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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 05, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    BR Chopra Death Anniversary: करोड़ों में बनी थी बी आर चोपड़ा की 'महाभारत', ये न होता, द्रौपदी बनतीं जूही चावला

    By Karishma LalwaniEdited By: Karishma Lalwani
    Updated: Sun, 05 Nov 2023 10:22 AM (GMT+05:30)

    बॉलीवुड में एक समय ऐसा था जब बेहतरीन निर्देशन और दमदार अभिनय से फिल्में लंबे समय तक सफलता की सीढ़ियां चढ़ती थीं। ब्लैक एंड व्हाइट जमाने के उसे दौर में ...और पढ़ें

    BR Chopra Death Anniversaty check about his films mahabharat casting and awards
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    HighLights

    1. मशहूर फिल्म निर्माता थे बीआर चोपड़ा
    2. आज है उनकी 15वीं डेथ एनिवर्सरी
    3. बी आर चपड़ा ने बनाई थी महाभारत

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 21वीं सदी के इस जमाने में अनेकों 'महाभारत' शो बने। चेहरे बदले, लेकिन किरदार वही रहे। बात जब भी महाभारत की होती है, तो इस ऐतिहासिक शो की कहानी को छोटे पर्दे पर उतरने वाले बलदेव राज चोपड़ा (बी आर चोपड़ा) का जिक्र जरूर होता है।

    आज है बी आर चोपड़ा की डेथ एनिवर्सरी

    बी आर चोपड़ा ने महाभारत की कहानी को कुछ इस तरह दिखाया की फिर कभी किरदारों का वैसा जादू दूसरी पौराणिक कहानियों में नहीं देखने को मिला। हालांकि, बी आर चोपड़ा सिर्फ 'महाभारत' के लिए नहीं जाने जाते हैं। उन्होंने कुछ मशहूर फिल्में भी बनाई थीं, जिसने समाज को पारिवारिक और साफ सुथरी कहानियां परोसी‌ं। आज 5 नवंबर को बी आर चोपड़ा की डेथ एनिवर्सरी है।

    बी आर चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल, 1914 में पंजाब के लुधियाना में हुआ था। उन्होंने लाहौर के मशहूर विश्वविद्यालय से इंग्लिश में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद बी आर चोपड़ा ने हेराल्ड नाम की मैगजीन में बतौर फिल्मी पत्रकार काम किया।

    पहली फिल्म और विभाजन

    1947 तक बी आर चोपड़ा ने सिने हेराल्ड में काम करने के दौरान उन्होंने फिल्म 'चांदनी चौक' बनाना शुरू किया। इस फिल्म की अभी शुरुआत हुई ही थी कि इस दौरान लाहौर में दंगे हो गए। इसके बाद 1947 में विभाजन के बाद वह और उनके परिवार भारत में मुंबई में आकर बस गया। फिल्मों के शौकीन बी आर चोपड़ा का प्यार चकाचौंध की दुनिया के लिए यहां पर आकर भी कम नहीं हुआ।

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    इंडिया आकर बॉलीवुड में आजमाई किस्मत

    'चांदनी चौक' तो धरी रह गई। इसके बाद इंडिया आकर बी आर चोपड़ा ने 1948 में पहली मूवी 'करवट' का निर्माण किया। हालांकि बी आर चोपड़ा को इंडस्ट्री में अभी तक पहचान नहीं मिली थी क्योंकि यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी। बीआर चोपड़ा द्वारा प्रोड्यूस की गई हिट फिल्म 'अफसाना' थी, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

    अपने प्रोडक्शन में बनाई यह फिल्में

    1955 में बीआर चोपड़ा ने खुद का प्रोडक्शन हाउस बी आर फिल्म्स शुरू किया। इस बैनर में पहली फिल्म 'नया दौर' बनी थी, जिससे बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक रिस्पांस मिलने के साथ ही दिलीप कुमार और वैजयंती माला की जोड़ी भी हिट हो गई थी। इसके बाद गुमराह, साधना, कानून जैसी तमाम सुपरहिट फिल्में इस बैनर के तले बनाई गईं।

    'महाभारत' ने चमकाई किस्मत

    टेलीविजन की दुनिया में भी बी आर चोपड़ा का योगदान अहम रहा है। फिल्म प्रोडक्शन से उन्हें इंडस्ट्री में पहचान तो मिल गई थी, उनके सफल नाम के आगे सबसे ज्यादा 'महाभारत' को जोड़कर देखा गया है।

    9 करोड़ में बनाई थी 'महाभारत'

    यह सीरियल उस दौर में बनाया गया था, जब इसकी लागत करीब 9 करोड रुपए थी। जहां बी आर चोपड़ा ने शो के प्रोडक्शन की जिम्मेदारी संभाली, तो वहीं उनके बेटे रवि चोपड़ा ने सीरियल को डायरेक्ट किया था। 1988 में शुरू हुए इस शो की बराबरी नहीं कर सका।

    द्रौपदी के लिए पहली पसंद थी यह एक्ट्रेस

    द्रौपदी 'महाभारत' का मुख्य किरदार है। बी आर चोपड़ा की महाभारत में रूपा गांगुली ने निभाया था। लेकिन रूपा इसके लिए पहली पसंद नहीं थीं। कहा जाता है कि बी आर, जूही चावला को द्रौपदी बनाना चाहते थे। इसके लिए एक्ट्रेस से बात भी की गई थी। लेकिन तब उनकी फिल्म 'कयामत से कयामत तक' रिलीज हो गई थी। ऐसे में जूही ने टीवी का रुख न करना सही समझा।

    अमिताभ बच्चन संग बनाई आखिरी फिल्म

    बी आर चोपड़ा की आखिरी फिल्म 'भूतनाथ' थी। अमिताभ बच्चन के करियर की सुपरहिट फिल्मों में से एक इस मूवी के निर्माता भी वही थे। 5 नवंबर, 2008 को उनका 94 की उम्र में निधन हो गया।

    फिल्मों में बेहतरीन योगदान के लिए मिले थे यह अवार्ड्स

    • फिल्मफेयर पुरस्कार- सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (कानून)
    • दादासाहेब फाल्के पुरस्कार- 1998
    • अप्सरा पुरस्कार- सर्वश्रेष्ठ कॉन्ट्रिब्यूशन टू इंडियन सिनेमा
    • पद्म भूषण- 2001
    • राष्ट्रीय रजत पदक - 1961 (धर्मपुत्र)
    • फिल्मफेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ निदेशक- 1962

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