिकाएं छोड़ देती थीं या जो वैम्प और साइड किरदारों पर फिल्माए जाते थे।

    वेस्टर्न स्टाइल के गानों से बनाई पहचान

    यूं तो हर तरह के गाने (गजल, पॉप आदि) उनकी गायन क्षमता के दायरे में आते थे, लेकिन उनकी खासियत सेंशुअल और वेस्टर्न स्टाइल के गानों में थी। जीनत अमान से लेकर उर्मिला मातोंडकर तक, जिन भी अभिनेत्रियों के लिए उन्होंने गाया उन सभी को पर्दे पर पहले से कहीं अधिक आकर्षक बनाने की आशा में एक अनोखी प्रतिभा थी। 

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    लेकिन साल 1957 में उन्हें संगीतकार ओ.पी. नैयर के साथ फिल्मों 'तुमसा नहीं देखा' और 'नया दौर' (1957) में बड़ा ब्रेक मिला। 1958 में उनकी तीन फिल्में रिलीज हुईं 'लाजवंती' (1959), 'हावड़ा ब्रिज' (1958) और 'चलती का नाम गाड़ी' (1958), इन फिल्मों के हिट गानों ने आशा को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसके बाद, वह 1970 के दशक की शुरुआत तक नैयर की पसंदीदा गायिका रहीं। दोनों ने साथ मिलकर संगीत का जादू बिखेरा, खासकर फिल्मों 'फिर वही दिल लाया हूं' (1963), 'मेरे सनम' (1965), 'हमसाया' (1968) और 'प्राण जाए पर वचन ना जाए' (1974) में।

    कहलाईं प्लेबैक सिंगिंग की क्वीन

    आशा ने लता से बिल्कुल अलग कैबरे नंबरों, गजलों, भजनों और पॉप गानों से अपनी अलग पहचान बनाई। 'दम मारो दम','पिया तू अब तो आजा','दिल चीज क्या है','ये मेरा दिल' और 'चुरा लिया है तुमने' शामिल हैं। साल 1960 के दशक के अंत तक, वह अपनी बहन के बाद दूसरे स्थान पर सबसे पॉपुलर सिंगर्स में से एक थीं। दोनों ही बहनें 1990 के दशक तक प्लेबैक सिंगिंग की क्वीन कहलाईं।

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    लता के सेक्रेटरी से की थी शादी

    उन्होंने 16 साल की उम्र में गणपतराव भोसले से शादी की हालांकि बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद में 1980 में संगीत निर्देशक आर.डी. बर्मन से शादी की और दोनों ने मिलकर जोरदार संगीत तैयार किया। हरे रामा हरे कृष्णा (1971), जवानी दीवानी (1972), प्रोसेशन ऑफ मेमोरीज (1973), और हम किसी से कम नहीं (1977) जैसी उनकी सबसे बड़ी हिट फिल्में थीं।

    इसके अलावा एक्टेस को कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। साल 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। साल 2000 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला। इसके अलावा सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के तौर पर उन्हें 7 फिल्मफेयर पुरस्कार दिए जा चुके हैं। 

    एन्टरप्रेन्योर भी हैं आशा

    इसके अलावा आशा एक एन्टरप्रेन्योर के तौर पर भी जानी जाती हैं। संगीत के अलावा आशा जी को कुकिंग से प्यार था। उन्होंने खुद कहा था कि 'अगर वो गायिका न होतीं तो एक सेफ (chef) होतीं'। उन्होंने 'Asha’s' नाम से एक अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट चेन की स्थापना की। इसकी शुरुआत 2002 में दुबई के WAFI City Mall से हुई थी और अब इसके आउटलेट मध्य पूर्व (कुवैत, बहरीन) और यूके (बर्मिंघम, मैनचेस्टर) में हैं।  इसके अलावा वो रियलिटी शो में जज के रूप में भी नजर आ चुकी हैं।

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