"मैंने चेक लौटाए, फिल्में छोड़ी...", Daldal एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर को क्यों अचानक लगने लगा था खालीपन?
एक लंबे समय तक फिल्मी पर्दे से दूर रहने के बाद एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने अमेजन प्राइम वीडियो (Prime Video) की साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर सीरीज 'दलदल' से ...और पढ़ें

दलदल एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने बताई फिल्मों से दूरी की वजह/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रियंका सिंह, मुंबई। कई दमदार भूमिकाएं कर चुकीं अभिनेत्री भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) अमेजन प्राइम वीडियो पर आज रिलीज वेब सीरीज 'दलदल' (Daldal) में दमदार पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं। भूमि ने कुछ समय पहले अभिनय से ब्रेक लिया था। उन्होंने उस ब्रेक, ट्रोलिंग, इंडस्ट्री की नकारात्मकता और महिला प्रधान कहानियों पर खुलकर बातचीत की।
आपने औसत दर्जे के काम से बचने के लिए ब्रेक लिया, कुछ फर्क पड़ा था?
हां, अब मैं पूरी ऊर्जा के साथ लौटी हूं। ब्रेक से पहले मुझे वाकई लग रहा था कि मैं औसत दर्जे के काम की तरफ बढ़ रही हूं। एक खालीपन महसूस होने लग गया था। बतौर अभिनेत्री मैं कहीं रुक गई थी। सेट पर कैमरे के सामने आने की चाहत खत्म हो रही थी। एक कलाकार के लिए ब्रेक लेना काफी फायदेमंद होता है। अगर आप जीवन का अनुभव नहीं लेंगे तो अपनी कला में क्या डालेंगे।
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अभिनेत्री बनने से पहले मैंने जीवन का इतना अनुभव लिया था कि मेरे पास अपने पात्रों को देने के लिए काफी कुछ था। आगे दो-तीन दशक तक काम करने के लिए मुझे और अनुभवों की आवश्यकता महसूस हुई। इसलिए मैंने सोचा कि आठ-दस महीने स्वयं को देने चाहिए। मैंने कई फिल्में छोड़ीं, चेक लौटाए, क्योंकि लोग मेरा इंतजार नहीं कर सकते थे।
आपने इसके बारे में बात क्यों नहीं की?
इसलिए, क्योंकि ये सब मेरे लिए कोई पीआर न्यूज नहीं थी। यह स्वयं को दोबारा गढ़ने का समय था। अपने काम की ओर पूरी ईमानदारी से लौटने का समय था। मैंने इसलिए इंटरनेट मीडिया पर कुछ भी पोस्ट नहीं किया, कोई खबरें नहीं बनने दीं। चुपचाप अपनी जिंदगी के साथ आगे बढ़ी।
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दलदल में आपका पात्र अपने साथ पुराना ट्रॉमा लेकर चल रहा है। क्या यह आपके लिए थका देने वाला प्रोजेक्ट रहा?
हां, मैं भावनात्मक तौर पर थक गई थी। कलाकार काम से आसानी से स्विच ऑन-ऑफ कर लेता है। हालांकि, मुझे ऐसा नहीं करना पड़ा, क्योंकि मुंबई में शूटिंग थी तो मैं घर पर थी। घर का गरम खाना और मां के हाथ की रोटी मिल रही थी। आखिरी दिन मैंने सबको कहा था कि टाटा, बाय-बाय अब कुछ दिनों बाद मिलेंगे। तब तक मैं भीतर से खत्म हो चुकी थी।
शो में आपका मन करता है कि बकवास करने वालों का मुंह बंद कर दें। वास्तविक जीवन में ऐसा कब होता है?
दिन में अनेक बार, इंटरनेट मीडिया पर भी कई बार आपके बारे में बहुत खराब लिख दिया जाता है। मैं जानती हूं कि ट्रोलिंग करने वालों के पास अपना घर चलाने का यही माध्यम है। वे सही हैं या गलत, मुझे नहीं पता। पब्लिक प्लेटफार्म पर वह जो चाहे बोल सकते हैं, लेकिन थोड़े दयालु बनें। कहने का एक तरीका ढूंढ़ें, क्योंकि किसी को डराना और मजाक बनाना सही नहीं है। वे भूल जाते हैं कि सामने एक इंसान है। अभिनय अच्छा नहीं लगा तो बिल्कुल कहिए, लेकिन इतने क्रूर न हो जाएं कि किसी का दिल दुखे।
रचनात्मक आलोचनाओं और ट्रोलिंग के बीच बहुत पतली रेखा होती है। अपनी राय बताइए, लेकिन प्यार से। इंटरनेट मीडिया पर जो अनजान लोग ये कर रहे हैं, उनकी भी तो अपनी निजी जिंदगी में कई चीजें होंगी। जो दूसरों को उनके गलत निर्णयों के लिए ट्रोल करते हैं, वे भी तो कभी न कभी गलत निर्णय लेते होंगे।
इन दिनों काफी नकारात्मक पब्लिसिटी हो रही है, जहां अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताने की बजाय दूसरे को नीचा दिखाया जा रहा है। इस तरीके को कितना डरावना मानती हैं?
हां, यह बहुत ज्यादा हो रहा है। मैं तो यही उम्मीद करती हूं कि हमारी इंडस्ट्री में एकता हो। सबको मिलकर इस नकारात्मकता को रोकना होगा। नकारात्मक प्रचार से हम फिल्मों को खत्म कर रहे हैं। रिलीज से पहले किसी फिल्म को लेकर इतना बुरा कहेंगे तो वह शुक्रवार से आगे बढ़ ही नहीं पाएगी। इंटरनेट मीडिया आज के दौर में शाश्वत सत्य बन गया है। जो इंटरनेट पर ट्रेंड करता है, लोगों को लगता है कि वह सच्चाई है, जबकि वह सच के आसपास भी नहीं होता। उसे पैसे देकर बनाया जाता है। यह बात लगभग वो हर कोई जानता है। जो ऐसा कर रहा है, लिख रहा है या बना रहा है।
मर्दानी 3 फिल्म और दलदल दोनों एक ही दिन रिलीज हो रही हैं। आप और रानी मुखर्जी दोनों पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं...
वह मेरी पसंदीदा अभिनेत्री हैं। मुझे याद है, जब पहली मर्दानी फिल्म शुरू हुई थी, उसी दौरान मुझे दम लगाके हइशा फिल्म मिली थी। मैं उस फिल्म की पहली स्क्रिप्ट रीडिंग का हिस्सा थी। रानी मैम मुझे तबसे जानती हैं, क्योंकि मैंने उस दौरान यशराज फिल्म्स में कई फिल्मों की कास्टिंग की थी। वह मेरी हिम्मत बढ़ाती थीं। एक महिला प्रधान फिल्म की फ्रेंचाइजी बने, ऐसा होता नहीं है। ऐसे में उनकी सराहना बनती है। यही कामना है कि मर्दानी 3 बड़ी हिट हो ताकि और महिला प्रधान कहानियों को सिनेमाघरों में आने का मौका मिले।
क्या कोई ऐसा पात्र इससे पहले रहा, जिसके बारे में लगा हो कि नहीं कर पाऊंगी?
हां, फिल्म सांड की आंख में जब अपनी उम्र से बड़ा रोल किया था। मैंने उसमें चंद्रो (चंद्रो तोमर) दादी की भूमिका निभाई थी। उन्होंने इतना कुछ हासिल किया था, उसे ढंग से कर पाऊंगी या नहीं इसको लेकर मैं डरी हुई थी।