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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 21, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Anuparna Roy: 'ये मेरी कहानी है,' 82वें वेनिस फिल्म फेस्टिवल में इतिहास रचने के बाद अनुपर्णा राय की दो टूक

Published: Sun, 21 Sep 2025 12:56 PM (GMT+05:30)Updated: Sun, 21 Sep 2025 12:57 PM (GMT+05:30)

82वें वेनिस फिल्म समारोह में ओरिजोंटी श्रेणी के तहत फिल्म ‘सांग्स ऑफ फॉरगॉटन ट्रीज’ के लिए अनुपर्णा राय (Anuparna Roy) ...और पढ़ें

भारतीय फिल्ममेकर अनुपर्णा रॉय (फोटो क्रेडिट- एक्स)
भारतीय फिल्ममेकर अनुपर्णा रॉय (फोटो क्रेडिट- एक्स)

HighLights

  1. अनुपर्णा राय ने जीता VIFF 2025
  2. सफलाता के बाद फिल्ममेकर का बयान
  3. इस मूवी के लिए मिला इंटरनेशनल सम्मान

 स्मिता श्रीवास्तव ,मुंबई: कहते हैं कि भविष्य उन्हीं का होता है जो अपने सपनों में विश्वास करते हैं। यह साबित किया नवोदित फिल्ममेकर अनुपर्णा राय ने गत 7 सितंबर को अनुपर्णा ने 82वें वेनिस फिल्म समारोह में उस समय इतिहास रच दिया जब बीते जमाने और बिछड़े दोस्तों की यादों से सराबोर उनकी फिल्म ‘सांग्स ऑफ फॉरगॉटन ट्रीज’ को ओरिजोंटी श्रेणी के तहत सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

यह पुरस्कार जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला बनीं। इसके साथ ही सत्यजित राय, बुद्धदेव दासगुप्ता, मीरा नायर और चैतन्य तम्हाणे के बाद एिशया महाद्वीप से दुनिया के सबसे पुराने फिल्म समारोह से ट्राफी घर लाने वाली पांचवीं निर्देशक बन गई हैं।

हसरतें लें आईं सपनों के शहर में

मध्यमवर्गीय, गैरफिल्मी पृष्ठभूमि से आने वाली अनुपर्णा का फिल्ममेकर बनना न केवल दुर्लभ था, बल्कि अनसुना भी था। बचपन में लिंग भेद का सामना करने के बावजूद उन्होंने सपनों की जिंदगी जीने का साहस किया। अनुपर्णा बताती हैं, ‘मैं ऐसे गांव से हूं जहां लड़कियों की शादी जल्दी कर दी जाती है,

फोटो क्रेडिट- एक्स

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सरकारी शिक्षण संस्थानों में किताबों की बजाय उन्हें राशन दिया जाता है। यही नहीं पिता मजाक उड़ाते थे कि क्या तुम सत्यजित राय बनोगी? तो मेरा जवाब होता था कि भले ही मैं उनके जैसी महान फिल्मकार नहीं बन सकतीं, लेकिन फिल्मों में काम करना नहीं छोड़ूगी।’

दादी से अनुपर्णा को मिली प्रेरणा

अनुपर्णा ने खुद को साबित भी किया। अनुपर्णा की दादी उन्हें नदी की कहानी सुनाती थीं। मगर उन्होंने स्वयं कभी नदी देखी नहीं थी। इसी से प्रेरित होकर अनुपर्णा ने साल 2023 में शार्ट फिल्म ‘रन टू द रिवर’ बनाई। यह उनकी दादी की जिंदगी पर आधारित ब्रिटिश- शासित बंगाल की कहानी थी!कहनी हैं अपनी ढेरों कहानियां अनुपर्णा राय को‘सांग्स आफ फारगाटन ट्रीज’ की प्रेरणा भी घर से ही मिली। वे बताती हैं,

‘मेरी दादी की शादी नौ साल की उम्र में ही मेरे दादाजी से हो गई थी, जो 30 साल के थे। मेरी दादी को अपनी सौतेली बेटी के साथ बहुत लगाव था, वे दोनों एक ही उम्र की थीं। दादा जी के निधन के बाद बिना किसी पुरुष सदस्य के दोनों मिलकर परिवार संभालती थीं। एक इनमें नर्स थी, दूसरी घर और बच्चों की देखभाल करती थी।

दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। इसी से मिलता-जुलता विचार फिल्म की नींव बना। हालांकि इस फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने में मुझे तीन साल लगे। आगे भी मैं अपनी लिखी कई दूसरी कहानियों पर फिल्म बनाना चाहती हूं।’ अनुपर्णा ने इस फिल्म के प्रीक्वल और सीक्वल बनाने के संकेत दिए हैं।

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