बिना शराब पिए नहीं गाते थे गाना, Lata Mangeshkar करना चाहती थीं जिनसे शादी; सिनेमा के पहले 'सुपरस्टार' सिंगर की कहानी
आज इस आर्टिकल में हम उस भारतीय सिनेमा के पहले 'सुपरस्टार सिंगर' की बात कर रहे हैं, जिनकी आवाज ने लाखों दिलों को छुआ। दिग्गज सिंगर की दीवानी लता मंगेशक ...और पढ़ें
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भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार सिंगर की बर्थ एनिवर्सरी/ फोटो- Instagram

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दौर कितने भी बीत जाएं, लेकिन हिंदी सिनेमा में कई ऐसे दिग्गज सिंगर हैं, जिन्हें हर पीढ़ी के लोग सराहते हैं। जिनकी आवाज सीधा दिल को सुकून देती है, उनमें किशोर कुमार से लेकर मुकेश और मोहम्मद रफी तक कई महान सिंगर्स शामिल हैं।
इन सभी दिग्गज गायकों के आदर्श थे के.एल. सहगल (K.L. Saigal), जिन्होंने कभी भी किसी दूसरे एक्टर के लिए प्लेबैक सिंगिंग नहीं की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें भारतीय सिनेमा के पहले 'सुपरस्टार सिंगर' का टैग मिला। हालांकि, उनकी एक लत ने न सिर्फ उनकी जिंदगी पर बुरा असर डाला, बल्कि महज 42 साल की कम उम्र में फैंस से उनका फेवरेट सिंगर हमेशा के लिए छीन लिया।
रेलवे टाइमकीपर से लेकर सेल्समैन तक की नौकरी की
सिनेमा के इस सुपरस्टार सिंगर की आज 122वीं जयंती है। के.एल. सहगल का पूरा नाम कुंदन लाल सहगल था। उनका जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू के एक पंजाबी परिवार में हुआ था। पिता अमरचंद तहसीलदार थे और मां केसरबाई एक अत्यंत धार्मिक हिंदू महिला थीं, जिन्हें संगीत का बहुत शौक था। कुंदन लाल कुल पांच भाई-बहन थे।
बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि होने के कारण सहगल कभी-कभी रामलीला में भी सितार बजाते थे। पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी न होने के कारण उन्होंने बीच में ही यह छोड़ दी और रेलवे में टाइमकीपर के रूप में काम करने लगे। इसके बाद उन्होंने रेमिंगटन टाइपराइटर कंपनी में सेल्समैन के रूप में भी काम किया। इस नौकरी के दौरान उन्हें भारत के कई शहरों का दौरा करने का मौका मिला।
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दोस्त की बदौलत बन पाए संगीत की दुनिया के सुपरस्टार
एक बार जब के.एल. सहगल लाहौर गए, उसी दौरान उनकी मुलाकात मेहरचंद से हुई और दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। जब वे कलकत्ता (अब कोलकाता) गए, तो दोनों ने कई महफिल-ए-मुशायरे किए। उन दिनों सहगल एक उभरते हुए गायक थे और मेहरचंद ने उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के लिए खूब प्रोत्साहित किया। खुद सहगल ने एक बार बताया था कि मेहरचंद के प्रोत्साहन की वजह से ही वह संगीत की दुनिया में इतना बड़ा नाम बन पाए।
एक तरफ जहां दोस्त ने उनका हौसला बढ़ाया, तो वहीं दूसरी तरफ संगीतकार हरिश्चंद्र बाली उन्हें कलकत्ता लेकर आए और दिग्गज म्यूजिक डायरेक्टर आर.सी. बोराल से मिलवाया। इसके बाद बी.एन. सरकार के कलकत्ता बेस्ड स्टूडियो न्यू थिएटर्स ने उनके साथ 200 रुपये प्रति माह का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। इंडियन ग्रामोफोन कंपनी ने सहगल का पहला पंजाबी गाना रिकॉर्ड किया। दिलचस्प बात यह है कि के.एल. सहगल ने जितनी भी फिल्मों में गाने गाए, उनमें एक्टिंग भी खुद ही की थी। इसके अलावा उन्होंने 15 साल के करियर में किसी भी एक्टर के लिए गाने नहीं गाए हैं।
'देवदास' ने रातों-रात बदल दी किस्मत
'यहूदी की लड़की', 'चंडीदास' और 'रूपलेखा' जैसी कई फिल्में कर चुके के.एल. सहगल की किस्मत साल 1935 में चमकी, जब उनकी फिल्म 'देवदास' (Devdas) आई। शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के मशहूर नॉवेल पर आधारित इस फिल्म में सहगल ने मुख्य किरदार अदा किया था। फिल्म में दमदार एक्टिंग के साथ-साथ उन्होंने कई गाने भी गाए। इस मूवी का उनका गाना 'बालम आए बसो मोरे मन में' और 'दुख के अब दिन बीतत नाहीं' उस समय काफी लोकप्रिय हुआ था।
कहा जाता है कि जब साल 1934 में यंग लता मंगेशकर ने उनकी फिल्म 'चंडीदास' देखी थी, तो वह उनके अभिनय और आवाज की इस कदर दीवानी हो गई थीं कि उनसे शादी करना चाहती थीं। खुद एक इंटरव्यू में भी लता मंगेशकर ने इस बात का खुलासा किया था।

शराब की लत ने सबकुछ कर दिया तबाह
साल 1941 में के.एल. सहगल रंजीत मूवीटोन के साथ काम करने के लिए बॉम्बे (अब मुंबई) आ गए। यहां आकर उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया और अपनी आवाज का जादू बिखेरा। 'भक्त सूरदास' और 'तानसेन' उनकी हिट फिल्मों में शुमार हैं।
रिपोर्ट्स की मानें तो सफलता के शिखर पर बैठे सहगल को धीरे-धीरे शराब की लत लग गई। वह जल्द ही शराब के इतने आदी हो गए कि इसका सीधा असर उनके काम और स्वास्थ्य पर दिखने लगा। ऐसा कहा जाता है कि एक समय ऐसा आ गया था जब के.एल. सहगल शराब पिए बिना गाना ही नहीं गा पाते थे। दस साल तक उन्होंने काफी ज्यादा शराब पी और उसके बाद चाहकर भी वह इस लत को छोड़ नहीं पाए।
आखिरकार 18 जनवरी 1947 वह काला दिन था, जब सिंगिंग की दुनिया के इस पहले सुपरस्टार ने महज 42 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वह अपने पीछे पत्नी आशा रानी और तीन बच्चों को छोड़ सबकी आंखों में आंसू दे गए।