'वो न होते तो आज मैं...', गुरु पूर्णिमा पर भावुक हुए Vikrant Massy; बॉलीवुड में इन्हें मानते हैं अपना टीचर
29 जुलाई को गुरुपूर्णिमा है, ऐसे में 'मुसाफिर कैफे' से धमाल मचाने वाले अभिनेता विक्रांत मैसी ने बताया कि उनका बॉलीवुड में 'गुरु' कौन हैं, जिनके पास वह ...और पढ़ें

गुरु पूर्णिमा के मौके पर विक्रांत मैसी ने किया टीचर को विश/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दीपेश पांडे, मुंबई। पिछले कुछ वर्षों में लगातार गंभीर भूमिकाएं निभाने के बाद अभिनेता विक्रांत मैसी वेब सीरीज मुसाफिर कैफे में रोमांटिक अंदाज में नजर आएंगे। 24 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित होने जा रही यह वेब सीरीज दिव्य प्रकाश दुबे द्वारा लिखी इसी नाम की किताब पर आधारित है।
फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा को अपना गुरु मानने वाले विक्रांत का मानना है कि बिना गुरु के वह आज इस पड़ाव पर न होते, जहां आज हैं। उनसे उनके शो, गुरु पूर्णिमा और अभिनय सफर पर बातचीत की।
गुरु से मिली जीवन को दिशा
गुरु पूर्णिमा से पहले अपने जीवन के पहले गुरु को याद कर विक्रांत कहते हैं, "स्कूल में मेरे एक हिंदी के टीचर थे, जिनका नाम था धीरज नारायण सिंह। उन्होंने मुझे जिंदगी की कई अहम बातें सिखाई। आज मैं एक इंसान के तौर पर अपनी जिंदगी में जो कुछ भी हूं, काफी हद तक उनकी वजह से ही हूं। मेरी जिंदगी में जो नैतिकताएं हैं, मैं जिंदगी को जिस नजरिए से देखता हूं, जिस तरह से जीने की कोशिश करता हूं, उसका आधार कहीं न कहीं, उन्होंने ही मुझे प्रदान किया था। अगर वो नहीं होते तो आज मैं जैसा हूं, वैसा नहीं होता। इस गुरु पूर्णिमा पर मैं उनसे यही कहना चाहूंगा कि आप तंदुरुस्त रहें, स्वस्थ रहें। आपकी, आपकी बातों की और आपके द्वारा की गई पिटाई की भी बहुत याद आती है।’

सिनेमा में इन्हें मानते हैं अपना गुरु
सिनेमा इंडस्ट्री में अपने गुरु के बारे में विक्रांत बताते हैं, "सिनेमा इंडस्ट्री में मेरे एक ही गुरु हैं, वो हैं विधु विनोद चोपड़ा जी (फिल्मकार)। वो मेरे लिए मेरे पिता के समान हैं। मैंने पहले भी कहा है कि सिनेमा जगत की इस भूल भुलैया में वो मेरा एक ऐसा ठिकाना हैं, जहां मैं रात या आधी रात, कभी भी जा सकता हूं। मुझे लगता है कि वो दरवाजे मेरे लिए हमेशा खुले रहेंगे।’
महसूस हुआ जुड़ाव
शो से बतौर सह निर्माता जुड़े विक्रांत को इसे स्वीकार करने से पहले एक दर्शक और अभिनेता के साथ-साथ बतौर सह निर्माता भी सोचना था। वह कहते हैं, "मैं सच कहूं तो इसमें मेरे ऊपर शो के प्रोडक्शन या सह निर्माता होने का कोई भार नहीं था। पूरा भार फिल्म के दूसरे निर्माताओं ने उठा रखा था, उन्होंने मुझे इससे बतौर सह निर्माता जुड़ने का मौका दिया। यह सही है कि कोई भी कहानी हम सबसे पहले एक दर्शक या श्रोता के तौर पर ही सुनते हैं, फिर बतौर कलाकार उसके बारे में सोचते हैं।
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इस शो में बतौर कलाकार मेरे लिए सबसे आकर्षक यह था कि मैंने काफी समय से ऐसा कुछ रोमांटिक काम नहीं किया था। बतौर दर्शक इस कहानी के हमारी वास्तविक जिंदगी से जुड़ाव ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मुझे इस कहानी में वो चीजें मिली, जो मैंने ही नहीं हम सबने अपने निजी जीवन में भी महसूस की है।’
मिला दर्शकों का साथ
कलाकार के सामने अक्सर यह चुनौती होती है कि वो कैसा काम करें? जिससे उन्हें संतुष्टि मिलती है या जैसा लोग उनसे चाहते हैं? विक्रांत कहते हैं, ‘इस मामले में मैं अपने दर्शकों, अपने प्रशंसकों का बहुत शुक्रगुजार हूं। मुझे पेशेवर तौर पर अभिनय करते हुए 22-23 साल हो गए। कई बार मैं भी सोचता हूं कि इतने लंबे समय तक लगातार उनका मेरे साथ बने रहना कैसे संभव हुआ? फिल्म हो या टीवी या वेब सीरीज मैंने ज्यादातर वही काम किया है, जो बतौर कलाकार मैं करना चाहता हूं। ये मेरे दर्शकों और प्रशंसकों का बड़प्पन है कि उन्होंने अब तक मेरे हर निर्णय में मेरा साथ दिया है।’

ठहराव की खोज में मुसाफिर
सफर में लगातार चलता जा रहा मुसाफिर या कैफे, जहां लोग ठहराव, कुछ पल की शांति में बैठते हैं। दोनों में से अपने जीवन के करीब किसे पाते है? इस पर विक्रांत कहते हैं, ‘मैं भी कहीं न कहीं जिंदगी को समझ रहा हूं और अभी भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहा हूं। मैं एक हद तक मुसाफिर भी हूं, जो जिंदगी को महसूस करना चाहता है। ये जानने की उत्सुकता भी है कि सफर में जिंदगी ने मेरे लिए क्या रखा है? इसके साथ कुछ समय के लिए रुककर किसी कैफे में बैठकर जिंदगी को समझना और देखना भी चाहता हूं। फिलहाल मेरी जिंदगी कहीं न कहीं इन दोनों के बीच है।
निजी जीवन में मेरा एक बेटा है, छोटा सा परिवार है, मुझे उन लोगों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। इसके साथ बाहर जाकर जिंदगी को देखना समझना और सफर करना, अपने आपको आजमाना और अच्छी कहानियों का हिस्सा बनना भी मुझे अच्छा लगता है।’