विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जब रिकॉर्डिंग रूम में बेहोश होकर गिर गई थीं Lata Mangeshkar, गाने के लिए लेने पड़े थे 17 रिटेक

Updated: Thu, 20 Aug 2026 09:28 PM (IST)

फिल्म 'अमर' के गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान लता मंगेशकर को 17 रिटेक लेने पड़े थे। संगीतकार नौशाद की परफेक्शनिस्ट अप्रोच के चलते लता जी थककर बेहोश हो गई थीं।

News Article Hero Image

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'जिया बेकरार है', 'मन डोले मेरा तन डोले', 'प्यार किया तो डरना क्या','मोहब्बत की झूठी कहानी पर रोए'... लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के गाए कुछ ऐसे कालजयी गीत हैं जो कानों में पड़ते ही एक अलग तरह का सुकून देते हैं। लता जी को उनकी रूहानी आवाज की वजह से बॉलीवुड की 'स्वर कोकिला' कहा जाता था।

फिल्म अमर के लिए रिकॉर्ड कर रही थीं गाना

एक दौर तो ऐसा आया कि लता जी किसी भी गीत को गा दें तो संगीतकार बिना बदलाव के उसे पास कर देते थे। आज के प्रसंग में हम बात करेंगे साल 1953 के आसपास की। जब डायरेक्टर महबूब खान की फिल्म 'अमर' के संगीत की रिकॉर्डिंग चल रही थी। संगीतकार नौशाद रिकॉर्डिंग रूम में लता जी के साथ इसका रिहर्सल कर रहे थे।

स्टूडियो में थी बहुत ज्यादा गर्मी

स्टूडियो में न तो पंखा था ना एसी और एकदम पैक्ड छोटा सा रूम था। 24 साल की लता मंगेशकर इस गीत को बार-बार गाते हुए पसीने से तर हो रही थीं। उनके चेहरे पर तनाव और गाने को जल्द से जल्द पूरा करने की बेचैनी भी थी।

Madhubala (2)

हम बात कर रहे हैं साल 1954 में आई फिल्म अमर के गाने 'तेरे सदके बलम, न कर कोई गम' की। इस गाने के बोल शकील बदायूंनी ने दिए थे और नौशाद ने इसका संगीत तैयार किया था। स्वर कोकिला कही जाने वाली लता मंगेशकर ने इस अपने सुरों से सजाया था।

मधुबाला पर फिल्माया गया है गाना

इस गीत को मधुबाला पर फिल्माया गया है और दिलीप कुमार भी इसमें लीड रोल में नजर आए। लता इस गाने को रिकॉर्ड करते समय करीब आधा दर्जन बार गा चुकी थीं लेकिन नौशाद उन्हें बीच में ही रोक देते और कहते कि 'ऐ' को थोड़ा खींच के गाओ। कभी वो इसे ज्यादा स्ट्रेच कर देती तो कभी कोई और दिक्कत आ जाती। 10 बार गाने के बाद भी नौशाद इसमें से परफेक्ट एंगल नहीं निकाल पाए।

गाने का हुआ 17 बार रिटेक

ऐसा कहा जाता है कि इस गाने के 17 रिटेक हुए और 17वीं बार गाते हुए लता मंगेशकर थक कर इतना चूर और हताश हो गई कि उन्हें चक्कर आने लगे और वो वहीं कुर्सी पर बैठ गईं।

ये लता जी का परफेक्शन और मेहनत ही थी कि उस दौर के संगीतकार शंकर जयकिशन, मदन मोहन, सलिल चौधरी, एस डी बर्मन की वो चहेती गायिका बन गईं। लता ने इसके 10 गानों में से 7 गाए और ये सबसे हिट हुआ।

यह भी पढ़ें- Lata Mangeshkar के सामने खड़े होकर डर से कांप रही थीं नूतन, सिंगर ने हाथों से खिलाई थी आइसक्रीम; दिलचस्प किस्सा

यह भी पढ़ें- 68 साल पहले Lata Mangeshkar ने गाया था बॉलीवुड का सबसे 'पवित्र' प्रेम गीत, लोग कहते थे 'इंसान नहीं भगवान' ने लिखा है