बेटे की वजह से रामायण की 'मंदोदरी' बनीं Kajal Aggarwal, फिल्मों के चुनाव को लेकर रखी राय
साउथ सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री काजल अग्रवाल ने अपने करियर में फिल्मों को चुनाव को लेकर खुलकर बात की है। ...और पढ़ें

अभिनेत्री काजल अग्रवाल (फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम)
HighLights
रामायण में नजर आएंगी काजल अग्रवाल
मंदोदरी का किरदार निभाएंगी एक्ट्रेस
जल्द रिलीज होगी काजल की नई फिल्म
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई। अपने करियर के 22 वर्षों में अभिनेत्री काजल अग्रवाल (Kajal Aggarwal) उस मोड़ पर हैं, जहां वह एक ओर रामायणम् और एनबीके 111 जैसी बड़ी फिल्में कर रही हैं। वहीं उन फिल्मों को भी तवज्जों दे रही हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी उन पर हो।
द इंडिया स्टोरी चुनने का राज
24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली उनकी फिल्म द इंडिया स्टोरी कीटनाशकों के जरुरत से ज्यादा बढ़ते इस्तेमाल और सेहत पर उसके दुष्प्रभावों की लड़ाई पर आधारित है। ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनने को लेकर काजल कहती हैं- मुझे लगता है कि हर कलाकार के जीवन में अलग-अलग पड़ाव होते हैं। मैं ऐसे पड़ाव से गुजर रही हूं, जहां मैं इस स्तर पर हूं कि अपने लिए चुनाव कर सकूं।
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खासकर ऐसे विषय, जो मेरी जिंदगी के लिए प्रासंगिक हैं। मैं ऐसे सिनेमा का ही हिस्सा बनना चाहती हूं, जो सार्थक हो और लोगों को सही दिशा में लेकर जाए। द इंडिया स्टोरी की कहानी कहना जरूरी है। खुश हूं कि सिनेमा से जुड़कर मैं सही संदेश देने वाली फिल्में कर पा रही हूं। उसके अलावा मेरे पास वह फिल्में भी हैं, जिसमें नाच-गाना, ड्रामा सब कुछ है। वह भी मुझे पसंद है। फिल्म के निर्देशक (चेतन डीके) नए हैं।
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फिर भी मैंने उनके साथ इसलिए काम किया, क्योंकि वह अपने विषय को लेकर आश्वस्त थे। उन्होंने पूरी रिसर्च के साथ कहानी लिखी थी। उन्होंने मुझे इस फिल्म में लेने के लिए इंतजार भी किया। मैं दूसरे प्रोजेक्ट में व्यस्त थी, उसे खत्म करके फिर इससे जुड़ी। बाकी मेरा अपना स्वार्थ भी है। बतौर कलाकार ऐसी फिल्में मुझे नया मुकाम देती हैं। यह फिल्म मेरे करियर में सही समय पर आई है।
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रिसर्च पर भरोसा
फिल्म में वकील का रोल करने को लेकर किसी वास्तविक व्यक्ति या फिल्मी पात्र से रेफरेंस लेने को लेकर काजल कहती हैं- कोर्ट रूम ड्रामा की मैं प्रशंसक रही हूं। इस फिल्म के लिए रेफरेंस की जरुरत इसलिए नहीं है, क्योंकि ऐसा कुछ पहले बना नहीं है। यहां कोर्ट रूम ड्रामा से जरूरी मुद्दा है। इसमें ऐसा नहीं है कि दो वकील आपस में लड़ रहे हैं।
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मैंने चेतन की रिसर्च पर भरोसा किया, जिन्होंने पेयपदार्थ से लेकर, अनाज और कई अलग-अलग राज्यों के किसानों से बात की थी। वह ढेर सारे डाक्यूमेंट्स के साथ तैयार थे। पिछले दिनों दक्षिण भारतीय फिल्म पेद्दी में जाह्नवी कपूर को सही कैमरा एंगल से शूट न करने को लेकर खूब विवाद हुआ था।
काजल भी दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करती हैं। जाह्नवी का नाम न लेते हुए उन्होंने इस मुद्दे पर कहा कि मैं जानती हूं यह मुद्दा किससे जुड़ा है। मैं हर कलाकार को यही कहूंगी कि अगर मन में कोई भी दुविधा है, तो अपना शाट चेक कर लो। सबसे पहले जब फिल्म और स्क्रिप्ट को चुनने के स्तर पर ही तय करना जरूरी है कि आप उसमें लिखी चीजों के साथ सहज हैं या नहीं। दूसरी बात जब कैमरा एंगल्स गड़बड़ लगे, तो चेक करो।
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अगर आप सहज नहीं हैं, तो ऐतराज जताएं। सब कुछ हो जाने के बाद अगर आप रोते हैं, तो उसका कोई अर्थ नहीं है। शूटिंग के दौरान ही कहना होगा, पोस्ट प्रोडक्शन का भी इंतजार न करें। महिलाओं में वैसे भी इसकी समझ होती है कि उन्हें कैसे देखा जा रहा है। मैं अपने निर्देशक पर भरोसा करती हूं, लेकिन उससे पहले मैं उनके साथ बहुत बातचीत भी करती हूं।
अगर मुझे शाट ठीक लगता है, तो मैं चेक नहीं करती, लेकिन अगर मुझे गड़बड़ लगता है, तो मैं मानिटर की तरफ भागती हूं। मुझे समझ में आ जाता है कि क्या गलती हुई है। अगर मैं ऐसा नहीं करूंगी, तो रात को सो नहीं पाऊंगी। वह खटकता रहेगा कि मुझे चेक करना चाहिए था या एक और टेक करना चाहिए था। मैं ऐसे अपराधबोध के साथ क्यों सोऊं।
रामायणम् पर बोलीं काजल
काजल फिल्म रामायणम् का भी हिस्सा हैं। इस फिल्म को वह अपने बेटे नील के लिए अहम मानती हैं। वह कहती हैं- रामायण हमारी संस्कृति है। मैं उन्हें अपनी सारी फिल्में नहीं दिखा पाती हूं, क्योंकि वो छोटे हैं। यह फिल्म दिखा पाऊंगी, क्योंकि वह खुद रामायण और महाभारत की कहानियों में बहुत दिलचस्पी लेते हैं। फिल्म के जो ग्राफिक्स और थ्रीडी इफेक्ट्स हैं, वह देखकर भी उन्हें मजा आएगा।
मैं वही फिल्में करना चाहती हूं, जिस पर मेरे बेटे को गर्व हो। वैसे भी आपको क्या फिल्में करनी है, वह पूरी तरह से आपकी पसंद होनी चाहिए। हर किसी का अपना निजी फिल्टर होता है कि आप किस नजरिए से कहानी को देख रहे हैं। हर किसी के पास सीमित समय होता है। साल के आठ महीने ही मुझे काम करना है, तो मैं साल में केवल दो या तीन फिल्में कर पाऊंगी।
अब वह कौन सी दो फिल्में होंगी, उसका चुनाव सोच समझकर करना होगा। मैं तो इसी कारण कई बड़ी फिल्मों को ना बोल चुकी हूं। यह आसान नहीं होता है, लेकिन अपने लायक काम चुनना मेरी निजी पसंद है।
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