थिएटर्स के बाद OTT पर धाक जमाएंगे सूरज बड़जात्या, अपकमिंग वेब सीरीज को लेकर निर्देशक की दो टूक
निर्देशक सूरज बड़जात्या अब बड़े पर्दे के अलावा ओटीटी पर अपना कमाल दिखाने जा रहे हैं। अपनी वेब सीरीज संगमरमर को लेकर डायरेक्टर ने हाल ही में दैनिक जागर ...और पढ़ें
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सूरज बड़जात्या की वेब सीरीज (फोटो क्रेडिट- एक्स)
HighLights
वेब सीरीज संगमरमर ला रहे हैं सूरज बड़जात्या
इस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर होगी स्ट्रीम
संगमरमर को लेकर खुलकर बोले डायरेक्टर
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई। ‘मैंने प्यार किया’ से लेकर ‘हम आपके हैं कौन’ समेत कई फिल्मों में प्यार और परिवार की अलग-अलग कहानियां लाने वाले फिल्मकार सूरज बड़जात्या अब वेब शो संगमरमर लेकर आ रहे हैं। 26 फरवरी से जियो हॉटस्टार पर प्रदर्शित होने जा रहे इस वेब शो के वह निर्माता हैं। आयुष्मान खुराना के साथ फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ बना रहे सूरज से उनके शो और पेशेवर सफर पर बातचीत:
वेब शो की नायिका की तरह क्या आपको भी कभी व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के बीच कोई एक चुनना पड़ा है?
ऐसे मौके तो सभी की जिंदगी में आते हैं। हम सभी को कभी न कभी चुनना पड़ता है कि आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं। एक तरफ आपका परिवार है, दूसरी तरफ करियर, तीसरी तरफ आपके निर्णय होते हैं। बतौर फिल्मकार, जब हम कोई प्रोजेक्ट लेते हैं, तो दो-ढाई वर्षों के लिए उस फिल्म की दुनिया ही असली बन जाती है और बाकी चीजें पराई हो जाती हैं।
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मेरे साथ ऐसा हो हो चुका है। नायिका अमृता व आदित्य को भी इश्क और फर्ज के बीच किसी एक का चुनाव करना पड़ता है। यह स्त्री-पुरुष समानता की कहानी है।
कुछ लोग इस शो को फिल्म एक विवाह ऐसा भी से प्रेरित बता रहे हैं..
इस शो की कहानी वैसी नहीं है। हमारे आस-पास सात-आठ तरह की कहानियां होती हैं। उनमें से कहीं न कहीं, कई जिंदगी एक ही चक्कर में घूमती दिखती हैं। शो में नया नजरिया दिखाया है, यह आज की कहानी है, जो 1988 से लेकर 2026 तक चलती है। ऐसी कहानी हमारी किसी फिल्म की नहीं रही है।

कोरोना काल के बाद कहा गया कि बड़े पर्दे पर सिर्फ भव्य फिल्में ही चलेंगी। तब आपके मन में रोमांटिक और पारिवारिक ड्रामा फिल्मों को लेकर सवाल नहीं उठे?
बदलते दौर के साथ ऐसे सवाल दिमाग में आते हैं। मैंने समय के हिसाब से चलने के लिए कुछ नए प्रयोग किए भी, लेकिन वो सफल नहीं हुए। अंततः मैंने समझा कि दुनिया कहां जा रही है उस पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन इस बात में स्पष्ट होना जरूरी है कि आप क्या बनाना चाहते हैं।
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बड़े पर्दे पर पारिवारिक कहानियों का महत्व कितना है, इन्हें बनाने में बड़ी चुनौती क्या है?
मेरे पास अपनी पसंद के प्रोजेक्ट बनाने की आजादी है, तो ट्रेंड की चिंता नहीं करता, लेकिन पारिवारिक कहानियों में मनोरंजन जरूरी है। नीरसता दर्शक नहीं स्वीकारते। आज विकल्प बहुत हैं, इसलिए मैं चाहता हूं ज्यादा पारिवारिक और प्रेम कहानियां बनें जो लोगों को साथ लाएं। सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ना है। उन्हें हंसा या रुला पाना ही असली सफलता है।
आपके नायकों के नाम प्रेम रहे हैं। इसकी शुरुआत मैंने प्यार किया से हुई या उससे पहले कहीं भूमिका बनी थी?
मैंने प्यार किया की स्क्रिप्ट लिखते समय हीरो के लिए कई नाम हमारे दिमाग में आए। मेरे दादा (ताराचंद बड़जात्या) के प्रोडक्शन में बनी हिट फिल्म दुल्हन वही जो पिया मन भाये में हीरो का नाम प्रेम था और अभिनेता प्रेम किशन जी थे। मैंने भी हीरो का नाम इस आशा में प्रेम रख दिया कि शायद कोई गुड लक ही मिल जाए। यहीं से प्रेम नाम शुरू हुआ।
क्या कोई ऐसी फिल्म रही जो उम्मीदों के अनुसार नहीं चल पाई हो?
हमारे पेशे की खूबसूरत बात यही है कि कोई यह तय नहीं कर सकता कि दर्शकों को कौन-सा किरदार या कौन-सा हिस्सा पसंद आएगा। 40 साल के करियर में मैंने कई बार सोचा कि अमुक सीन या गाना हिट होगा, लेकिन दर्शकों ने कुछ और ही पसंद किया। जिस फिल्म के चलने की उम्मीद थी, वह नहीं चली और कोई दूसरी सफल हो गई। इसलिए हमारे हाथ में सिर्फ इतना है कि हम अपना सर्वश्रेष्ठ दें। काम के प्रति ईमानदारी और मेहनत में कोई कमी न रहे। यही सबसे अहम है।
आपकी फिल्मों की नायिकाएं हमेशा से सशक्त और खुलकर अपने विचार रखने वाली होती हैं। इसकी प्रेरणा कहां से मिली?
मैंने कभी ऐसा सोचकर नहीं लिखा कि मेरी नायिका बहुत सशक्त होगी। राजश्री प्रोडक्शन की सभी कहानियां भारतीय संस्कृति पर आधारित होती हैं। जहां आप भारतीय नारियों की बात करते हैं, वहां शक्ति अपने आप आती है। वही शक्ति हमें अहसास कराती है कि हमारा घर और परिवार सुरक्षित हाथों में है।