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7 साल रिजेक्टेड गानों की लिस्ट में पड़ा रहा Mohammad Rafi का ये गाना, 58 साल बाद भी अमर है

Published: Thu, 19 Feb 2026 09:30 PM (GMT+05:30)

मोहम्मद रफी के गाने जहां इतने पॉपुलर होते हैं वहीं उनकी एक गीत रिकॉर्ड होने के बावजूद सालों तक लोगों ...और पढ़ें

गाना रिकॉर्ड करते हुए रफी (फोटो-इंस्टाग्राम)

गाना रिकॉर्ड करते हुए रफी (फोटो-इंस्टाग्राम)

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। मोहम्मद रफी की आवाज में वो ताकत थी जो किसी भी गाने को अमर बना देती थी। लेकिन आज की कहानी एक ऐसे पॉपुलर गाने की है जो रिकॉर्ड होने के बावजूद सालों तक लोगों से छुपा रहा। जरा सोचकर देखिए रफी साहब की आवाज हो, गाने के शानदार बोल हो, शानदार म्यूजिक हो लेकिन वो गाना कभी पर्दे पर ना आ पाए। ऐसे में एक फनकार को कैसा लगेगा?

क्यों कर दिया गया था रिजेक्ट?

ये गाना लगातार ठुकराया गया और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दो बड़े सुपरस्टार्स ने इसे अपनी फिल्म में लेने से इनकार कर दिया। यही वजह है कि ये गाना एक दो साल नहीं बल्कि 7 सालों तक रिजेक्टेड गानों की लिस्ट में पड़ा रहा। अब सवाल ये है कि कौन सा ये गाना था और कौन थे वो कलाकार जो इसकी ताकत को नहीं पहचान पाए।

Rafi (2)

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कौन सी फिल्म का था गाना?

इस गाने की शुरुआत हुई 1961 में बनी फिल्म 'जब प्यार किसी से होता है' से हुई थी। फिल्म के निर्माता और निर्देशक थे नासिर हुसैन और देवानंद, प्राण और आशा पारिख ने काम किया था। इसका संगीत जय किशन ने दिया था और गीत लिखे थे हसरत जयपुरी और शैलेंद्र ने। लेकिन एक गाने को जिसे हसरत जयपुरी साहब ने गाया था उसे फिल्म से बाहर कर दिया गया। इसे गाया था मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर ने। गाने के बोल थे 'आजकल तेरे मेर प्यार के चर्चे हर जुबान पर'।

देवानंद को नहीं आया था पसंद

जब ये गीत देवानंद को सुनाया गया तो उन्हें लगा कि उनके किरदार की गंभीरता और फिल्म के मूड के हिसाब से ये बहुत लाउड है इसलिए उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके पांच साल बाद 1966 में फिल्म सूरज की तैयारी चल रही थी। हीरो थे राजेंद्र कुमार। शंकर जयकिशन अपनी इसी धुन को लेकर पहुंचे। राजेंद्र कुमार ने भी ये गीत रिजेक्ट कर दिया। उन्हें लगा कि ये गीत उनकी स्क्रीन इमेज से मेल नहीं खाता। इस तरह दूसरी बार ये गाना ठुकरा दिया गया। दो बड़े कलाकारों ने जब इस धुन को ठुकराया तो शंकर जयकिशन काफी नाराज हुए।

Shammi

शम्मी कपूर पर फिल्माया गया था 

इसके बाद 1968 में ये पहुंचा फिल्म ब्रह्मचारी में। फिल्म के हीरो थे शम्मी कपूर। शम्मी कपूर ने जैसे ही ये धुन सुनी वो एक्साइटेड हो गए। उनकी उर्जा और डांस इस गाने के लिए बिल्कुल परफेक्ट था। फिल्म में उनके अपोजिट मुमताज नजर आईं। इसी के साथ ये गीत सीधे लोगों के दिलों में उतर गया। इस तरह मोहम्मद रफी की आवाज से सजा ये गीत बॉलीवुड का कल्ट क्लासिक बन गया।

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