जब बीच रिकॉर्डिंग के समय जज्बाती हो गए थे Mohammad Rafi, 62 साल पुराने गाने को गाते हुए खूब बहाए थे आंसू
मोहम्मद रफी ने 62 साल पहले एक गाना बहुत ही भारी मन से रोते हुए रिकॉर्ड किया था। क्या है इसके पीछे की वजह और रफी क्यों मन्ना डे के कंधे पर सिर रखकर रोए ...और पढ़ें
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। मोहम्मद रफी (Mohammad Rafi) की मखमली आवाज में वो जादू था कि इसकी रुहानियत को हर बच्चे से लेकर बढ़ा भी हर कोई ऐसे ही महसूस करता था। गाने के भाव सीधा दिलों तक पहुंचते थे।
वहीं रफी साहब भी गाने को इतना डूबकर गाते कि कई बार वो इसमें खो ही जाते थे। क्या आप विश्वास करेंगे अगर हम आपसे कहें कि मोहम्मद रफी का एक ऐसा गाना था जिसे वो गाते हुए सच में स्टूडियो में सिसकियां लेते हुए रोने लगे। चलिए जानते हैं क्या है वो दिलचस्प किस्सा।
कैफी आजमी ने लिखे थे गीत के बोल
हम बात कर रहे हैं साल 1964 में आई फिल्म 'हकीकत' (Haqeeqat) के गाने 'होके मजबूर मुझे उसने भुलाया तो होगा' (Hoke Majboor Usne Bulaya)। इस गाने को मोहम्मद रफी और मन्ना डे ने गाया था। कैफी आजमी साहब ने इसके बोल लिखे थे और धुन तैयार की थी मदन मोहन ने। गाने के बोल इतने जज्बाती थे कि रिहर्सल के समय रफी धीरे-धीरे इसमें डूब रहे थे। फिर रिकॉर्डिंग के दौरान वो काफी इमोशनल होकर रोने ही लगे।
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भारत-चीन युद्ध पर बना है गाना
गाना पूरा होने के बाद वो मन्ना डे के गले लगकर खूब रोए। इस गाने में सैनिकों की विरह, कर्तव्य, देशभक्ति और अनकही मोहब्बत साफ दिखाई देती है। सैनिक सरहद पर तैनात होकर अपनी प्रेमिका या पत्नी को याद कर रहे हैं। यह गाना भारत-चीन युद्ध (1962) की पृष्ठभूमि पर आधारित है। ये कहता है कि सैनिक भले ही देश की रक्षा के लिए सरहद पर खड़ा है, लेकिन उसका एक हिस्सा अपने घर और अपनों से हमेशा जुड़ा रहता है।
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चेतन आनंद द्वारा निर्देशित फिल्म, 1962 के भारत-चीन युद्ध और लद्दाख के प्रसिद्ध रेजांग ला की लड़ाई की सच्ची और मार्मिक घटनाओं पर आधारित एक महान देशभक्तिपूर्ण कहानी है। इसमें बलराज साहनी और धर्मेंद्र जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।