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    पहले ठुकराया फिर अपनाया, 63 साल पुराना Lata Mangeshkar का वो 'अमर' गीत जिसने दिलाया था 'स्वर कोकिला' का दर्जा

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 04:29 PM (IST)

    लता मंगेशकर का एक अमर गीत 1962 के युद्ध के बाद देशवासियों में जोश भरने के लिए लिखा गया था। इसे सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी भावुक हो ...और पढ़ें

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सुरों की महारानी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) केवल एक गायिका नहीं थीं बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणस्त्रोत भी थीं। अपने 75 साल के करियर में लता जी ने 30,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए।

    यूं तो लता मंगेशकर ने कई दिल छू लेने वाले और रोमांटिक गाने गाए हैं लेकिन उनका एक गाना ऐसा भी है जो हर देशवासी की आंख में आंसू ला देता है। इसकी रूह को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब ये गाना बजा तो उस समय के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) भी रो दिए।

    देशवासियों में थी गहरी निराशा

    जीं हां, आज हम जिस भाव भरे गीत की बात करने जा रहे हैं उसकी कहानी वाकई बहुत दिलचस्प है। ये बात उस वक्त की है जब पूरा देश साल 1962 में चीन से भारत को मिली हार के गम से निराश था। तब कवि प्रदीप को लगा कि क्यों न कोई ऐसा गीत लिखा जाए जो देशवासियों के आत्मविश्वास को फिर से जगा दे।

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    यहीं 'ऐ मेरे वतन के लोगों' (Ae Mere Watan Ke Logon) गाने का जन्म हुआ। सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने सबसे पहले कवि प्रदीप के लिखे इस गाने को 26 जनवरी 1963 को गाया था। इसका मकसद उन देशवासियों को श्रद्धाजंलि देना भी था जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

    लता मंगेशकर ने क्यों किया था मना?

    हालांकि जब प्रदीप लता जी के सामने इस गीत का प्रस्ताव लेकर गए तो उन्होंने इसे गाने से मना कर दिया। लता जी के पास रिहसर्ल का समय नहीं था। लेकिन तब प्रदीप ने दोबारा से उन्हें मनाने की कोशिश की तो वो मान गईं। लता जी इस गाने की प्रस्तुति के दौरान थोड़ी नर्वस थीं। हालांकि लता जी ने वैसे ही भारी मन के साथ इस गीत को खचाखच भरे स्टेडियम में प्रस्तुत किया और उनकी आवाज में वो दर्द इतना सच लग रहा था कि पंडित नेहरू की आंखों से भी आंसू बहने लगे।

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    इस तरह ये गाना हमेश-हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। यह गीत इतना लोकप्रिय हुआ कि लोगों ने हमेशा इसे याद रखा और हर स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर इसे जरूर बजाया जाता था। किसी हिंदी फिल्म का गीत न होने के बावजूद ये गीत हर एक हिन्दुस्तानी के दिल में बसता है।

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