69 साल पहले आया Mukesh का गाना, बेटे के बिछड़ने के गम में लिखा गीत; रोमांटिक सॉन्ग समझकर गाते हैं लोग
लता मंगेशकर और मुकेश का गाया गाना 'आ लौटकर आजा मेरे मीत' अक्सर लोग रोमांटिक समझते हैं, लेकिन इसका असली अर्थ कुछ और है। यह गाना पंडित भरत व्यास ने अपने ...और पढ़ें
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समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की मखमली आवाज का कोई तोड़ नहीं है। उनकी आवाज में वो अद्भुत संतुलन था कि वो किसी भी गीत को भावनाओं की गहराई में उतार देती थी। लग जा गले, अजीब दास्तां है ये, तुम आ गए हो नूर आ गया है, तेरे बिना जिंदगी उनके कुछ पॉपुलर गाने हैं।
आज हम आपको लता जी के एक ऐसे ही गाने के बारे में बताने वाले हैं जिसे लोग समझते हैं कि ये एक रोमांटिक गाना है लेकिन उसका अर्थ बिल्कुल अलग है। जी हां, हम बात कर रहे हैं फिल्म रानी रूपमित के गाने आ लौटकर आजा मेरे मीत की। इस गाने को सुनकर अक्सर लोगों को लगता है कि किसी प्यार करने वाले ने अपनी प्रेमिका के लिए ये गाना गाया है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।
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बेटे के बिछड़ने के पर लिखा था गाना
इस गाने की कहानी बेहद इमोशनल है और इसमें एक पिता का दर्द छिपा हुआ है। इसे पंडित भरत व्यास ने लिखा था। आ लौट के आजा मेरे मीत और जरा सामने तो आओ छलिए को व्यास ने अपने बेटे से बिछड़ने के बाद लिखा था। इसका फीमेल वर्जन लता मंगेशकर और मेल वर्जन मुकेश ने गाया है।

लोगों ने इस गाने को दिल की गहराई तक महसूस किया। गाने के बोल में छिपी वेदना एक पिता की संवेदना से आई थी। गाना भरत व्यास ने उस समय लिखा था जब उनका बेटा उनसे रूठकर कहीं चला गया था और वो इस दर्द से गुजर रहे थे। पर्दे पर यह गाना अभिनेता महिपाल (Mahipal) और अभिनेत्री निरूपा रॉय पर फिल्माया गया था।
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मुकेश ने गाया है गाना
जनम जनम के फेरे साल 1957 में रिलीज हुई थी। इसमें मनहर देसाई, निरुपा रॉय, बीएम व्यास और एसएन त्रिपाठी ने काम किया था। यह फिल्म और इसका यह गाना अपने समय में ब्लॉकबस्टर रहे थे। आज भी जब मुकेश जी के सबसे बेहतरीन दर्द भरे गीतों की बात होती तो लौट आ छलिए का नाम सबसे पहले आता है।