40 के दशक की सुपरस्टार थीं इमरान हाशमी की दादी, कर्ज चुकाने के लिए बेचना पड़ा था बंगला, कहानी पूर्णिमा की
40 के दशक में एक ऐसी एक्ट्रेस आईं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में आते ही तहलका मचा दिया। ये नाम कोई ...और पढ़ें

40 के दशक में सुपरस्टार थीं इमरान हाशमी की दादी

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक दौर वो था जब सादगी की खूबसूरती का सबसे बड़ा गहना थी। उस दौर में अभिनेत्रियां पर्दे पर आते ही जादू कर देती थीं। उनकी सादगी हर किसी की दिल जीत ले जाती थी। आज हम बात कर रहे हैं 40 के दशक की उस हसीन अदाकारा की, जो न सिर्फ अपने दौर की टॉप एक्ट्रेस थीं, बल्कि महेश भट्ट की सगी मौसी और इमरान हाशमी की सगी दादी भी थीं। आज जानते हैं उन्हीं की कहानी...
सिनेमा में ऐसे आईं इमरान हाशमी की दादी
आज जिस एक्ट्रेस की हम बात कर रहे हैं उनका नाम था पूर्णिमा दास वर्मा। हालांकि असल में उनका नाम मेहरबानो मोहम्मद अली था। जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा, तो उन्हें 'पूर्णिमा' नाम दिया गया। पूर्णिमा, आलिया भट्ट के पापा महेश भट्ट की सगी मौसी थीं यानि आलिया की दादी शिरीन मोहम्मद अली की बहन थीं पूर्णिमा।
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पूर्णिमा के पिता खुद एक हिंदू थे, उन्होंने कीकूभाई देसाई की फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में असिस्टेंट के तौर पर काम किया। पूर्णिमा की मां एक मुस्लिम थीं और उनका ताल्लुक लखनऊ से था। जिस दौर में पूर्णिमा फिल्मों में आईं, तो उस दौर में हीरोइनें फिल्मों में ज्यादा काम नहीं करती थीं लेकिन पूर्णिमा को फिल्मों में उनकी बहन लेकर आईं।
पूर्णिमा को फिल्मी माहौल परिवार से मिल गया था। पूर्णिमा ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म 'ठेस' से की। हालांकि पूर्णिमा को बड़ी सफलता फिल्म 'पतंगा' (1949) से मिली।
कई फिल्मों में नजर आईं पूर्णिमा
यूं तो पूर्णिमा के खाते में ज्यादा बड़ी फिल्में नहीं थीं , लेकिन हां वो सिनेमा का हिस्सा रहीं और उस दौर में कुछ फिल्में उन्होंने ऐसी कीं, जो खूब हिट रहीं। उन्होंने 'जोगन' (1950), 'सगाई' (1951), 'जाल' (1952) और 'औरत' (1953) जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया।
उस दौर में पूर्णिमा को उनकी कातिल मुस्कान और एक्सप्रेसिव आंखों के लिए जाना जाता था। उन्होंने उस समय के लगभग सभी बड़े सितारों जैसे अशोक कुमार, दिलीप कुमार, देव आनंद जैसे कई स्टार्स के साथ काम किया। यहां तक कि उन्होंने फिल्म जंजीर में अमिताभ बच्चन की मां का किरदार भी निभाया था।

निजी जीवन में कीं दो शादियां
पूर्णिमा का असली नाम मेहरबानो ही था। उन्होंने पहली शादी शौकत हाशमी से की थी। शौकत हाशमी एक पत्रकार थे। शादी के बाद उन्होंने अपना नाम मेहरबानो मोहम्मद अली कर लिया था। बाद में पूर्णिमा ने बेटे सैयद अनवर हाशमी को जन्म दिया। ये वही अनवर हाशमी हैं जिनके बेटे इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) हैं और इस तरह से इमरान की दादी मेहरबानो उर्फ पूर्णिमा थीं।
हालांकि शौकत के साथ मेहरबानो (पूर्णिमा) की शादी ज्यादा लंबी नहीं चली। आखिरकार में दोनों का तलाक हो गया और इसी बीच विभाजन के बाद शौकत पाकिस्तान चले गए और वहीं जाकर बस गए। इधर पूर्णिमा ने दूसरी शादी फिल्म प्रोड्यूसर भगवानदास वर्मा से कर ली। फिर शादी के बाद पूर्णिमा से पूर्णिमा दास वर्मा हो गईं।
आर्थिक तंगी का किया सामना
पूर्णिमा (Purnima) ने लगभग 80 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, लेकिन करियर के आखिरी पड़ाव में वो चकाचौंध से दूर हो गईं। हालांकि उनके जीवन में एक दौर ऐसा भी आया, जब उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि मुश्किल हालात इस कदर हुए कि उन्हें अपना अपना बंगला तक बेचना पड़ा।
खुद एक इंटरव्यू में पूर्णिमा (Purnima Das Verma) ने इसका जिक्र किया था। दरअसल कहा जाता है कि शादी के बाद पूर्णिमा के पति और प्रोड्यूसर भगवान दास वर्मा की कुछ फिल्में फ्लॉप हो गईं थीं। इसके बाद उनके जीवन में पैसों की तंगी आई और उन्होंने अपना बंगला बेचना पड़ा था।
पूर्णिमा ने 40 और 50 के दशक में कई हिट फिल्मों में काम किया। वो आईं, अपना नाम बनाया और सिनेमा को अनगिनत यादें दे गईं। आखिरकार साल 2013 में पूर्णिमा का निधन हो गया।
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