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    बिहारियों के भौकाल ने जब हिलाया बॉक्स ऑफिस, क्राइम-राजनीति और संघर्षों को दिखाती हैं ये 7 कल्ट क्लासिक फिल्में

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 03:01 PM (IST)

    बिहार की राजनीति की बात हो या वहां पर होने वाले अपराध और एजुकेशन सिस्टम की बात, अलग-अलग मुद्दों पर अक्सर फिल्में बनती आई हैं। इन 7 कल्ट फिल्मों में बि ...और पढ़ें

    बिहार की पृष्ठभूमि पर बनी 7 बॉलीवुड फिल्में/ फोटो- Imdb

    बिहार की पृष्ठभूमि पर बनी 7 बॉलीवुड फिल्में/ फोटो- Imdb

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    संक्षेप में पढ़ें

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'एक बिहारी सब पर भारी' ये वन लाइनर आपने कई बार आपने सुना होगा। वह जहां जाते हैं उनका अलग अंदाज सभी का दिल जीत लेता है। पढ़ाई में अव्वल नंबर लाने हो, या फिर बदमाशी में झंडे गाढ़ने की बात हो, बिहार के चर्चे अक्सर किसी न किसी की जुबानी सुनने को मिलते हैं।

    बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे हैं, जो बिहार से ताल्लुक रखते हैं। जिन्होंने हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई है। हालांकि, आज हम अपने इस आर्टिकल में बिहार के सितारों की नहीं, बल्कि उन फिल्मों की बात कर रहै हैं, जिनकी कहानी बिहार के बैकड्रॉप पर बनी है।

    गैंग्स ऑफ वासेपुर

    अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की कहानी कभी बिहार का हिस्सा रहै धनबाद(झारखंड) के कोयला माफिया के संघर्षों को दर्शाती है। जिसमें पारिवार के बीच के मतभेद, राजनीति और रिवेंज को बड़ी ही खूबसूरती से फिल्म में उतारा गया है। जिसमें एक के बाद एक जनरेशन अपने पिता की मौत का बदला लेती है। फिल्म में मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, हुमा कुरैशी और ऋचा चड्ढा जैसे सितारों ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

    GANGS OF WASSEPUR

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    अपहरण

    साल 2005 में रिलीज हुई अजय देवगन और नाना पाटेकर की फिल्म 'अपहरण' की बिहार की पृष्ठभूमि पर बनी है, जहां एक लड़का बनना तो पुलिस ऑफिसर चाहता है, लेकिन वह किडनैपिंग की दुनिया का हिस्सा बन जाता है। प्रकाश झा के निर्देशन में बनी मूवी में क्राइम और पॉलिटिक्स के कनेक्शन को बखूबी पर्दे पर उतारा गया है।

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    परीक्षा

    साल 2020 में रिलीज हुई फिल्म 'परीक्षा' एक रिक्शा चालक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका सपना होता है कि वह अपने बच्चे को एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाए और अच्छी शिक्षा दे, लेकिन उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह फिल्म गरीब बच्चों को शिक्षा व्यवस्था को लेकर गरीबों के सामने आने वाली चुनौतियों को बखूबी बयां करता है।

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    मांझी: द माउंटेन मैन

    साल 2015 में रिलीज हुई 'मांझी: द माउंटेन मैन' गया (बिहार) के रहने वाले दशरथ मांझी की असली कहानी है, जो पत्नी का समय पर इलाज न होने के कारण उसके निधन से काफी टूट जाया है। वह ये संकल्प लेता है कि वह इस तरह की दिक्कत किसी को नहीं आने देगा, जिसके कारण वह 22 साल तक लगातार छेन्नी और हथोड़े से पहाड़ों पर 360 फूट लंबा रास्ता बनाता है।

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    आरक्षण

    प्रकाश झा ने अपने फिल्मी करियर में बिहार की पृष्ठभूमि पर बनी कई फिल्में बनाई हैं। उन्होंने साल 2011 में फिल्म 'आरक्षण' बनाई थी, जिसमें यह दिखाया गया था कि कैसे कास्ट के आधार पर उन्हें एजुकेशन मुहैया करवाई जाती है। शिक्षा में जाति आधारित आरक्षण और छात्रों, शिक्षकों और समाज पर उनके प्रभाव को दिखाती है। इस फिल्म का थीम बिहार युवाओं के कहीं न कहीं कनेक्टेड है।

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    गंगाजल

    इस फिल्म की कहानी एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर की है, जिसकी पोस्टिंग बिहार के एक ऐसे जिले में होती है, जहां कानून की कोई वैल्यू नहीं है और उस डिस्ट्रिक में पूरी तरह से क्रिमिनल और पॉलिटिक्स का राज है। वह ईमानदार पुलिस ऑफिसर खुद की मनमानी करने वाले और क्राइम की दुनिया के बेताज बादशाहों से लड़ता है। यह फिल्म असली कहानी से इंस्पायर है। मूवी का निर्देशन प्रकाश झा ने किया है।

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    शूल

    मनोज बाजपेयी स्टारर फिल्म साल 1999 में रिलीज हुई थी, जिसमें बिहार की राजनीति और अपराध का गठजोड़ किस तरह से एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर की जिंदगी को नरक बना देता है, इसे बड़ी ही खूबसूरती के साथ मेकर्स ने बड़े पर्दे पर उतारा है। इस मूवी के निर्देशन की कमान राम गोपाल वर्मो ने संभाली थी।

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