सेफ खेल रहा है सिनेमा... Taskaree की रिलीज के बाद इंडस्ट्री को लेकर इमरान हाशमी की दो टूक
वेब सीरीज तस्करी को लेकर अभिनेता इमरान हाशमी का नाम इस वक्त लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। इस बीच इमरान ने हाल ही में दैनिक जागरण संग खास बातचीत में सि ...और पढ़ें
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बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी (फोटो क्रेडिट- एक्स)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी अपने बेबाक अंदाज के लिए काफी जाने जाते हैं। हाल ही में तस्करी वेब सीरीज स्टार ने दैनिक जागरण संग खास बातचीत में इंडस्ट्री को लेकर खुलकर चर्चा की है।
आपके पास अक्सर ऐसे जटिल रोल आ रहे हैं, जिसे चुनना किसी भी कलाकार के लिए आसान नहीं। पहले हक फिल्म की, अब कस्टम अधिकारी बने हैं?
हक के मुकाबले तस्करी सीरीज को चुनना आसान रहा। हर कलाकार अपना अलग काम दिखाना चाहता है। ऐसे में वह जरूर ऐसे पात्र निभाना चाहेगा, जो लोगों ने पहले नहीं देखा हो। हां, हक फिल्म को मैं कठिन चुनाव मानता हूं। फिल्म देखकर लोगों ने यही कहा कि यह तो जोखिम भरा पात्र है, लेकिन मैंने उसमें मेरिट देखी। अब लोग (निर्माता) सिनेमाघरों में सुरक्षित दांव खेलना चाहते हैं। एक बोल्ड फिल्म जब आती है, तो फिर बातें शुरू होती हैं। हालांकि हक फिल्म ऐसी है कि लोग आज से पांच-दस साल बाद भी देखेंगे।
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आपने ऐसा क्यों कहा कि सिनेमा में सेफ खेला जा रहा है?
लोग अब डर गए हैं। थिएटर के बिजनेस में जब आपका ग्राफ सिकुड़ता जाए, तो लोग (निर्माता) और भी डर जाते हैं। हालांकि होना इसके विपरीत चाहिए। आप जितना जोखिम लेंगे, ट्रेंड्स को फालो नहीं करेंगे, उतना ही आपकी फिल्में बाक्स आफिस पर चलेंगी, लेकिन हर कोई रिवर्स इंजीनियरिंग कर रहा है। वह हिट का फार्मूला ढूंढ रहे हैं।

तो क्या जोखिम लेने वाले पात्र करते रहेंगे?
हां, जोखिम लेने की आदत अंदरूनी है। मेरा स्वभाव है। मैं यह नहीं सोचता हूं कि दर्शक क्या महसूस करते हैं या फलां चीज अच्छी चल रही है, तो वही कर लो। मैं हमेशा अपने काम में वह नयापन रखूंगा।
तस्करी शो को करने का सबसे बड़ा कारण क्या रहा?
यही कि कस्टम अफसरों पर न तो कोई फिल्म बनी है, न शो। जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़नी शुरू की, तो पता चला कि यह इतनी अनोखी दुनिया है। कई दिलचस्प पहलू है, जिस तरह से स्मगलिंग की जाती है, उसके बारे में देखा सुना है, अखबारों में पढ़ा है, लेकिन पता नहीं है कि वाकई में तस्करी कैसे होती है।
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आपके साथ पहले सीरियल किसर का टैग जुड़ा। अब बैड्स ऑफ बालीवुड सीरीज के बाद जहां आप जाते हैं लोग कहते हैं कि अक्खा बालीवुड एक तरफ इमरान हाशमी एक तरफ। इतना अटेंशन डराता नहीं है?
मैं खुद को ऐसे अंटेशन से अलग रखता हूं। मैंने अपनी दादी से सुना था, जो एक अभिनेत्री थीं कि निजी और पेशेवर जिंदगी को अलग रखना। इसलिए सफलता, असफलता जो भी मिलती है, मैं उन चक्करों में पड़ता ही नहीं हूं। यकीनन सफलता से मुझे खुशी होती है, लेकिन उसे खुद पर हावी नहीं होने देता हूं। जब सीढ़ी चढ़ रहे होते हैं, तो आप बार-बार नीचे नहीं देखते हैं। ऊपर की ओर देखते हैं, ताकि ऊंचाई तक पहुंच सकें। मैं वैसा ही हूं।
आवारापन 2 और गन मास्टर जी9 फिल्मों में क्या आपका पुराना अंदाज होगा? अगर हां, तो नयापन कैसे आएगा?
ऐसा लोगों को लग रहा है। वही सात प्रकार की कहानियां होती हैं, जिसे नया स्पिन दिया जाता है। हां, दौर वही है, प्रेम कहानियां वैसी ही होती हैं। आवारापन की तरह इसमें भी पांच-छह गाने हैं, आक्रोश वाली प्रेम कहानी है। गन मास्टर जी9 भी दिलचस्प मसाला फिल्म है।
इन दिनों थिएटर में रिलीज कौन सी फिल्में आपको जोखिम भरी लगीं?
जोखिम वाली कहानियों के लिए आपको वर्षों तक बैठकर लेखन का काम करना होता है, ताकि आप कुछ नया लेकर आएं। इसलिए संदीप रेड्डी वांगा की फिल्में पसंद की जाती हैं या धुरंधर फिल्म चल जाती है। धुरंधर भी एक जोखिम भरा दांव था। साढ़े तीन घंटे की फिल्म थी। मुझे लगता है कि जोखिम वही है कि आप फ्रंट फुट पर आकर खेले और वह दिखाए जो लोगों ने नहीं देखा है।