10 साल का बच्चा बनकर Lata Mangeshkar ने गाया गाना, 'रक्षाबंधन' का 55 सालों में बना 'एंथम'; दिल छूने वाला किस्सा
55 साल पहले लता मंगेशकर ने 10 साल के बच्चे की आवाज में एक ऐसा गीत गाया था, जो आज ...और पढ़ें
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लता मंगेशकर ने गाया था 10 साल के बच्चे की तरह गीत/फोटो- इंस्टाग्राम
HighLights
लता मंगेशकर ने 10 साल के बच्चे की आवाज में गाया गीत
आरडी बर्मन ने रक्षाबंधन के लिए नहीं किया था कम्पोज
55 सालों से हर रक्षाबंधन में गुनगुना रहे हैं भाई-बहन
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। रक्षाबंधन का त्यौहार न सिर्फ भाई-बहन के अटूट प्रेम, बल्कि उनके एक-दूसरे पर विश्वास को भी दर्शाता है। देशभर में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधते हुए सिर्फ तोहफे और नेक नहीं लेती, बल्कि यह वचन भी लेती हैं कि जिंदगी भर वह उसकी रक्षा करेगा।
हालांकि, त्यौहार हो और वहां पर गाने न हो, तो फेस्टिवल की चमक फीकी सी लगती है। 28 अगस्त को पूरे देशभर में धूमधाम से रक्षाबंधन सेलिब्रेट किया जाएगा। इस मौके पर आज हम आपको उस गीत के बारे में बता रहे हैं, जो रक्षाबंधन के त्यौहार के लिए नहीं बना था, लेकिन आज इस फेस्टिव का 'एंथम' बन चुका है। इतना ही नहीं, जिस गाने की हम बात कर रहे हैं, उसे लता मंगेशकर ने 10 साल के बच्चे की आवाज में गाया था।
रक्षाबंधन के लिए नहीं बना था देवानंद की फिल्म का गाना
पिछले 55 सालों से हर उम्र के लोगों ने रक्षाबंधन के मौके पर देवानंद और जीनत अमान पर फिल्माया 'फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है' गा रहे हैं। अब तो यह रक्षाबंधन का एंथम बन चुका है। हालांकि, यह गाना राखी के मौके के लिए बना ही नहीं था। दरअसल,साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' में 'फूलों का तारों का' बनाते हुए पंचम दा ने राखी को ध्यान में रखकर नहीं बनाया था।
संगीतकार पंचम दा ने अपने एक इंटरव्यू में ये बताया था कि गीत कहानी की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया था। जहां एक भाई अपनी बिछड़ी हुई बहन को बचपन की याद दिलाने के लिए पेड़ के पीछे से छुपकर ये गीत गाता है। हालांकि, आज के समय में ये गाना रक्षाबंधन का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। इस गाने को लता मंगेशकर और किशोर कुमार दोनों ने गाया था।
लता मंगेशकर ने 10 साल के बच्चे की तरह गाया गीत
दरअसल, हरे रामा हरे कृष्णा के इस गाने के दो वर्जन हैं, एक मेल दूसरा फीमेल। देवानंद के किरदार के बड़े होने के जहां किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी है, तो वहीं बचपन में 10 साल के मास्टर सत्यजीत की आवाज लता मंगेशकर बनी हैं। 'फूलों का तारों का गाने' को बचपन और जवानी दोनों उम्र में दुखाया गया है।
लता मंगेशकर ने 10 साल के बच्चे को महसूस करते हुए रक्षाबंधन का एंथम कहे जाने वाले इस गीत को इतनी शानदार तरीके से गाया था कि संगीतकार आरडी बर्मन भी इसे देखकर बिल्कुल हैरान रह गए थे।
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