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    Bhooth Bangla से पहले अक्षय-प्रियदर्शन ने किया Dhurandhar का गुणगान, 8 घंटे शिफ्ट और अवॉर्ड फंक्शन पर रखी राय

    By Smita SrivastavaEdited By: Ekta Gupta
    Updated: Sat, 04 Apr 2026 04:26 PM (IST)

    अक्षय कुमार और प्रियदर्शन सालों बाद 'भूत बंगला' (Bhooth Bangla) के साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। फिल्म रिलीज से पहले उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश. ...और पढ़ें

    कॉमेडी एक्टर्स को अवॉर्ड ना मिलने पर बोले अक्षय कुमार

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। लगभग 14 सालों के इंतजार के बाद, प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की ब्लॉकबस्टर जोड़ी फिल्म ‘भूत बंगला’ के साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रही है। फिल्म को लेकर अक्षय ने स्मिता श्रीवास्तव को जहां निजी जीवन से जुड़े दिलचस्प किस्से बताए, वहीं कामेडी फिल्मों के लिए मशहूर प्रियदर्शन ने शायद से कहा कि कलाकार को ‘मसखरा’ समझने की भूल न करें।

    भूत प्रेत में विश्वास है?

    अक्षय - मैंने भी कभी देखा नहीं, लेकिन हां वो एनर्जी महसूस की है। एक किस्सा था हम लोखंडवाला जहां पहले रहते थे। तो मेरी पत्नि (ट्विंकल खन्‍ना) ने कहा कि इस घर में कुछ अजीब है। मैं कहता था कुछ नहीं है। तब मेरा बेटा करीब छह-सात साल का था। एक दिन रात में 11 या 12 बजे किसी से बात करने लग गया कि सुनो इधर नहीं जगह है, आप नीचे जाओ। वहां हमें कोई दिख नहीं रहा और वो बात कर रहा। उस समय मैं और मेरी पत्‍नी दोनों उसे देख रहे थे। ट्विंकल ने कहा मैंने तुमसे कहा था। अब यह नहीं पता कि वह क्‍या था? कैसे था?

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    प्रियदर्शन : क्या वह नींद में था ?

    अक्षय : नहीं। अगर आप नींद में चलने वाली बात कह रहे हैं, ऐसा नहीं था। उसके बाद मुझसे और मेरी पत्‍नी से सामान्‍य तरीके से बात की। हमने उससे पूछा कि वो कौन था, तो उसने बताया कि एक महिला यहां आती रहती है। मुझे नहीं पता उसके बारे में क्‍या कहें। प्रियदर्शन सर भूत में विश्‍वास नहीं करते हैं, लेकिन पृथ्‍वी भूत के ऊपर फिल्‍म बनाई है।

    प्रियदर्शन आपने कहा था कि मोहनलाल और अक्षय आपसे कभी सवाल नहीं पूछते। क्‍या बाकी के साथ काम करना इसलिए मुश्किल है, मानो उनकी लंबी चौड़ी टीम होती है समय पर नहीं आते?

    प्रियदर्शन- जिस दिन से मैंने ड्रेसिंग बनाना शुरू की है तब से ही इंडस्‍ट्री में समस्‍या है। जब कोई पुरानी समस्या हल होती है, तो नई समस्या सामने आ जाती है। मैं उसे लेकर परेशान नहीं होता। मैं जल्द शांति से अपनी विदाई बनाता हूं। शुक्र है कि मेरा काम हो जाता है। उदाहरण के लिए सैफ अली खान के साथ काम कर रहा हूं। वह मैच्योर बखारे की तरह है।

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    अक्षय आप इतने भरोसा और किन निर्देशकों पर करते हैं?

    अक्षय - ऐसे बहुत ही कम लोग हैं। इनके अलावा संतोषी साहब (राजकुमार संतोषी) बस।

    गर्दिश, विरासत जैसी विदाईयों के बाद आपका रुख कामेडी विदाईयों की तरफ हो गया...

    प्रियदर्शन : मैं हेरा फेरी नहीं करने वाला था। मैं गर्दिश और विरासत यहां पर इसलिए बना रहा था, दक्षिण में मैं कामेडी बना रहा था। इसीलिए मैंने सोचा अब कामेडी बनाने की जरूरत नहीं है। दुर्भागयहीनता से मैंने कामेडी की ओर रुख किया। अच्छी बात यह है कि मैं अक्षय कुमार, परेश रावल जैसे कलाकारों को ढूंढो, जो वास्तव में वैसे ही बेहतरीन फॉर्म बना सकते हैं ।

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    धुरंधर के निर्देशक धर ने आपके साथ बतौर डायलॉग राइटर काम किया था?

    प्रियदर्शन - बेटी की सफलता जैसे ही खुशी होती है, वैसे ही आदित्य के लिए हो रही है। इस फिल्म ने कई भ्रम तोड़े हैं। पहले विशेषज्ञ कहते थे कि फिल्म बस 2 घंटे 10 मिनट की बनाओ वहीं धुरंधर के दोनों पार्ट 7 घंटे से ज्यादा के हैं लेकिन खुश होकर इसे देख रहे हैं।

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    आठ घंटे की शिफ्ट फिल्म इंडस्ट्री में हो सकती है या नहीं?

    अक्षय- मैं तो बीस साल से करते आ रहा हूं, बाकी लोगों का नहीं पता।

    प्रियदर्शन- अपनी जिंदगी में पहली बार मैंने आठ घंटे की शिफ्ट की है। मैंने कलाकारों को कभी थका हुआ नहीं बल्कि फ्रेश देखा। तय घंटों में आप अपनी पूरी एनर्जी लगा देते हैं तो ये आइडिया शानदार है।

    अक्षय- लेकिन ये आठ आपको सेट पर ही रहना है ये नहीं कि इसके बीच में आप वैनिटी में हो या कहीं और।

    कॉमेडी फिल्म या उसे करने वाले कलाकारों को अवॉर्ड ना देने की बात आपने कई बार कही है। आपको लगता है कि अवॉर्ड के मापदंड में बदलाव की जरुरत है।

    प्रियदर्शन- कॉमेडियन जैसी कोई चीज नहीं होती। वह सिर्फ एक अच्छा कलाकार होता है और एक अच्छा कलाकार जब कॉमेडी अच्छे से करता है तभी कॉमेडी पसंद की जाती है। जब वह इमोशनल सीन बेहतर करता है तभी भावनाएं निकलती हैं। किसी को हंसाना सबसे कठिन काम होता है। मैं फिल्म बना रहा हूं लेकिन मैं खुद जोक्स सुनाउंगा तो लोग नहीं हंसेंगे क्योंकि में इसमें बहुत बुरा है। अक्षय, मोहनलाल जैसै कलाकार वास्तव में लोगों को हंसा सकते हैं ।

    अक्षय कुमार- चार्ली चैपलिन ने पूरी उम्र दुनिया को हंसाया वो भी बिना किसी डायलॉग के। हमें कोई आवाज नहीं उठानी है, किसी हड़ताल पर नहीं जाना है, किसी को देना है दे, नहीं देना न दे।

    प्रियदर्शन- हम बस एक बात रख रहे हैं।

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