हीरो रहा 'गजलों का किंग', Dilip Kumar की बना आवाज, एक सिगरेट ने छीना था काम; हिट गाने देकर पाई सफलता
'गजलों के किंग' कभी दिलीप कुमार (Dilip Kumar) की आवाज बनकर छा गए थे, लेकिन एक सिगरेट ने उनका काम छीन लिया था। ...और पढ़ें

जब सिगरेट बना गायक के लिए सिर दर्द। फोटो क्रेडिट- एक्स

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। जब भी बात गजल गायिकी की आती है तो हमेशा दिमाग में जगजीत सिंह (Jagjit Singh) का आता है, लेकिन क्या आपको पता है कि बॉलीवुड में आखिर गजल का दौर किसने शुरू किया था। जगजीत सिंह से तीन दशक पहले ही एक गायक ने अपने गजल से म्यूजिक इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया था।
यह गायक उस वक्त इंडस्ट्री में आए, जब मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi), किशोर कुमार (Kishore Kumar), मुकेश (Mukesh) जैसे गायक म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज करते थे। मगर उन्होंने अपने अलग तरह की गायिकी से नाम कमाया और गजल के किंग बन गए। यह गायक कोई और नहीं, बल्कि तलत महमूद (Talat Mehmood) थे।
पर्दे पर बने दिलीप कुमार की आवाज
इंडस्ट्री में गजल गायिकी को मशहूर बनाने में तलत महमूद का ही हाथ था। वह अपनी कांपती और रेशमी आवाज में हर गजल को सुनने वालों के दिलों तक पहुंचा देते थे। 50 और 60 के दशक में तलत महमूद ने रोमांटिक और सैड सॉन्ग्स गाए। वह दिलीप कुमार की कई फिल्मों में उनकी आवाज बनकर छा गए थे।
एक सिगरेट ने छीना था काम
तलत महमूद गायिकी में किसी से कम नहीं थे, लेकिन उनकी एक तलब थी जो उनसे उनका काम ही छीन ले गई। बात 'बैजू बावरा' फिल्म की है। इस फिल्म के कुछ नग्म तलत महमूद भी गाने वाले थे, लेकिन एक बार वह रिकॉर्डिंग स्टूडियो में सिगरेट पीने लगे जिससे संगीतकार नौशाद गुस्सा हो गए।
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दरअसल, नौशाद को सिगरेट से दिक्कत थी। इसलिए वह किसी को भी रिकॉर्डिंग से पहले सिगरेट नहीं पीने देते थे। कहा जाता है कि तलत महमूद ने नौशाद को चिढ़ाने के लिए रिकॉर्डिंग से पहले सिगरेट पी। यहां तक कि इसका धुआं भी उनके मुंह पर छोड़ा। इस बात से नौशाद इतने खफा हो गए कि उन्होंने कभी भी तलत के साथ काम नहीं किया।
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एक्टिंग में भी तलत ने दिखाया दम
तलत महमूद सिर्फ गायिकी में आगे नहीं थे। उन्होंने फिल्मों में अभिनय भी किया। उन्होंने करीब एक दर्जन से ज्यादा फिल्में की थीं, जिसमें ठोकर, दिल-ए-नादान, एक गांव की कहानी, लाला रुख और मालिक शामिल हैं।
Talat Mehmood with Suraiya in Waris - X
तलत महमूद के मशहूर गीत
- हमसे आया न गया
- जाएं तो जाएं कहां
- तस्वीर बनाता हूं
- दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है
- इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा
- जलते हैं जिसके लिए
- फिर वही शाम, वही गम
- कोई नहीं मेरा इस दुनिया में
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